yojana

  • Jan 17 2019 2:51PM

बालिकाओं की समृद्धि के लिए सरकारी योजनाएं

बालिकाओं की समृद्धि के लिए सरकारी योजनाएं

 बालिकाएं समृद्ध होंगीतो राज्य विकास के पथ पर अग्रसर होगाइसी के तहत बालिकाओं के विकास

केलिए राज्य सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैंऐसी कई योजनाएं हैंजिसका लाभ

उठा कर बालिकाएं बखूबी आगे बढ़ रही हैं.

 

1. मुख्यमंत्री सुकन्या योजना

महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देनेबालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बाल विवाह को पूरी तरह

से खत्म करने के उद्देश्य से राज्य में मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की शुरुआत हुई हैइस योजना के तहत

राज्य के 36 लाख 57 हजार 323 परिवार को इसका लाभ मिलेगाइस योजना के तहत बच्ची के जन्म

से लेकर 18 वर्ष तक बीच-बीच में डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि दी जायेगी

क्या मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत जन्म से दो साल तक की बालिका को पांच हजार रुपये की आर्थिक

सहायता राज्य सरकार देगीकक्षा एक में नामांकित होनेवाली बालिका को पांच हजार रुपये की आर्थिक

सहायता मिलेगीइसके अलावा पांचवीं कक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद पांच हजार रुपयेकक्षा 8वीं, 10वीं

एवं 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होने के बाद बालिका को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी. 18

से 20 वर्ष की वयस्क और अविवाहित होनेवाली युवतियों को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि

सरकार की ओर से दी जायेगी.


मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना का बदला स्वरूप

महिलाओं के सशक्तीकरण के उद्देश्य से 15 नवंबर 2011 को लागू की गयी मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली

योजना का समुचित लाभ समय पर नहीं मिलने के कारण इसका स्वरूप बदला गया हैइसी योजना के

बदले अब राज्य सरकार ने सुकन्या योजना लागू की हैइस योजना के माध्यम से महिला सशक्तीकरण,

बालिका शिक्षा पर जोर और बाल विवाह को खत्म करना ही मुख्य उद्देश्य है.


किसको मिलेगा इसका लाभ

मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस, 2011 (एसइसीसी डाटाके

तहत 27,46,106 परिवारों के अलावा 9,11,217 अंत्योदय कार्डधारी भी लाभुक हो सकेंगेपूर्व से चल

रही मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना में जिनको 30 हजार रुपये का राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र मिल

चुका हैउनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगामुख्यमंत्री लक्ष्मी लाडली योजना के शेष लाभान्वितों

को इसमें शामिल किया जायेगामुख्यमंत्री सुकन्या योजना में पांच-पांच हजार रुपये छह किस्तों में दिये

जायेंगेलड़की की उम्र 18 से 20 वर्ष होने पर उसे एकमुश्त 10 हजार रुपये दिये जायेंगे.


कैसे उठायें इसका लाभ

इस योजना के तहत जन्म से दो वर्ष तक की उम्र में उसकी मां के खाते में पांच हजार रुपये दिये जायेंगे.

योजना का लाभ लेने के लिए शून्य से दो वर्ष तक की उम्र की बालिका की माता का नाम एसइसीसी में

होना आवश्यक हैइसके अलावा बालिका का जन्म प्रमाण पत्रमाता का आधार प्रमाण पत्र और

माता का बैंक खाता आवश्यक हैकक्षा पांच से योजना का लाभ लेने के लिए बालिका के उत्तीर्णता

प्रमाण पत्रबालिका का बैंक खाता और आधार प्रमाण पत्र जरूरी होगा.


इनको नहीं मिलेगा लाभ

इस योजना का लाभ वैसे परिवारों को नहीं मिलेगाजिनके पास मोटर चालित दो पहियातीन पहिया या

चार पहिया वाले वाहन या कृषि उपकरण होमछली पकड़नेवाली नाव हो. 50 हजार या उससे मानक

सीमा के किसान क्रेडिट कार्डधारक होंसरकारी सेवक होंपरिवार का कोई भी सदस्य 10 हजाररुपये

या उससे अधिक कमाता हो.

