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  • Dec 27 2018 6:21PM

मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता झारखंड

मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता झारखंड

पवन कुमार

झारखंड के किसानों की आय अब दोगुनी नहीं, चौगुनी करने की चर्चा होने लगी है. ऐसे में सिर्फ खेती-बारी के जरिये ही किसानों की आय बढ़ाना संभव नहीं है. इसे देखते हुए राज्य में मत्स्य पालन पर भी खासा जोर दिया गया और इसका असर भी दिख रहा है. झारखंड में मछली उत्पादन में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है. झारखंड के गांव- गांव के छोटे-बड़े जलाशयों में किसान मछली पालन कर रहे हैं. मत्स्य पालन के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था है. इसे बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से भी कई कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसका लाभ ग्रामीण उठा रहे हैं. पिछले कई वर्षों में मत्स्य पालन से जुड़ कर राज्य के युवक-युवतियां आत्मनिर्भर हो रहे हैं. मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाने लगा है. मत्स्य उत्पादन बढ़ने से कुपोषण की समस्या का भी निदान हो रहा है. केज कल्चर के माध्यम से बड़े और छोटे जलाशयों से मछली उत्पादन किया जा रहा है. राज्य में मौजूद जल संसाधनों को देखते हुए बेहतर मत्स्य उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य की 70 फीसदी आबादी मछली खाना पसंद करती है. इसे देखते हुए राज्य के बाजारों में मछली की खपत का अंदाजा लगाया जा सकता है.

चारा आधारित मत्स्य पालन पर हो जोर
मत्स्य उत्पादन में मुनाफा हो, इसके लिए चारा आधारित मत्स्य पालन पर जोर देना जरूरी है. तालाब में मौजूद प्राकृतिक भोजन से मछलियों को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाता है. इसलिए मत्स्य पालक किसान सिर्फ प्राकृतिक भोजन पर आश्रित न रहें, बल्कि मछलियों को बाहर से चारा भी अवश्य दें. अधिकांश मामलों में अकुशल प्रबंधन और तालाब का सही प्रबंधन नहीं करने के कारण मछलियों के आकार में वृद्धि नहीं होती है. एक बात किसानों को याद रखना चाहिए कि जाड़े के मौसम में मछलियों का ग्रोथ धीरे-धीरे होता है.

मत्स्य पालक इन बातों का रखें ख्याल
पानी और तालाब की गुणवत्ता की जांच अवश्य कर लें
तालाब में अगर कोई और जीव है, तो मछलियों के लिए आहार कम हो जायेगा. इससे मछलियों की वृद्धि पर असर होगा
तालाब के पानी का पीएच मान को समय-समय पर जांचते रहें
अक्सर किसान ज्यादा पाने के लालच में छोटे तालाब में अधिक मछलियां डाल देते हैं, जबकि तालाब के अनुपात में मछलियां डालें
मत्स्य पालक हमेशा निर्धारित मात्रा में ही फिंगरलिंग या जीरा तालाब में डालें, ताकि पर्याप्त मात्रा में उन्हें जलाशय में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व और ऑक्सीजन मिल सके. प्राकृतिक पोषक तत्व मछलियों के बढ़ने में काफी सहायक साबित होते हैं
तालाब में वनस्पति पल्लवक(प्लांकटन) की संख्या बढ़ाने के लिए तालाब में रासायनिक और जैविक खाद का उपयोग निर्धारित मात्रा में करें. इससे तालाब में प्लांकटन की मात्रा बढ़ती है, जो मछलियों के लिए पोषक तत्व का कार्य करते हैं
किसान अपने तालाब में फिंगरलिंग या इयरलिंग का संचयन करते हैं. इससे मछलियों को अधिक मात्रा में भोजन की जरूरत होती है. तालाब में मौजूद पल्लवक से इसे पूरा नहीं किया जा सकता है. इसलिए इस दौरान मछलियों को पूरक आहार जरूर दिया जाना चाहिए
मत्स्य पालन से जुड़नेवाले किसानों को प्रशिक्षण अवश्य लेना चाहिए

मत्स्य पालन के लिए सरकारी योजनाएं
1.
राज्य प्रायोजित योजना

मत्स्य कृषकों को 50 फीसदी अनुदान पर मछलियों का चारा मिलना
जलाशयों के विस्थापितों के पुनर्वास, स्वरोजगार एवं आर्थिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से मत्स्य कृषकों को 90 फीसदी अनुदान पर केज उपलब्ध कराना
राज्य के प्रशिक्षित मत्स्य बीज उत्पादकों के माध्यम से बीज का उत्पादन एवं संचयन
जलाशयों में फिंगरलिंग का संचयन के माध्यम से मत्स्य बीज उत्पादकों के मत्स्य फिंगरलिंग की बिक्री के लिए बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करना
निजी जमीन पर नये तालाबों के निर्माण के लिए मत्स्य पालकों को 70-80 फीसदी तक अनुदान
मत्स्य पालकों का प्रशिक्षण
नयी प्रजाति की मछलियों के पालन को प्रोत्साहन
रंगीन मछलियों का पालन एवं प्रजनन
आधार सीडिंग या डीबीटी पर विशेष ध्यान
जलाशयों के मछुआरों को पहचान पत्र
झारखंड राज्य मत्स्य सहकारी संघ के माध्यम से मत्स्यजीवी सहकारी समिति को आर्थिक सहायता
सामूहिक दुर्घटना बीमा के तहत राज्य के सक्रिय मछुआरों को प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा कवरेज
मछुआरों को पक्का आवास (वेद व्यास आवास) के लिए प्रति आवास एक लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता
मत्स्य विपणन योजन के तहत आधुनिक मछली बाजार का निर्माण, खुदरा मछली विक्रेताओं को कियोस्क, प्रसंस्करण कियोस्क, शीत गृह का निर्माण

