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  • Jun 29 2019 11:21AM

धान के साथ करें सब्जी सोयाबीन की खेती

धान के साथ करें सब्जी सोयाबीन की खेती

पंचायतनामा टीम

मॉनसून खेती-बारी के लिए सबसे बेहतरीन समय होता है. इस मौसम का सबसे बड़ा फायदा होता है कि किसान उन जमीनों पर भी खेती कर सकते हैं, जहां दूसरे मौसम में पानी की कमी के कारण जमीन खाली रह जाती है. इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलता है. किसान खाली पड़ी जमीन पर बारिश के मौसम में दलहन किस्म की खेती कर सकते हैं, क्योंकि दलहन की खेती के लिए पानी की आवश्यकता कम पड़ती है. साथ ही जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा भी बढ़ती है. इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है. टांड़ जमीन में किसान सब्जियों की खेती कर सकते हैं. ऑफ सीजन में सब्जी की खेती में ज्यादा मुनाफा होता है. बारिश के आंकलन को देखते हुए दूसरी सब्जियां भी लगा सकते हैं. पहले किसान पारंपरिक सब्जियां लगाते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे सब्जी सोयाबीन या स्वर्ण वसुंधरा की खेती कर रहे हैं. यह कई मायनों में लाभदायक है. आइसीएआर प्लांडू, रांची के प्रमुख सब्जी वैज्ञानिक डॉ आरएस पान कहते हैं कि बारिश के मौसम में किसान धान की खेती के साथ सब्जी की खेती करें, तो उनकी कमाई बढ़ सकती है

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सोयाबीन की उन्नत प्रजाति है स्वर्ण वसुंधरा
स्वर्ण वसुंधरा या सब्जी सोयाबीन आइसीएआर प्लांडू, रांची के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गयी सोयाबीन की उन्नत प्रजाति है. वर्षा आधारित दलहन किस्म की यह सोयाबीन झारखंड के मौसम और मिट्टी के लिए बहुत उपयुक्त है. कृषि वैज्ञानिक डॉ आरएस पान बताते हैं कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और हैदराबाद में सब्जी सोयाबीन की खेती की गयी, लेकिन सबसे बेहतर परिणाम झारखंड में ही आये हैं. फिलहाल हरियाणा, खड़गपुर और महाराष्ट्र के किसान सब्जी सोयाबीन के बीज की खूब मांग करते हैं. झारखंड में पिछले कई वर्षों से खूंटी के मुरहू, दलकीडीह, तोरपा, कर्रा , ओरमांझी के रूक्का, हुटूप और बुंडू प्रखंड में सब्जी सोयाबीन की खेती की जा रही है.

मटर की तुलना में अधिक पौष्टिक
सब्जी सोयाबीन को हरे मटर की तरह कच्चा और सब्जी बनाकर भी खाया जा सकता है. यह सोयाबीन मटर की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होता है. इसमें पाये जानेवाले तत्व कैंसर जैसे रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं. इसके अलावा इसमें लाभकारी प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन भी पाये जाते हैं. कुल मिलाकर कहें, तो सब्जी सोयाबीन किसानों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इसके दाम अच्छे मिलते हैं. इसकी खेती से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है. इसे खानेवालों का स्वास्थ्य बेहतर होता है. सब्जी सोयाबीन से सोया दूध, सोया दही, सोया सत्तू और सोया पनीर भी बनाया जाता है.

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कैसे करें इसकी खेती
स्वर्ण वसुंधरा की खेती करने के लिए ऊपरी जमीन का इस्तेमाल करें. साथ ही पानी की निकासी के लिए अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. जैविक खाद का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. अगर मिट्टी ज्यादा अम्लीय हो, तो बुआई से एक महीना पहले कृषि कार्य में इस्तेमाल किया जानेवाला चूना 25 किलो प्रति हेक्टेयर मिलाना चाहिए. खेत की तैयारी के लिए खेत को तीन से चार बार जुताई करनी चाहिए. सब्जी सोयाबीन वर्षा आधारित फसल है, इसलिए इसकी बुआई 15 जून से 15 जुलाई तक करनी चाहिए. फसल की बुआई मेड़ में लाइन से करनी चाहिए.

रोग और कीट नियंत्रण
सब्जी सोयाबीन या स्वर्ण वसुंधरा में रोग और कीट का प्रकोप ज्यादा नहीं होता है. इस पौधे में अमूमन मौजेक नामक बीमारी लगती है, जिसमें पौधे के पत्ते सिकुड़ जाते हैं तथा उन पर पीले धब्बे बन जाते हैं. इस रोग के निवारण के लिए रोगोर दवा को एक मिली प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करने से रोग वाहक कीट पर नियंत्रण हो जाता है और बीमारी का प्रसार कम हो जाता है.

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कम खर्च में अधिक मुनाफा : डॉ रविशंकर पान
स्वर्ण वसुंधरा की खेती झारखंड के किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक है. झारखंड की मिट्टी और मौसम सब्जी सोयाबीन के लिए परफेक्ट है. यहां सिंचाई की समस्या है, जबकि यह फसल वर्षा आधारित है. राज्य में कुपोषण की समस्या है. ऐसे में यह सब्जी सोयाबीन अगर यहां के किसान उगाते हैं और घर में इस्तेमाल करते हैं, तो कुपोषण संबंधी समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है. इसके अलावा सोयाबीन की और भी कई किस्में हैं, जिसे किसान अपने खेत में लगा सकते हैं. कम खर्च में यह अधिक मुनाफा देता है.