यहां करें आवेदन
इस योजना का लाभ उठाने के लिए नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क कर सकते हैंविशेष जानकारी प्रखंड बाल विकास पदाधिकारी यानी सीडीपीओ कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं

2बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ योजना 
लिंगानुपात में समानता लानेबेटियों की सुरक्षा तथा कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के उद्देश्य से बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत हुईइस अभियान के तहत बालिका के जन्म को जश्न के रूप में मनाने के साथ-साथ उसे शिक्षा ग्रहण करने में सक्षम बनाने पर जोर देना हैलड़कियों का जन्म,पोषण और शिक्षा बिना किसी भेदभाव के हो और समान अधिकारों के साथ वो भी देश की सशक्त नागरिक बनेंइस अभियान का मुख्य उद्देश्य है. 2001 की जनगणना में देश में शून्य से छह वर्ष के बच्चों के लिंगानुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 927 थीजो 2011 की जनगणना में घटकर 918 लड़कियां हो गयावहीं झारखंड की बात करेंतो 2001 की जनगणना में बेटियों की संख्या प्रति हजार बालकों पर 927 थीजो 2011 की जनगणना में घट कर 914 हो गयी हैदूसरी ओरहरियाणा में लिंगानुपात में असमानता की दर सबसे अधिक है.

3. किशोरी शक्ति योजना ड्रॉप आउट किशोरियों को प्रोत्साहित करने के लिए 
गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करनेवाले परिवारों की अविवाहित तथा स्कूली शिक्षा छोड़ चुकीं किशोरियों में आत्मविश्वासउत्साह एवं आत्मगौरव की भावना बढ़ाने के उद्देश्य से किशोरी शक्ति योजना की शुरुआत हुईइन किशोरियों को स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों में छह माह तक शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यों में शामिल किया जाता हैकिशोरियों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से सेविकाएं अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर किशोरियों को शारीरिक विकास और गतिविधियों की जानकारी देती हैंइस योजना के तहत 6400 रुपये प्रतिवर्ष से भी कम आयवाले परिवारों की 11-15 वर्ष के आयु वर्ग की किशोरियों को इसमें शामिल किया गया हैइसके अलावा सभी आय स्तर के परिवारों की 11-18 वर्ष के आयु वर्ग की बालिकाओं को भी प्राथमिकता दी गयी है.

4साइकिल वितरण योजना छात्राओं को स्कूल जाना हुआ आसान
यह योजना ग्रामीण क्षेत्र की उन छात्राओं की शिक्षा को ध्यान में रख कर लागू की गयी हैजो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ने आती हैंइसके तहत अनुसूचित जातिजनजातिपिछड़े तथा अल्पसंख्यक वर्ग की छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल देना हैइस योजना का लाभ पाने के लिए छात्राओं को अपने प्रधानाचार्य की अनुशंसा द्वारा आवेदन पत्र जिला कल्याण पदाधिकारी को देना होता हैसिर्फ छात्राओं के लिए मुख्यमंत्री साइकिल योजना की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थीइसका लाभ उठाने के लिए लाभुक छात्र-छात्राओं का बैंक अकाउंट खोला गया और आधार कार्ड बनवाये गयेसाइकिल के लिए राशि मिलने के बाद से छात्राओं के लिए दूर-दराज के इलाके से स्कूल जाना काफी आसान हो गया है.

5स्कॉलरशिप योजना सरकारी स्कूलों की छात्राओं के लिए 
बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देनास्कूल ट्यूशन फीस में छूट देना व एकल लड़की को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन स्कॉलरशिप योजना की शुरुआत की गयी हैइस योजना का लाभ वैसे छात्राओं को मिलेगाजो अपने माता-पिता की एकमात्र संतान हैंइसके अलावा केवल सरकारी विद्यालयों में पढ़नेवाली लड़कियां इस योजना के लिए पात्र हैंवे लड़कियां जो अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 60 प्रतिशत या 6.2 सीजीपीए हासिल करेंगीछात्रा का स्कूल शुल्क प्रति महीने1500 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिएइस योजना का लाभ आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यम से आवेदन देकर उठा सकते हैंअगर आप आवेदन देना चाहते हैंतो आप इसके लिंकhttps://www.mygovernmentschemes.com/cbse-merit-scholarship-single-girl-child पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

6. सुकन्या समृद्धि योजना
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत हुई है. इसका उद्देश्य बेटियों की पढ़ाई और उनकी शादी पर आनेवाले खर्च को आसानी से पूरा करना है. इसके तहत बेटी की पढ़ाई व शादी के लिए बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि योजना का अकाउंट खुलवाया जा सकता है. अगर आपकी बच्ची की उम्र 10 साल से कम है, तो आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. सुकन्या समृद्धि अकाउंट में ब्याज भी अच्छा मिलता है. साथ ही ब्याज पर कोई टैक्स भी नहीं देना होता. यह योजना सरकार द्वारा शुरू की गयी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का हिस्सा है.

