yojana

  • Nov 20 2017 12:07PM

किसानों की आय होगी दोगुनी, समृद्ध होंगे गांव

किसानों की आय होगी दोगुनी, समृद्ध होंगे गांव
कुमार विकास
आदिवासी बहुल झारखंड लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है. खनिज संपदाओं, जंगलों एवं प्राकृतिक संसाधनों से भरा यह प्रदेश अपनी गोद में पलनेवाली गरीबी के नासूर को खत्म करने के लिए लगातार प्रयासरत है. गरीबी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सरकार ने राज्य में जोहार योजना की शुरुआत की है. झारखंड सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद गरीब परिवारों को आजीविका के साधनों से जोड़ कर उनकी आय में गुणात्मक वृद्धि करना है.

जोहार योजना के तहत यहां के पारंपरिक आजीविका के साधनों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जायेगा, ताकि ग्रामीण परिवार अपने मन मुताबिक रोजगार से जुड़ सकें. जोहार योजना में 50 फीसदी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति को भी प्राथमिकता दी जायेगी. इसे ध्यान में रखते हुए झारखंड स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जोहार योजना की शुरुआत की. 1500 करोड़ की इस जोहार योजना से जहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जायेगी, वहीं राज्य से गरीबी को खत्म करने पर भी जोर दिया जायेगा.
 
योजना का उद्देश्य
जोहार योजना के तहत मुख्य रूप से उन्नत खेती, पशुपालन, मछली पालन एवं लघु वनोपज पर सघन रूप से काम करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ग्रामीण परिवारों को बड़े स्तर के उत्पादन के लायक बना कर उनकी आय में वृद्धि की जा सके. इसके तहत सिंचाई के आधुनिकतम साधनों की सुविधा भी सरकार उपलब्ध करायेगी. जोहार के क्रियान्वयन में कौशल विकास को भी तवज्जो दिया गया है, ताकि ग्रामीणों को कृषि कार्यों के लिए जो प्रशिक्षण मिले, वह उनकी आजीविका के लिए कारगर हो.
 
लक्ष्य
इस योजना का लक्ष्य ग्रामीण परिवारों की कृषि एवं गैर कृषि आजीविका संबंधित गतिविधियों समेत उत्पादों में विविधता एवं उत्पादकता बढ़ाना है. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए परियोजना में कौशल विकास एवं वित्त पोषण समावेशन की भी व्यवस्था है. इसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, वहीं 50 फीसदी से अधिक महिला किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा.
 
लघु वनोपज उत्पादों को बड़े स्तर पर बाजार से जोड़ने की है योजना
झारखंड का एक बड़ा इलाका पहाड़ एवं जंगलों से घिरा है. जोहार योजना में इस बात का ध्यान रखते हुए लघु वनोपज उत्पादों को भी बड़े स्तर पर बाजार से जोड़ने की योजना है. इसके तहत लाह, इमली, चिरौंजी, तुलसी, लेमन ग्रास, मुनगा एवं शहद जैसे अच्छी मांगवाले उत्पादों के जरिये आमदनी का नया रास्ता निकाला गया है. सिंचाई के साधनों की कमी को भी दूर करने का उपाय किया गया है. 180 करोड़ रुपये सिर्फ सिंचाई सुविधाओं के निर्माण एवं विकास में लगाया जाना है, ताकि उन्नत खेती को प्रोत्साहित किया जा सके. सरकार का विश्वास है कि वैसे किसान परिवार, जो सिंचाई सुविधाओं के अभाव में साल में सिर्फ एक ही खेती कर पाते हैं, जोहार के जरिये सालोंभर खेती कर पायेंगे. जोहार में ग्रेविटी फ्लो सिंचाई, सौर आधारित लिफ्ट सिंचाई एवं अाधुनिक लिफ्ट सिंचाई पर जोर दिया जायेगा.
 
राष्ट्रपति ने कहा
झारखंड स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने झारखंड की बहुप्रतीक्षित जोहार योजना को लॉन्च किया. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सखी मंडलों द्वारा किये जा रहे कार्यों की तारीफ करते हुए राज्य सरकार को बधाई दी. उन्होंने कहा कि झारखंड के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए जोहार योजना की शुरुआत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है.
 
मुख्यमंत्री ने कहा
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि गांवों के विकास को सुनिश्चित करके ही न्यू इंडिया के सपने को सच किया जा सकता है. सभी के सहयोग से राज्य में अब विकास की ही बातें होंगी. महिलाएं सुदृढ़ होंगी, तो राज्य व देश मजबूत होगा. जोहार योजना से जहां बिचौलियों पर अंकुश लगेगा, वहीं ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी.
 
