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  • Mar 4 2019 3:33PM

अवाम की सुरक्षा है पहली प्राथमिकता

अवाम की सुरक्षा है पहली प्राथमिकता

पंचायतनामा डेस्क

पुलिस की वर्दी देखने में काफी अच्छी लगती है, लेकिन इसे पहनना काफी जिम्मेदारी भरा काम है. इसे पहनने के बाद आपके कंधे पर आ जाता है आम जनता की सुरक्षा का जिम्मा. कानून व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी. इसे बहुत ही ईमानदारी से निभाना पड़ता है. यह कहना है रांची की सिटी एसपी सुजाता कुमारी वीणापाणि का. राजधानी रांची की सुरक्षा की कमान संभालनेवाली और अपना काम बखूबी निभाने वाली सुजाता कुमारी का जन्म सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में हुआ था. बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहनेवाली सुजाता ने अपने दूसरे प्रयास में ही संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कीं. 2014 बैच की आइपीएस अफसर सुजाता ने यूपीएससी की परीक्षा में 214वां रैंक प्राप्त किया.

परिवार से मिली प्रेरणा
सुजाता कुमारी के माता-पिता और बड़े भाई सभी सरकारी नौकरी में हैं. पिता लाल मोहन महतो राज्य प्रशासनिक सेवा में थे, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं. माता उमा महतो हजारीबाग में डीआरडीए निदेशक हैं. इस वजह से घर में बचपन से ही सरकारी नौकरी का माहौल रहा. इसके कारण शुरू से ही सरकारी नौकरी के प्रति लगाव रहा.

अच्छा पैकेज छोड़ शुरू की सिविल सर्विसेज की तैयारी
सुजाता कुमारी की प्रारंभिक शिक्षा रांची में हुई. दसवीं तक की पढ़ाई रांची के बिशप वेस्टकॉट गर्ल्स स्कूल में हुई. 12वीं की पढ़ाई उन्होंने राजेंद्र विद्यालय, जमशेदपुर से पूरी की. इसके बाद बीआइटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस और आइआइएम रोहतक से एमबीए की डिग्री हासिल की. सुजाता बतातीं हैं कि एमबीए की पढ़ाई के दौरान ही वह पहली बार बिना तैयारी के यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुईं, लेकिन सफल नहीं हो पायीं. मैनेजमेंट की पढ़ाई से उनके अंदर आत्मविश्वास आया. एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु में नौकरी शुरू की. अच्छी सैलरी मिलती थी. छह महीने नौकरी करने के बाद सुजाता कुमारी ने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली चली गयीं. नौकरी छोड़ सिविल सर्विसेज की तैयारी करने के सवाल पर सुजाता कुमारी कहती हैं कि प्राइवेट नौकरी में पैसे तो अच्छे मिल रहे थे, लेकिन सरकारी नौकरी में भविष्य सुरक्षित रहता है. यह सोच कर ही चांस लिया कि अगर सफल हो जाऊंगी, तो ठीक है, नहीं तो एमबीए की डिग्री काम आ ही जायेगी.

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हर फैसले पर माता-पिता का सहयोग मिला
सुजाता को शुरू से ही अपने फैसले लेने की आजादी घर में मिली हुई थी. हर फैसले चाहे वो पढ़ाई में विषय चुनना हो या नौकरी के क्षेत्र का चुनाव. हर मामले में माता-पिता का हमेशा साथ रहा. घर में कभी भी यह दबाव नहीं था कि सरकारी नौकरी ही करनी है या डॉक्टर बनना है या इंजीनियर बनना है. इसलिए हमेशा खुद फैसले लेकर आगे बढ़ीं.

सफलता के लिए मेहनत-किस्मत दोनों जरूरी : सुजाता कुमारी वीणापाणि
रांची की सिटी एसपी सुजाता कुमारी वीणापाणि कहती हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. सफल होने के लिए मेहनत करनी जरूरी है. महिलाओं को संदेश देते हुए कहती हैं कि हमेशा आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करें. महिलाएं पुरुषों से किसी भी चीज में कम नहीं हैं. बच्चियां शुरू से मेहनत करें और लक्ष्य निर्धारित करें. मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटें. सफलता अवश्य मिलेगी. महिलाओं की सुरक्षा पर कहती हैं कि अगर आपके साथ किसी प्रकार की कोई अापराधिक घटना घटती है, तो उसे पुलिस को जरूर बतायें. अगर कुछ गलत हो रहा है, तो उसे सामने लाने का प्रयास जरूर करें. पुलिस हर वक्त आपके साथ है.