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  • Feb 1 2019 3:06PM

बाल विवाह मुक्त राज्य के लिए कार्ययोजना तैयार, तय हुई जिम्मेदारी

बाल विवाह मुक्त राज्य के लिए कार्ययोजना तैयार, तय हुई जिम्मेदारी

पंचायतनामा डेस्क

बाल विवाह पर रोक लगाकर झारखंड को बाल विवाह मुक्त प्रदेश बनाने को लेकर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा समेत कई विभागों को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है. इसके लिए एक वर्ष (अल्प काल), दो-तीन वर्ष (मध्यम काल) एवं चार-पांच वर्ष (दीर्घ काल) की कार्ययोजना तैयार की गयी है. समन्वय बनाकर ये विभाग धरातल पर कार्य करें, तो एक भी मासूम बिटिया बाल विवाह की भेंट नहीं चढ़ेगी

1. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग
बाल विवाह की रोकथाम के लिए नुक्कड़ नाटक, मेला, सम्मेलन, शिकायत तंत्र, कानून, बालिकाओं के महत्व को लेकर जागरूकता अभियान चलाना. किशोरी हेल्पलाइन को मजबूत करना. पुलिस, न्यायिक अधिकारी(प्रथम श्रेणी), उपायुक्त, बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, समेकित बाल संरक्षण कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम एवं पीएलवी समेत अन्य को प्रशिक्षण को लेकर प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास करना.

2. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग
बाल संरक्षण एवं पोक्सो से संबंधित विषयों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना, मास्टर ट्रेनर तैयार करना, विद्यालय प्रबंधन समिति, माता-पिता-शिक्षक संघ, गुरु गोष्ठी एवं बाल संसद को बाल विवाह समेत बाल संरक्षण के मुद्दे को लेकर सशक्त बनाना, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास एवं कैरियर काउंसेलिंग कर मार्गदर्शन देना.

3. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
प्रशिक्षण मॉडल विकसित कर एएनएम, सहिया, सहिया साथी एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रशिक्षित करना. राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बाल विवाह रोकने के लिए किशोर या किशोरी मंच को मजबूत करना.

4. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग
केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, सर्ड एवं जेएसएलपीएस के प्रशिक्षण कैलेंडर में बाल विवाह को केंद्रित करते हुए बाल संरक्षण विषय को शामिल करना. जिलास्तरीय प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करना, ताकि पीआरआइ सदस्य, जिला, प्रखंड एवं गांव स्तर पर बाल संरक्षण समिति के अध्यक्षों व सह अध्यक्षों को प्रशिक्षण दे सकें. मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना के लिए चुनी गयी पंचायतों के मानदंडों में बाल विवाह मुक्त पंचायत का मानदंड भी शामिल किया जाये.

5. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग
नियमित रूप से किशोर व किशोरियों के लिए योजनाएं एवं बाल विवाह के नुकसान को लेकर जागरूकता पैदा करना. बाल विवाह से ज्यादा प्रभावित गांव-पंचायत में बाल विवाह की रोकथाम के लिए स्ट्रीट प्ले का आयोजन करना.

6. कानून विभाग (झालसा एवं ज्यूडिशियल एकेडमी)
बाल विवाह पर आधारित साक्षरता कैंप का आयोजन विद्यालयों, कॉलेजों, पंचायतों एवं प्रखंड स्तर पर नियमित रूप से करना. ज्यूडिशियल एकेडमी में संचालित किये जा रहे प्रशिक्षणों में बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के लिए बाल विवाह पर आधारित मॉड्यूल को शामिल करना.

7. कर्मचारी, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विकास विभाग
बाल विवाह निषेध पदाधिकारी (प्रखंड विकास पदाधिकारी) को विशेष रूप से बाल संरक्षण एवं बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रशिक्षण देना. एटीआइ में संचालित प्रशिक्षण सत्रों में बाल संरक्षण एवं बाल विवाह रोकथाम पर आधारित सत्र को शामिल करना.

8. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग
सभी पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में पुलिस को दिये जाने वाले प्रशिक्षणों में बाल संरक्षण के साथ-साथ बाल विवाह से संबंधित मॉड्यूल को शामिल करना. विशेष किशोर पुलिस इकाई को मजबूत करना, ताकि बाल विवाह समेत बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों को गंभीरता से जांच पड़ताल के साथ देखा जा सके.

9. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
बाल विवाह पर रोक को लेकर पंचायत स्तर पर विवाहों का रजिस्ट्रेशन कराना.

बाल विवाह उन्मूलन को लेकर कार्ययोजना तैयार की गयी है. इसके तहत पहले चरण में सर्वाधिक प्रभावित पांच जिलों में कार्य किया जायेगा. इनमें गिरिडीह, गढ़वा, देवघर, चतरा एवं गोड्डा शामिल हैं.

गिरिडीह जिले में यूनिसेफ द्वारा चलाये गये कार्यक्रम के तहत पीयर एजुकेटर, जनप्रतिनिधि व आम जनता के सामूहिक प्रयास से वर्ष 2014 से अब तक 1165 नाबालिगों की शादी रोकी गयी है