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  • Oct 3 2019 6:39PM

राष्ट्रीय बाजार से उद्योग और उद्यमियों में समृद्धि : अजय कुमार सिंह

राष्ट्रीय बाजार से उद्योग और उद्यमियों में समृद्धि : अजय कुमार सिंह

झारखंड के कारीगरों, हस्तकरघा चलाने वाले बुनकरों और शिल्पकारों में कौशल की कमी नहीं है. हर गांव में विशेष कारीगर मिल जायेेंगे, जो अपने कार्य में माहिर हैं, लेकिन उन्हें उचित मंच व बाजार नहीं मिल पाता. इस कारण उन्हें अपने उत्पाद औने-पौने दाम में बेचने पड़ते हैंमुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के सीइओ अजय कुमार सिंह ने बताया कि इसी समस्या को ध्यान में रख कर वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन किया गया. उद्योग और उद्यमिता का विकास करना बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य है. इसके लिए सभी जिलों में जिला उद्यमी समन्वयक और सभी 263 प्रखंडों में प्रखंड उद्यमी समन्वयक नियुक्त किये गये हैं.

कारीगरों का चयन
पहले चरण के सर्वेक्षण में कुटीर उद्योग को आगे बढ़ाने में मददगार मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड ने उन कारीगरों व कलाकारों का चयन किया, जो सक्रिय रूप से अपने क्षेत्र में कार्य कर रहे थे. पूरे राज्य में ऐसे 90 हजार कारीगरों का चयन किया गया है. इसके बाद एक गांव में एक ही प्रकार के कार्य करनेवाले सभी ग्रामीणों के समूह का गठन किया गया. लघु वनोत्पज के तहत आंवला, बहेरा, हर्रे के लिए समूह बनाये गये.

आर्टिजन कार्ड से मिलेगी पहचान
जिन 90 हजार कारीगरों का चयन सर्वेक्षण में किया गया है, उनमें से 60 हजार कारीगरों के लिए आर्टिजन कार्ड बनाने के लिए उद्योग मंत्रालय में आवेदन जमा किया गया है. दिसंबर 2019 तक 50 हजार से अधिक कारीगरों को आर्टिजन कार्ड प्रदान करने का लक्ष्य है. इसके जरिये इन्हें अलग पहचान मिलेगी. बोर्ड कारीगरों के लिए पूंजी और बाजार की व्यवस्था कर रहा है. आर्टिजन कार्ड से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आसानी से इन्हें लोन मिल जायेगा. विभिन्न विभागों द्वारा लगाये गये मेले में नि:शुल्क स्टॉल लगाने की भी सुविधा मिलेगी.

स्फूर्ति योजना
क्लस्टर बनाकर स्फूर्ति योजना के जरिए कारीगरों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग दिया जाता है. उनके उत्पाद के लिए बाजार की व्यवस्था की जाती है. क्लस्टर में बोर्ड द्वारा एक जगह चयनित की जाती है, जहां पर खास कार्य के लिए आधारभूत संरचना का विकास किया जाता है, ताकि उस विशेष कार्य से जुड़े कारीगर अपना कार्य यहां आसानी से कर सकें. कारीगरों के विशेष समूह को खुद का अंशदान भी करना पड़ता है. केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत चार जिलों में कार्य संचालन की स्वीकृति दी है. रामगढ़ जिले के सुकरीगढ़ा में सोने- चांदी से बने उत्पाद को और वृहद रूप दिया जा रहा है. रांची जिले के बुंडू में लाह क्लस्टर, लोहरदगा जिले के कुड़ू में मधुपालन क्लस्टर और गुमला जिले में नॉन टीक फार्म प्रोडक्ट्स यानी सागौन रहित उत्पाद के लिए क्लस्टर बनाने की स्वीकृति दी गयी है.

रुकेगा पलायन
गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संपदाओं व ग्रामीणों की योग्यता के मुताबिक उन्हें कार्य सौंपकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है. काम से पहले इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है. मछली पालन, मधुमक्खी पालन, लाह उत्पादन, लाह की चूड़ियां बनाना, खेती करना एवं तसर उत्पादन, बांस निर्मित उत्पाद समेत अन्य कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पलायन रोका जा सके.

पारंपरिक कौशल को राष्ट्रीय बाजार
समर्थ योजना से जहां हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, वहीं कारीगरों को बड़ा बाजार मिलेगा. शिल्प व पारंपरिक कौशल को राष्ट्रीय बाजार के लिए सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के साथ करार किया है. फ्लिपकार्ट मोबाइल एप्प के माध्यम से उपभोक्ता समर्थ टाइप कर झारखंड के कलाकारों के उत्पाद देख और खरीद सकते हैं.