ssakshtkaar

  • Sep 18 2018 3:04PM

यूपी के खुर्जा मॉडल से बदलेगी माटी की कारीगरी की तस्वीर

यूपी के खुर्जा मॉडल से बदलेगी माटी की कारीगरी की तस्वीर

उत्तर प्रदेश अंतर्गत बुलंदशहर जिले के खुर्जा मॉडल से झारखंड में माटी की कारीगरी की तस्वीर बदलने की योजना है. झारखंड माटी कला बोर्ड कुम्हारों को प्रशिक्षित कर उन्हें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करायेगा, ताकि बाजार की मांग के अनुरूप वह उत्पाद बना सकें. इससे हर हाथ को रोजगार मिलेगा और पलायन पर रोक लगेगा. झारखंड माटी कला बोर्ड के सदस्य नीरज प्रजापति से बातचीत

खुर्जा में माटी कार्य से जुड़ी हैं कई फैक्ट्रियां
झारखंड माटी कला बोर्ड द्वारा उत्तर प्रदेश के खुर्जा और गुजरात दौरा कर माटी के उत्पादों और तकनीकी सुविधाओं की जानकारी ली गयी थी. इस दौरान उन्होंने पाया था कि खुर्जा में माटी के इस पेशे में बड़े-बड़े कारोबारी लगे हुए हैं. वहां कई फैक्ट्रियां हैं और लैब हैं, जहां लगातार माटी पर शोध कार्य किया जा रहा है. इस कारण माटी के पेशे में बेहतर किया जा रहा है. वहां की लैब में ये साबित हो चुका है कि माटी के उत्पादों में भोजन से स्वास्थ्य बेहतर रहता है.

माटी के बर्तन का हमेशा कर सकेंगे उपयोग
पहले माटी के बर्तन का एक बार उपयोग कर उसे फेंक देते थे. दोबारा उपयोग नहीं करते थे, लेकिन अब माटी के ऐसे उत्पाद बनाये जा रहे हैं, जिसका हमेशा उपयोग कर सकते हैं. मिट्टी के कूकर, इडली बनाने का बर्तन, वाटर बॉटल, तवा, कॉफी कप समेत कई उत्पाद बन रहे हैं. इससे लोगों का माटी के उत्पाद की ओर रुझान बढ़ेगा. धीरे-धीरे लोग जागरूक हो रहे हैं और माटी के उत्पाद का उपयोग करने लगे हैं. कुल्हड़ की चाय के उपयोग से इसकी शुरुआत हो चुकी है.

प्रशिक्षित कुम्हारों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
झारखंड माटी कला बोर्ड की कोशिश है कुम्हारों को प्रशिक्षित कर आधुनिक सुविधाएं देकर बाजार के अनुरूप उन्हें तैयार करना. इससे वह आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, वहीं आमलोग मिट्टी के उत्पाद का उपयोग कर स्वस्थ रहेंगे.