yojana

  • Feb 1 2019 6:52PM

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की हुई शुरुआत

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की हुई शुरुआत

पंचायतनामा डेस्क

बाल विवाह पर रोक, बच्चियों को सशक्त करने, उनमें आत्मविश्वास का संचार करने एवं उन्हें शिक्षित कर स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से राज्य में मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की शुरुआत हुई. राष्ट्रीय बालिका दिवस यानी 24 जनवरी को पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस योजना की शुरुआत की. इस योजना के तहत राज्य के 27 लाख से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिलेगा. इस योजना का लाभ सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना, 2011 की सूची में शामिल परिवार एवं अंत्योदय कार्डधारकों को मिलेगा. इस योजना का लक्ष्य बच्चियों का संपूर्ण सशक्तीकरण करना है. इसके तहत सात किस्तों में 40 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सात लाभुकों को सांकेतिक तौर पर प्रमाण पत्र सौंपा

जन्म से 18 वर्ष की उम्र तक बेटियों को मिलेगी राशि
मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत जन्म लेनेवाली बच्ची की मां के बैंक खाते में पांच हजार रुपये जमा कर दिये जायेंगे. इसके अलावा पहली कक्षा में दाखिले पर पांच हजार रुपये, पांचवीं, आठवीं, 10वीं और 12वीं पास करने पर पांच-पांच हजार रुपये सरकार द्वारा बैंक खाते में जमा किया जायेगा. वहीं, जब बेटी की आयु 18 साल की होगी, तो 10 हजार रुपये दिये जायेंगे. इस तरह जन्म से लेकर 20 वर्ष तक आयु तक सात किस्तों में 40 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जायेगी.

बेटी की शादी के लिए भी मिलेगी राशि
इस योजना के तहत जन्म से लेकर पढ़ाई और शादी के लिए भी राशि सरकार की ओर से दी जायेगी. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत लड़की की शादी के लिए अलग से 30 हजार रुपये दिये जायेंगे.

कहां से मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक लाभुक के परिजन अपने निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र के अलावा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं.

बेटियां हमारा गौरव व अभिमान हैं : रघुवर दास
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सुकन्या योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि शिक्षा बदलाव व विकास की संजीवनी है. मुख्यमंत्री सुकन्या योजना का मूल उद्देश्य है उज्ज्वल काल के लिए बालिकाओं का सशक्तीकरण. राज्य की बच्चियां शिक्षित होंगी, तो परिवार में संस्कार का संचार होगा. आज लड़कियां किसी से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं. बेटी हमारा गौरव है. बेटी हमारा अभिमान है. इस सोच के साथ सभी अभिभावकों को कार्य करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अगर कम उम्र में शादी के लिए कोई दबाव बनाये, तो 181 पर सूचना दे सकते हैं.