कैसे खुलेगा अकाउंट
अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है, तो आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. अगर आपकी दो बेटियां हैं, तब भी आप अपनी दोनों बेटियों के लिए खाता खुलवा सकते हैं. इसके अलावा अगर दूसरी और तीसरी बेटी जुड़वां होती हैं, तो आप तीनों बेटियों के लिए खाता खोल सकते हैं. अगर आपको पहली बार ही तीन बेटियां एक साथ होती हैं, तब भी आप तीनों बेटियों के लिए खाता खोल सकते हैं. एक बेटी के लिए एक ही एकाउंट खोल सकते हैं और अधिकतम दो बेटियों के लिए ही ऐसा खाता खोल सकते हैं. कुछ परिस्थितियों में ही आप तीन खाता खुलवा सकते हैं.

कहां खुलेगा अकाउंट
सुकन्या समृद्धि खाता पोस्ट ऑफिस या अधिकृत बैंक जैसे- एसबीआइ, पीएनबी, आइसीआइसीआइ आदि में खोल सकते हैं.

कितनी राशि होगी जमा
एक खाते में एक साल में कम से कम 250 रुपये और अधिकतम डेढ़ लाख रुपये जमा करा सकते हैं. 250 रुपये की प्रारंभिक जमा राशि से खाता खोला जा सकता है. बाद में 50 रुपये के गुणकों में जमा किया जा सकता है. इस राशि को आप कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन भी जमा करा सकते हैं. कुछ बैंक आपको ऑनलाइन निवेश का विकल्प भी देते हैं.

कब तक जमा करनी होगी राशि
खाता खोलने की तारीख से 15 वर्ष पूरे होने तक आप खाते में राशि जमा करा सकते हैं. इसे आप इस तरह समझें. अगर आपने 01 जनवरी 2019 को खाता खुलवाया है, तो आप 01 जनवरी 2034 तक खाते में राशि जमा करा सकते हैं. यहां ध्यान रखें कि आपको 16वें वर्ष से 21वें वर्ष तक ब्याज मिलता रहेगा. इसका मतलब यह हुआ कि आप 16 से 21 वर्ष तक पैसे जमा नहीं कर सकते, लेकिन शेष राशि पर इस अवधि के दौरान आपको ब्याज मिलता रहेगा.

खाता कब होगा परिपक्व
खाता खोलने की तारीख से 21 साल पूरा होने के बाद खाता परिपक्व हो जायेगा. यहां विशेष ध्यान रखें कि खाता परिपक्व होने का बालिका की उम्र का कोई संबंध नहीं है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने 01 जनवरी 2019 को खाता खुलवाया, तो आपका 01 जनवरी 2040 को खाता परिपक्व हो जायेगा.

आवश्यक दस्तावेज
इस योजना का लाभ पाने के लिए निम्न प्रमाण पत्रों की आवश्यकता है.
बेटी का जन्म प्रमाण पत्र,
माता/पिता/अभिभावक का पहचान प्रमाण (पैन कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, आधार कार्ड इत्यादि में से कोई एक)
माता/पिता/अभिभावक का निवास प्रमाण (पैन कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड, बिजली का बिल, टेलीफोन बिल आदि)
आवेदन के साथ उपरोक्त सभी दस्तावेज आप बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करा सकते हैं.

कब निकाल सकते हैं पैसे
खाता परिपक्व होने से पहले ही अगर आप पैसा निकालना चाहते हैं, तो कुछ विशेष परिस्थिति में आप पैसे निकाल सकते हैं. आप बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पिछले साल के अंत में खाते में जमा राशि का 50 फीसदी निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए बेटी की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए या उसने कम से कम दसवीं कक्षा पास कर ली हो. यहां ध्यान रखना होगा कि आप केवल उतना ही पैसा निकाल सकते हैं, जितना शिक्षा के लिए चाहिए. आप एडमिशन स्लिप, प्रवेश पत्र में लिखी फीस से ज्यादा पैसे नहीं निकाल सकते हैं.