2. केंद्र प्रायोजित योजना
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत आधारभूत संरचना, मत्स्य पालन के लिए इकाई लागत आधारित 40 फीसदी तक अनुदान
केज कल्चर एवं हैचरी निर्माण पर इकाई लागत आधारित 40 फीसदी तक अनुदान

राज्य में मत्स्य पालन की स्थिति
संसाधन संख्या क्षेत्रफल (हेक्टयर में)
निजी तालाब 1,16,305 50,586
सरकारी तालाब 16,719 15,762
जलाशय 401 1,21,117
चेकडैम एवं आहारा 1184 4570
कोल पिट एवं खदान 1741 9880
नदियां 1800 किमी
मनरेगा कुआं 1,26,000
डोभा 2,04,000 लगभग
आरएफएफ 1153

राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र 01
राज्य स्तरीय मत्स्य अनुसंधान केंद्र 01
विभागीय सर्कुलर हैचरी की संख्या 17
निजी हैचरियों की संख्या 107
पोर्टेबल हैचरी की संख्या 69
जलाशय में स्थापित केजों की संख्या 4600
पेन क्लचर व आरएफएफ 212
फीड फैक्ट्री की संख्या 06
राज्य स्तरीय मछली बाजार 01
राज्य स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ 01
मत्स्य पालकों व मछुआरों की संख्या 1,32,000
मत्स्यजीवी सहकारी समितियों की संख्या 413
जलाशयों पर गठित मत्स्यजीवी सहकारी समितियों की संख्या 237
प्रशिक्षित मत्स्य बीज उत्पादक 7500

2.25 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2.25 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1.9 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था. इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य आधारित मछलियों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

मत्स्य उत्पादन में दो वित्तीय वर्ष की स्थिति

1. मत्स्य उत्पादन
वर्ष (2017-18) में 1.9 लाख मीट्रिक टन
लक्ष्य (2018-19) में 2.25 लाख मीट्रिक टन

2. मत्स्य बीज उत्पादन
वर्ष (2017-18) : 1,03,349
लक्ष्य (2018-19) : 1,06,000

3. प्रशिक्षण की संख्या
वर्ष (2017-18) : 16,296
लक्ष्य (2018-19) : 17,500

4. रियरिंग तालाब निर्माण की संख्या
वर्ष (2017-18) : 194.50 एकड़
लक्ष्य(2018-19) : 77 एकड़

5. मत्स्य बीज उत्पादक
वर्ष (2017-18) : 7364
लक्ष्य (2018-19) : 7500

6. जलाशयों में केजों की संख्या
वर्ष (2017-18) : 522 केज
लक्ष्य (2018-19) : 200 केज

मत्स्य पालन से ऐसे जुड़ें
अगर आप मत्स्य पालन करना चाहते हैं, तो जिला मत्स्य कार्यालय या रांची स्थित डोरंडा के मत्स्य निदेशालय में संपर्क कर सकते हैं. नये मत्स्य पालकों के लिए विभाग प्रशिक्षण की भी व्यवस्था करता है, ताकि आप मत्स्य पालन की हर पहलुओं को जान सकें.

इनसे करें संपर्क
1. डॉ हृंगनाथ द्विवेदी, निदेशक, मत्स्य : 0651-2480747, 9835210462
2.
मनोज कुमार, संयुक्त निदेशक, मत्स्य : 0651-2480437, 9431039362
3.
आशीष कुमार, उप-निदेशक, मत्स्य : 0621-2481164, 9430783037
4.
मनोज कुमार, सहायक निदेशक, मत्स्य : 9431127930

मत्स्य पालन में है असीम संभावनाएं : डॉ हृंगनाथ द्विवेदी
मत्स्य निदेशक डॉ एचएन द्विवेदी कहते हैं कि राज्य में मत्स्य पालन में असीम संभावनाएं हैं. इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं. राज्य में मछली का उत्पादन बढ़ा है और खपत भी बढ़ी है. कई युवक-युवतियां मत्स्य पालन से जुड़कर स्वावलंबी हो रहे हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ भी मत्स्य पालकों को मिल रहा है. मत्स्य विभाग द्वारा बेहतर मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. नये किसानों को जोड़ने के लिए भी कई प्रकार की योजनाएं हैं. उन्हें आवासीय प्रशिक्षण भी दिया जाता है. मत्स्य पालन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है जागरूकता. इसलिए मत्स्य पालन करने से पहले प्रशिक्षण जरूर लें और बताये गये नियमों का पालन करें, ताकि बेहतर उत्पादन से आपकी जिंदगी में बदलाव आ सके