महिला संगठनों में नयी ऊर्जा का संचार
झारखंड के 17 जिलों के 68 प्रखंड में जोहार योजना का क्रियान्वयन किया जाना है. इसके तहत 3400 उत्पादक समूह एवं 30 उत्पादक संगठनों का गठन कर उत्पादन एवं बिक्री को बढ़ावा दिया जायेगा. इन प्रखंडों का चयन भौगोलिक हालात एवं प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया है. इस योजना के तहत उत्पादक समूहों का गठन किया जाना है, ताकि बड़े स्तर पर उत्पादन को सुनिश्चित किया जा सके एवं उत्पादों को सीधे बाजार मुहैया कराया जा सके. जोहार योजना की खासियत यह है कि राज्य के अलग-अलग जिलों के हालात के मुताबिक वहां के ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका के साधनों से जोड़ा जायेगा. इस लक्ष्य को अंजाम तक पहुंचाने में गांव-गांव में मौजूद सखी मंडलों की अहम भूमिका होगी. दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बनाये गये ये सखी मंडल आज ग्राम विकास की धुरी बन चुके हैं. जोहार योजना इन सखी मंडलों की ताकत और आजीविका मिशन के तहत तैयार संसाधनों को ही अपना हथियार बनाने जा रही है. राज्य सरकार के सखी मंडल उद्यमी बनाने के मंत्र ने इन महिला संगठनों में नयी ऊर्जा का संचार किया है. आजीविका मिशन के तहत बनाये गये सखी मंडल की सदस्य आज सरकार की इसी नीति की बदौलत अपने गांव में उद्यमों से जुड़ कर अच्छी कमाई कर रही हैं. यही नहीं, ये सरकार के विश्वास का ही नतीजा है कि राज्य के 50 से ज्यादा प्रखंड एवं जिला कार्यालयों में सखी मंडल आजीविका दीदी कैंटीन चलाई जा रही है. आजीविका मिशन के जरिये सरकार ने जड़ से गरीबी मिटाने की जो नींव रखी थी, जोहार योजना के माध्यम से उसे आगे बढ़ाते हुए इस सपने को धरातल पर उतारने की कोशिश की जा रही है. इस योजना के तहत सखी मंडल की बहनों को सशक्त आजीविका से जोड़ कर समृद्धि के नये मुकाम तक पहुंचाने का कार्य किया जायेगा.

विकसित झारखंड का सपना होगा साकार
गांवों में खुशहाली लाना झारखंड सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है. मुख्यमंत्री रघुवर दास का मानना है कि समृद्ध गांव के बिना विकसित झारखंड का सपना अधूरा है. इसी सोच को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सरकार गांव, महिला और किसानों को जोहार के जरिये विकास का पंख लगाना चाहती है, ताकि आनेवाले दिनों में समृद्धि के पंख से जब विकास धरातल पर उतरेगा, तो विकसित झारखंड का सपना साकार होगा. झारखंड सरकार की जोहार योजना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प एवं न्यू इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने में मदद करेगी.
 
बकरी-मुर्गी पालन को बढ़ावा
बकरी एवं मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए जोहार योजना के तहत बने हर उत्पादक समूह को आजीविका निधि के रूप में चार-चार लाख रुपये देने की व्यवस्था की गयी है, ताकि राज्य के ग्रामीण अपने पारंपरिक रोजगार के साधनों से जुड़े रहें और नयी तकनीक से अच्छी कमाई भी कर सकें. यही नहीं आजीविका मिशन की तर्ज पर पशु सखियों का कैडर गांवों में पशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी तत्पर रहेगा. राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों एवं सरकार की डोभा योजना की सफलता को देखते हुए जोहार के तहत मछली उत्पादन पर भी खासा ध्यान दिया गया है. सरकार ग्रामीणों को तकनीक, प्रशिक्षण के अलावा जाल, बीज एवं फीड भी उपलब्ध करायेगी. सरकार की इस पहल के पीछे सोच यही है कि हर ग्रामीण परिवार अपने निजी जलाशय एवं डोभा आदि में मछली पालन करे, ताकि हर गांव से मछली को बड़े बाजार तक पहुंचा कर मछली पालकों को अच्छी कीमत दिलायी जा सके.
 
लघु वनोपज उत्पादों को बड़े स्तर पर बाजार से जोड़ने की है योजना
झारखंड का एक बड़ा इलाका पहाड़ एवं जंगलों से घिरा है. जोहार योजना में इस बात का ध्यान रखते हुए लघु वनोपज उत्पादों को भी बड़े स्तर पर बाजार से जोड़ने की योजना है. इसके तहत लाह, इमली, चिरौंजी, तुलसी, लेमन ग्रास, मुनगा एवं शहद जैसे अच्छी मांगवाले उत्पादों के जरिये आमदनी का नया रास्ता निकाला गया है. सिंचाई के साधनों की कमी को भी दूर करने का उपाय किया गया है. 180 करोड़ रुपये सिर्फ सिंचाई सुविधाओं के निर्माण एवं विकास में लगाया जाना है, ताकि उन्नत खेती को प्रोत्साहित किया जा सके. सरकार का विश्वास है कि वैसे किसान परिवार, जो सिंचाई सुविधाओं के अभाव में साल में सिर्फ एक ही खेती कर पाते हैं, जोहार के जरिये सालोंभर खेती कर पायेंगे. जोहार में ग्रेविटी फ्लो सिंचाई, सौर आधारित लिफ्ट सिंचाई एवं अाधुनिक लिफ्ट सिंचाई पर जोर दिया जायेगा.