ssakshtkaar

  • Nov 25 2019 2:29PM

वैज्ञानिक तरीके से करें खेती, तो होगी अच्छी आमदनी: प्रियरंजन कुमार,प्रधान वैज्ञानिक,आईसीएआर, पलांडू

वैज्ञानिक तरीके से करें खेती, तो होगी अच्छी आमदनी: प्रियरंजन कुमार,प्रधान वैज्ञानिक,आईसीएआर, पलांडू

पंचायतनामा टीम 

बरसात खत्म होते ही रबी फसल का मौसम शुरू हो जाता है. अक्तूबर से दिसंबर महीने तक रबी फसल की जाती है, हालांकि पूरा अक्तूबर महीना रबी फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम में खेती करने के लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि फसल के अनुसार इस मौसम में सिंचाई जरूरी है. अगर पर्याप्त सिंचाई नहीं होगी, तो उत्पादन पर असर पड़ता है. रबी के मौसम में दलहन, तिलहन, सब्जी और गेहूं मुख्य तौर पर उगाये जाते हैं. अभी कई किसान अपने खेत में फसल लगा चुके होंगे और कई तैयारी कर रहे होंगे. जितनी जल्दी हो सके किसानों को अपनी फसल की बुआई खेत में कर देनी चाहिए, क्योंकि देरी होने पर उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा.

अरहर लगाने में न करें देरी

रबी के मौसम में मुख्य रूप से मटर, चना, मसूर, सरसों, तीसी, सरगुजा, गेहूं और सब्जियों की खेती की जाती है. इसमें भी दो प्रकार की फसलें होती हैं. प्री रबी और रबी. प्री रबी के अंतर्गत सरगुजा, कुल्थी और अरहर की खेती की जाती है. इसकी बुवाई अगस्त महीने में की जाती है. ऊपरी जमीन पर इसे लगा सकते हैं. यह ऐसी फसल है, जो वर्षा सिंचित होती है. खासकर अरहर लगाने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका समय लंबा होता है और बाद में पानी की कमी के कारण दाना का आकार छोटा हो जाता है.

15 अक्तूबर से 15 दिसंबर तक रबी फसल

रबी की बुआई 15 अक्तूबर से 15 दिसंबर तक होती है, लेकिन किसान जितनी जल्दी करेंगे उन्हें उतना ही फायदा होगा. खासकर अगर किसान मटर, चना या मसूर की खेती करना चाहते हैं, तो अक्तूबर महीने में खेत में लगा देना चाहिए. 15 नवंबर के बाद इन सब फसलों को लगाने से पैदावार घटती है, क्योंकि फसल के तैयार होने का समय 15 मार्च से आगे नहीं जाना चाहिए. 15 मार्च के बाद की हवाएं शुष्क होती हैं और उनमें नमी नहीं होती है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है. खासकर गेहूं को इससे बहुत नुकसान होता है. गेहूं के दाने छोटे हो जाते हैं.

अधिक आमदनी के लिए क्या करें

किसान अगर व्यावसायिक दृष्टिकोण से खेती करते हैं, तो ज्यादा मुनाफा कमाना उनका लक्ष्य होता है. झारखंड में रबी के मौसम में किसानों के पास समय की कमी होती है, क्योंकि खरीफ फसल की कटनी का समय होता है. इसलिए वो समय पर रबी फसल नहीं लगा पाते हैं. इसलिए जो किसान चना लगाते हैं, उन्हें झंगरी ही बेच देनी चाहिए, क्योंकि इससे आमदनी ज्यादा होती है. गेहूं 130 दिनों की फसल होती है. इसलिए गेहूं की खेती वही किसान करें, जिनके पास बड़ी जमीन है. गेहूं से ज्यादा उत्पादन और आमदनी होती है. छोटी जोतवाले किसान सब्जी की खेती करें, क्योंकि यह कम समय में तैयार हो जाती है.

कीट और पाला से बचाव

रबी मौसम में वैसे तो ज्यादा बीमारियां नहीं आती हैं, लेकिन पाला से फसलों को काफी नुकसान होता है. पाला से बचने के लिए किसान यह सुनिश्चित करें कि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे. समय-समय पर सिंचाई करते रहें. आलू, मटर, चना और टमाटर में पाला मारने का खतरा अधिक रहता है. अगर फसलें पाला से प्रभावित हो जायें, तो कॉपर ऑक्साइड, ब्लू कॉपर या ब्लाइटऑक्स को दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर खेत में छिड़काव करें. इसके अलावा फली छेदक (पॉड बोरर) नामक कीट भी फल होने पर लगता है. इससे बचाव के लिए स्पाइनोसेड आधा मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें या फिर फेरामेन ट्रैप का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. ये सभी दवाइयां आइसीएआर, प्लांडू (रांची) में उपलब्ध हैं. किसान अच्छी किस्म के बीज भी यहां से खरीद सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि वैज्ञानिक प्रियरंजन कुमार से फोन नंबर 7903230547 पर भी संपर्क कर सकते हैं.