yojana

  • Sep 5 2018 9:25AM

मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1400 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने खरीफ फसल में लगे किसानों को बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने 2018-19 सत्र के सभी 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है. सबसे अधिक मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में प्रति क्विंटल 1400 रुपये की वृद्धि की है. वहीं, सामान्य धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में दो सौ रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान में 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है. वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से जरूरी कृषि नीति में बदलाव करने का संकेत दिया गया है


अब धान उत्पादित किसानों को मिल सकता है 1900 रुपये प्रति क्विंटल की दर
राज्य में करीब 95 हजार पंजीकृत किसान हैं, जो निर्धारित केंद्र पर जाकर अपने धान की बिक्री करते हैं. केंद्र सरकार ने धान की दो किस्में सामान्य व ग्रेड ए के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की है. फिलहाल राज्य के खरीफ फसल उत्पादित किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 1700 रुपये मिलता है. इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी के तहत प्रति क्विंटल धान की कीमत 1550 रुपये निर्धारित किया गया था. इस पर राज्य सरकार 150 रुपये का और बोनस दे रही है. इस प्रकार राज्य में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से निर्धारित है, लेकिन अब खरीफ फसल पर एमएसपी बढ़ाने से राज्य के धान उत्पादित किसानों को 1900 रुपये मिल सकता है.

खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी (रुपये प्रति क्विंटल)
फसल                                         पहले             अब             वृद्धि
मूंग                                             5575           6975         1400
नाइजर सीड (काला तिल)                 4050           5877        1827
सूरजमुखी                                     4100           5388         1288
कपास (मीडियम स्‍टेपल)                   4020          5150          1130
कपास (लॉन्‍ग स्‍टेपल)                       4320          5450          1130
रागी                                             1900           2897         997
तिल                                              5300          6249         949
ज्‍वार (हाइब्रिड)                              1700           2430        730
ज्‍वार (मालदंडी)                               1725           2450        725
बाजरा                                           1425           1950         525
मूंगफली                                          4450          4890        440
सोयाबीन                                        3050           3399        349
मक्‍का                                            1425          1700          275
अरहर (तुअर)                                  5450          5675         225
उड़द                                              5400          5600        200
धान (सामान्‍य)                                 1550           1750        200
धान (ग्रेड ए)                                  1590           1770      180

 

दलहन की खेती को बढ़ावा देने के कई फायदे
दलहन की खेती को बढ़ावा दिये जाने के कई फायदे हैं. इससे न सिर्फ पोषण असुरक्षा से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से उर्वरता बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस तरह दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) में बढ़ोतरी से किसानों की प्रति एकड़ आय में वृद्धि सुनिश्‍चित होगी. इसके अलावा एमएसपी में वृद्धि से तिलहन के उत्‍पादन को भी बढ़ावा मिलेगा और उसके उत्‍पादन में निवेश को प्रोत्‍साहन मिलेगा. पोषक अनाजों के न्‍यूनतम मूल्‍य वृद्धि से पोषण सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार होगा.

किसानों के लिए सरकार की पहल
सरकार ने किसानों की बेहतरी के लिए कई प्रयास किये हैं. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी खरीफ फसलों के लिए कुल बीमित रकम का दो प्रतिशत, सभी रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और नकदी फसलों के लिए पांच प्रतिशत है. साथ ही मोबाइल फोन एवं रिमोट सेंसिंग जैसी स्‍मार्ट प्रौद्योगिकी के जरिये तत्‍काल आंकलन एवं दावों का जल्‍द निपटारा होता है. सरकार ने फसल बीमा के लिए एक मोबाइल ऐप भी जारी किया है, जो किसानों को उनके क्षेत्र में उपलब्‍ध बीमा कवर के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने में मदद करेगा. साथ ही वे इसके जरिये अधिसूचित फसलों के लिए बीमा प्रीमियम की गणना कर सकेंगे.

इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म विकसित करनी की योजना
सरकार ने किसानों को बेहतर मूल्‍य सुनिश्‍चित करने के क्रम में एक साझा ई-मार्केट प्‍लेटफॉर्म के साथ 585 विनियमित बाजारों को एकीकृत करने के उद्देश्‍य से राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत देशभर में इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्‍लेटफॉर्म विकसित करने के लिए एक योजना भी शुरू की है. सभी राज्‍यों को तीन प्रमुख सुधारों की शुरुआत करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जा रहा है. इसमें इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग की अनुमति, पूरे राज्‍य में एकल लाइसेंस की वैधता और बाजार में प्रवेश के लिए एकल शुल्‍क शामिल है. इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्‍य तलाशने में मदद मिलेगी.