ssakshtkaar

  • Jul 17 2019 3:41PM

ग्रामीण विकास के लिए समर्पित सखी मंडल की महिलाएं

ग्रामीण विकास के लिए समर्पित सखी मंडल की महिलाएं

जेएसएलपीएस के सीइओ राजीव कुमार से बातचीत

सखी मंडल की महिलाएं झारखंड की तस्वीर बदल रही हैं. गांवों के विकास को प्रतिबद्ध दीदियां सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतार रही हैं. एक वक्त था, जब वो चूल्हा-चौका तक सीमित रहती थीं. आज सखी मंडल की ताकत से वह बदलाव की वाहक बन गयी हैं. जेएसएलपीएस के सीइओ राजीव कुमार से पंचायतनामा टीम ने बातचीत की. पेश है मुख्य अंश.

सवाल : झारखंड की तस्वीर बदलने में सखी मंडल किस तरह की भूमिका निभा रही है.
जवाब : सखी मंडल आज झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बदलाव की धुरी है. सखी मंडल के जरिये गरीबी उन्मूलन की एक नयी इबारत लिखी जा रही है. ग्रामीण महिलाएं आज आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल से जुड़कर खुद को तो गरीबी से बाहर निकाल ही रही हैं, वहीं दूसरों को भी गरीबी से बाहर निकालने में मदद कर रही हैं. आज लाखों महिलाएं ऐसी हैं, जो सखी मंडल से जुड़ कर खुद को मजबूत बनायी हैं. सखी मंडल की महिलाएं आज ग्राम विकास के लिए समर्पित हैं. गांव में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर सुविधाओं को पहुंचाने तक में ये महिलाएं अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं. पूरे राज्य में करीब 2 लाख 3 हजार 589 महिला समूह है. करीब 26 लाख महिलाएं आज इन संगठनों से जुड़कर अलग-अलग रोल में झारखंड की तस्वीर बदल रही हैं.

सवाल : सखी मंडल से गांव की महिलाओं की जिंदगी में बदलाव को किस रूप में देखते हैं.
जवाब : गांव की महिलाएं आज पुरुषों के साथ कदमताल कर रही हैं. ग्रामीण महिलाएं आज सखी मंडल से जुड़ कर न सिर्फ अपने परिवार के आजीविका के साधनों को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि आज वो अपनी अलग पहचान बना रही हैं. सखी मंडल ने ग्रामीण महिलाओं को एक खास पहचान दी है. झारखंड में लाखों महिलाएं पशु सखी, कृषक मित्र, बैंक सखी, बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी, सीआरपी एवं वनोपज मित्र के रूप में कार्य कर अपनी आय तो सुनिश्चित कर ही रही हैं, गांव में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं भी पहुंचा रही हैं.

सवाल : जेएसएलपीएस, सखी मंडल और ग्रामीण महिलाओं के बीच बेहतर समन्वय से कैसे पूरी व्यवस्था बदली जा रही है.
जवाब : ग्रामीण विकास विभाग के तहत जेएसएलपीएस को राज्य में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसके अंतर्गत राज्य में सखी मंडल एवं इसके ऊपर स्तर की संस्थाएं जैसे- ग्राम संगठन, सीएलएफ आदि का गठन किया जा रहा है. ग्रामीण महिलाओं को सखी मंडल में जोड़ने के लिए सीआरपी ड्राइव चलाया जाता है. इस ड्राइव में सखी मंडल की ही अनुभवी महिलाओं को मौका दिया जाता है. सखी मंडल का बैंक खाता खुलवाना, चक्रीय निधि की राशि दिलाने से लेकर उनकी बैठक का सही तरीके से संचालन हो, इन सब में हमारे कर्मियों की विशेष भूमिका है.

सवाल : ग्रामीण महिलाएं सखी मंडल से जुड़ कर किस तरह आत्मनिर्भर बन रही हैं.
जवाब : ग्रामीण महिलाएं सखी मंडल से जुड़ कर खेती-बारी को बढ़ावा दे रही हैं. उन्नत खेती के तरीकों से अधिक पैदावार कर रही हैं. इससे उनकी आय बढ़ी है. महिलाएं सखी मंडल एवं एसवीइपी के तहत लोन लेकर छोटे व्यवसाय भी शुरू कर रही हैं. गांवों के सफल स्टार्टअप की मालकिन अब अधिकतर ग्रामीण महिलाएं ही हैं. आजीविका दीदी कैफे, फास्ट फूड कॉर्नर, सिलाई सेंटर, ब्यूटी प़ार्लर, राशन दुकान, पंचमार्ट की दुकान जैसे अलग-अलग उद्यम को अपनाकर महिलाएं आज सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं. यही नहीं, करीब 40 हजार से अधिक महिलाएं आजीविका मिशन में ही विभिन्न कैडर के रूप में काम कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: पर्यावरणविद् डॉ नीतीश प्रियदर्शी ने कहा,अर्बन डेजर्ट की तरफ बढ़ रहे हैं हम

सवाल : गांव-पंचायत के विकास में सखी मंडल की दीदियों की सहभागिता पर आपकी क्या राय है.
जवाब : सखी मंडल की ऊपरी संस्था की महिलाओं ने पंचायतों के साथ भागीदारी के जरिये पूरे राज्य में करीब चार लाख शौचालयों का निर्माण किया. ये सहभागिता का अनूठा उदाहरण है. आज ग्राम सभाओं में सखी मंडल की वजह से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हुई है. ग्राम सभा में महिलाएं अपने मुद्दों को पूरी निर्भिकता से उठा रही हैं और ग्राम विकास में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं.