7. तेजस्विनी योजना : इस योजना से मजबूत होंगी बेटियां
बालिकाओं को आर्थिक सशक्तीकरण प्रदान करने, अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से माध्यमिक स्तर की शिक्षा पूरा कराने के उद्देश्य से तेजस्विनी योजना की शुरुआत हुई. इसके तहत 16 से 24 वर्ष की बालिकाओं को रोजगार परक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर या रोजगार योग्य बनाने पर जोर दिया जाता है. इस योजना से राज्य की बालिकाओं के स्वावलंबन को एक नयी दिशा मिली है. इस योजना को व्यापक बनाने के लिए राज्य व केंद्र सरकार तथा विश्व बैंक के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है. इसके तहत राज्य सरकार 162 करोड़ रुपये खर्च करेगी, वहीं बैंक द्वारा 378 करोड़ रुपये का ऋण मुहैया कराया जा रहा है. इस तरह इस योजना की कुल लागत 540 करोड़ रुपये है.

17 जिलों में तेजस्विनी योजना
राज्य के 17 जिलों में इस योजना की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से की जा रही है.

चरण वित्तीय वर्ष जिला
1.
पहला चरण 2016-17 रामगढ़, दुमका, चतरा और खूंटी
2.
दूसरा चरण 2017-18 पलामू, देवघर, धनबाद, बोकारो और गोड्डा
3.
तीसरा चरण 2018-19 लातेहार, कोडरमा, जामताड़ा, लोहरदगा, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम और पाकुड़.

8. सखी वन स्टॉप सेंटर : पीड़िताओं की समस्याओं का समाधान
घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, छेड़खानी, रेस्क्यू, मानसिक, शारीरिक रूप से प्रताड़ित पीड़ितों को विधिक, चिकित्सकीय मदद व आश्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सखी वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गयी है. इसके तहत एक छत के नीचे ही महिलाओं की समस्याओं का निदान होता है. राज्य के सभी जिलों में वन स्टॉप सेंटर कार्यरत है. राजधानी रांची में इसका सेंटर रिनपास में है. मानव तस्करी, घरेलू हिंसा व हिंसा से पीड़ित बच्चियों व महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. न्याय के लिए उन्हें एफआइआर दर्ज करने और न्यायालय में केस लड़ने के लिए वकील करना पड़ता है. जानकारी के अभाव या अपराधियों के दबाव में चिकित्सा साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं. ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए बच्चियों व महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर वरदान साबित हो रहा है. इस केंद्र में हिंसा से पीड़ित बच्चियों व महिलाओं को चिकित्सा, पुलिस, कानूनी और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग समेत अन्य सहायता प्रदान की जाती है.

9. किशोरियों के लिए स्कीम (एसएफटी)
स्कूल छोड़ चुकी किशोरियों पर विशेष ध्यान सहित 11-18 वर्ष की आयुवाली किशोरियों का उनके स्वास्थ्य व पोषण के स्तर में सुधार करने व उनके कौशल का उन्नयन करके समग्र विकास करना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इसके तहत दो प्रकार की योजना कार्यरत है, इसमें पोषण घटक एवं गैर पोषण घटक है.
1.
पोषण घटक : इसके अंतर्गत 11-14 साल की उम्रवाली स्कूल न जानेवाली किशोरियों को तथा 14-18 वर्ष की उम्रवाली आंगनबाड़ी केंद्र जा रही सभी किशोरियों को घर ले जाओ राशन या गरम पका हुआ भोजन के रूप में पूरक पोषण दिया जाता है.

2. गैर पोषण घटक : इसके अंतर्गत 11-18 वर्ष की उम्रवाली स्कूल न जानेवाली किशोरियों को सेवाएं प्रदान की जाती हैं. इसके तहत आयरन एवं फोलिकयुक्त आहार, स्वास्थ्य जांच, रेफरल सेवाएं, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, परिवार कल्याण, कौशल शिक्षा पर परामर्श दिया जाता है. इसके अलावा 16-18 वर्ष की उम्रवाली किशोरियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है.