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  • Sep 18 2019 6:38PM

सुरक्षित बचपन से होगा उज्ज्वल भविष्य

सुरक्षित बचपन से होगा उज्ज्वल भविष्य

प्रिया कुमारी 

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः यानी बेटियों व महिलाओं की जहां पूजा होती है, वहां देवताओं का निवास होता है. झारखंड सरकार इस मंत्र को आत्मसात कर राज्य की आधी आबादी को सबल, सक्षम और नयी पहचान दिलाने को लेकर संकल्पित है. यही कारण है कि पिछले साढ़े चार सालों से बेटियों व बहनों के चेहरे पर मुस्कुराहट आयी है. मुख्यमंत्री सुकन्या योजना सुरक्षित बचपन से सुरक्षित भविष्य तक की राह दिखा रही है. पढ़ाई से लेकर विदाई तक का सुखद मार्ग तैयार कर रघुवर सरकार मातृशक्ति को नया जीवन देने में जुटी हुई है

मुख्यमंत्री सुकन्या योजना की शुरुआत
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 24 जनवरी 2019 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन चाईबासा से मुख्यमंत्री सुकन्या योजना का शुभारंभ किया था. टाटा कॉलेज मैदान में राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री सुकन्या योजना का मूल उद्देश्य उज्ज्वल कल के लिए बालिकाओं का सशक्तीकरण करना है. नारी शक्ति किसी भी राज्य व समाज में अहम स्थान रखती है. झारखंड की नारियां हमारे राज्य की शक्ति हैं. वर्तमान सरकार के कार्यकाल और राज्य के विकास में नारी शक्ति के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. झारखंड की बच्चियां शिक्षित होंगी, तो परिवार में संस्कार का संचार होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लड़कियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं. हर जगह उनकी बराबर की भूमिका दिख रही है. खेल के क्षेत्र में सबसे ज्यादा मेडल लाने का कार्य लड़कियों ने किया है. बेटियां गौरव हैं. अभिमान हैं. इस सोच के साथ हर अभिभावक कार्य करें. बेटा और बेटी में विभेद न किया जाये. सुकन्या योजना के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने कोल्हान प्रमंडल में 6,661 व चाईबासा के 4,238 लाभुकों को मुख्यमंत्री सुकन्या योजना से आच्छादित किया था. सात लाभुकों को सांकेतिक तौर पर प्रमाण पत्र सौंपा गया था.

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87 हजार से अधिक आवेदन
मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत पूरे राज्य से 87 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. केवल कोल्हान प्रमंडल में कुल 15 हजार 61 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 6700 स्वीकृत हुए. लगभग पांच हजार लाभुकों का चयन हुआ और उनके बीच 2.50 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया. इस योजना के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने 300 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र का शिलान्यास व 25 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन भी किया था.

शिक्षा से स्वावलंबन तक
मुख्यमंत्री सुकन्या योजना लागू हुए सात माह हो चुके हैं. राज्य सरकार योजना में हर नागरिक से भागीदारी निभाने और जन-जन तक इसे संप्रेषित करने की अपील करती रही है. मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य बच्चियों को सशक्त करना, उनमें आत्मविश्वास का संचार करना, बाल विवाह रोकना और उन्हें शिक्षित कर स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना है. इस योजना के तहत जन्म लेनेवाली बच्ची की मां के बैंक खाते में पांच हजार रुपये जमा कर दिये जाते हैं. इसके अलावा बच्ची के पहली कक्षा में नामांकन के समय पांच हजार, 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में पांच-पांच हजार सरकार द्वारा बैंक खाते में जमा किया जायेगा. जब बिटिया 18 साल की होगी, तो 10 हजार रुपये दिये जायेंगे. इस तरह जन्म से लेकर 20 वर्ष आयु तक उन्हें सात किस्तों में 40 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जायेगी. अगर बिटिया शादी करना चाहे, तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 30 हजार रुपये मिलेंगे. जब योजना शुरू की गयी थी, तब इसका लाभ राज्य के 27 लाख से अधिक परिवारों को दिये जाने का लक्ष्य रखा गया था. 2019 के अगस्त महीने में कैबिनेट की हुई मीटिंग में राज्य के सभी 57 लाख राशन कार्डधारियों को मुख्यमंत्री सुकन्या योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का लाभ दिये जाने का निर्णय लिया गया है. मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा था कि सरकार शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के लिए स्कूल संचालित कर रही है. हर विषय के शिक्षक स्कूल में रहें यह सुनिश्चित किया जा रहा है.

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विद्यादान के बाद ही कन्यादान
मुख्यमंत्री रघुवर दास मानते हैं कि कन्यादान पुण्य का कार्य है. इससे पहले यह जरूरी है कि बेटे-बेटी के जन्म में भेदभाव की मानसिकता को हतोत्साहित किया जाये. इनमें किसी तरह का अंतर न किया जाये. बेटियों को जन्म लेने के बाद पढ़ने-लिखने का उचित अवसर दिया जाये. विद्यादान के बाद ही सही समय पर उनका कन्यादान हो. बिना विद्यादान के कन्यादान का कोई मतलब नहीं. सरकार परिवार में जन्म लेनेवाली बच्ची को डीबीटी के माध्यम से 18 साल तक आर्थिक सहायता दे रही है. यह सब लड़कियों को सुरक्षित बचपन देने के अलावा उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना भी है.

नाबालिग की शादी अपराध, 181 की लें मदद
भ्रूण हत्या पाप है. राज्य के लिंगानुपात को बेहतर करना है. आदिवासी समाज में बेटा और बेटी में भेद आमतौर पर नहीं देखा जाता, हालांकि पढ़े-लिखे लोगों में यह ज्यादा देखने को मिलता है. राज्य सरकार चिकित्सकों से लगातार अपील कर रही है कि वे अल्ट्रासाउंड के माध्यम से भ्रूण की जांच कर बेटा या बेटी होने की जानकारी किसी को न दें. इसके लिए कानूनी तौर पर वे दोषी ठहरा कर जेल भेजे जा सकते हैं. राज्य सरकार की ओर से नाबालिग बच्चियों की शादी रोकने या इसकी खबर देने संबंधी एक नंबर जारी किया है. पीड़ित, पीड़ित का परिवार या कोई अन्य इस संबंध में 181 पर जानकारी दे सकता है.

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कैसे मिलेगा लाभ
योजना का लाभ लेने के लिए नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी या जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.

इसमें कोई शक नहीं कि महिला सशक्तीकरण की कई नयी कहानियां पिछले साढ़े चार साल में राज्य में शुरू हुई है. मुख्यमंत्री ने बालिकाओं व महिलाओं की आंखों में उम्मीदों की रोशनी भर दी है. बेहतर कल के लिए उनके द्वारा देखे गये सपनों को पूरा करने में रघुवर सरकार प्रयासरत है.