सवाल : गांव-जवार की सामान्य महिलाओं को सखी मंडल किस तरह समृद्ध बनाती है.
जवाब : कल तक जो महिलाएं अपनी बात खुलकर नहीं रख पाती थीं. जिनकी अपनी कोई पहचान नहीं थी. आज सखी मंडल से जुड़ने के बाद उनका अात्मविश्वास बढ़ा है. वो हर हफ्ते बचत करती हैं. अपने परिवार के भरण पोषण एवं आजीविका को मजबूत करने के लिए सखी मंडल से लोन लेती और चुकाती भी हैं. देश की बैंकिंग व्यवस्था में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो रही है. आज बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं खुद एवं अपने पति का बीमा करा रही हैं.

सवाल : दीदियों को किस-किस तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है.
जवाब : सखी मंडल से जुड़ कर आज ग्रामीण महिलाएं उन्नत खेती, पशुपालन, पारा वेटनरी, बैंकिंग सखी, वित्तीय साक्षरता, सामुदायिक पत्रकारिता, वनोपज प्रसंस्करण, वनोपज उत्पादन जैसे लाह, तसर, इमली आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. जोहार में उत्पादक समूह के जरिये उनको एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया से प्रमाणित भी किया जा रहा है. दीनदयाल उपाध्याय- ग्रामीण कौशल्य योजना के जरिये गरीब परिवारों से संबद्ध स्कूल एवं कॉलेज के ड्रॉप आउट ग्रामीण युवक-युवतियों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ कर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है.

सवाल : ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं सखी मंडल से किस तरह जुड़ सकती हैं.
जवाब : दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के दिशा-निर्देशों के तहत हम गांव में सीआरपी ड्राइव चलाते हैं. उस दौरान महिलाएं सखी मंडल से जुड़ती हैं. अगर कोई महिला अभी तक नहीं जुड़ सकी हैं, तो वो अपने नजदीकी आजीविका ग्राम संगठन और जेएसएलपीएस के प्रखंड कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकती हैं.

यह भी पढ़ें: अवाम की सुरक्षा है पहली प्राथमिकता

सवाल : सखी मंडल के सफर को किस रूप में देखते हैं.
जवाब : सखी मंडल के सफर को हम बदलाव की वाहक के रूप में देखते हैं. ग्रामीण परिवेश में सुविधाओं व सेवाओं से वंचित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने में सखी मंडल ने शानदार काम किया है. झारखंड के सुदूर गांवों में जाकर आप महिला सशक्तीकरण को महसूस कर सकते हैं. आज सखी मंडल की महिलाएं ग्रामीण झारखंड के आर्थिक विकास की धुरी बन चुकी हैं. हजारों की तादाद में सखी मंडल की महिलाएं आज गांव में सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए कार्य कर रही हैं.

सवाल : सखी मंडल के संदर्भ में आगामी योजना क्या है.
जवाब : सरकार इन महिलाओं के जरिये विकास की गति को रफ्तार दे रही है. सखी मंडल की बहनों के जरिये ही गांव की सूरत बदलने के लिए जोहार परियाजना की शुरुआत की गयी है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को उत्पादक समूह में जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है. सरकारी योजनाओं के लाभुकों के चयन समेत सुदूरवर्ती इलाकों तक सरकारी सुविधाओं के विस्तार में भी सखी मंडल की महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. विभिन्न उद्यमों से जोड़ने के लिए और वनोपजों के जरिये अधिक कमाई हो, इसकी व्यवस्था भी सरकार कर रही है. वर्तमान में टेक होम राशन जैसी पहल से भी सखी मंडलों को जोड़ा जा रहा है. बहुत जल्द ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल संग्रहण का काम भी सखी मंडल की बहनें बिजली सखी के रूप में करेंगी. मिट्टी के डाॅक्टर और उज्ज्वला दीदी के रूप में सखी मंडल की बहनें काम करेंगी. अति पिछड़े परिवारों की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिलवायेंगी. कृषि विभाग की बकरी, मुर्गी, बतख पालन समेत मिनी डेयरी योजना के लाभुकों का चयन भी सखी मंडल के जरिये होगा. सखी मंडल के जरिये न्यू झारखंड का निर्माण करना है. सरकार सखी मंडल की महिलाओं के लिए रोजगार, कमाई एवं विकास के हर द्वार खोल रही है.