ssakshtkaar

  • Dec 21 2018 6:29PM

अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ा कर चेहरे पर लानी है मुस्कान

अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ा कर चेहरे पर लानी है मुस्कान

पंचायतनामा डेस्क

झारखंड के अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ा कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना है. इसके लिए इजरायल-चीन की खेती की तकनीक को धरातल पर उतारा जा रहा है. आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर जोर देते हुए फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन यानी एफपीओ का गठन कर सामूहिक खेती से कृषि जगत में बदलाव की नयी इबारत लिखी जा रही है. जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रासायनमुक्त खेती पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कम लागत में अच्छी उपज से किसानों की आमदनी बढ़ सके. राज्य के किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश हो रही है

महिला किसान जा रहीं इजराइल, सीखेंगी तकनीक
खेती-किसानी सरकार की प्राथमिकता रही है. किसानों की आय बढ़ा कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना हमारा लक्ष्य है. इसीलिए राज्य के किसानों को इजराइल ले जाकर वहां की तकनीक से अवगत कराया जा रहा है, ताकि वे राज्य के किसान भाई-बहनों को अपना अनुभव साझा कर प्रेरित कर सकें. अब तक 47 किसानों को इजरायल भेजा जा चुका है. दिसंबर के आखिरी सप्ताह में झारखंड की महिला किसान समेत महिला अधिकारियों की 32 सदस्यीय टीम इजरायल जा रही है. यह पूरी तरह महिलाओं की टीम होगी.

जागरूक होकर उठाएं योजनाओं का लाभ
अच्छी आमदनी के लिए किसानों का जागरूक होना जरूरी है. मिट्टी जांच को लेकर 3,164 पंचायतों में मिनी सॉयल लैब है. 14 लाख 61 हजार 440 सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को दिये गये हैं. सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को अच्छी उपज में मार्गदर्शन करेगा. हर हाल में मिट्टी जांच करा कर ही खेती करें. गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए वर्ष 2017 से बीज ग्राम की व्यवस्था है. राज्य में 1055 बीज ग्राम हैं. अनुदान पर बीज लेकर किसान अच्छी उपज करें. यहां से 3 लाख 11 हजार क्विंटल धान बीज तैयार हुआ है. 3,160 महिला स्वयं सहायता समूह के पास कृषि यंत्र बैंक है. यहां से 90 फीसदी या दो लाख तक के अनुदान का लाभ ले सकते हैं. 3,561 उर्वरक की दुकानों पर ई-पॉश मशीन लगी है. राज्य में ई-नाम से 19 मंडी है.

ड्रिप इरिगेशन पर 90 फीसदी अनुदान
झारखंड इकलौता राज्य है, जहां किसानों को ड्रिप इरिगेशन पर 90 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है. इसका लाभ दो हेक्टेयर या इससे कम जमीनवाले किसानों को मिलता है. इससे अधिक जमीन वाले किसानों को 80 फीसदी अनुदान मिलता है. 9, 679 हेक्टेयर में ड्रिप लगा हुआ है. 18, 436 हेक्टेयर में ड्रिप लगाने का लक्ष्य है. किसानों के लिए काफी कारगर है.

10 लाख हेक्टेयर जमीन को खेती योग्य है बनाना
झारखंड में 38 लाख हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है. इसमें 28 लाख हेक्टेयर भूमि पर ही किसान भाई-बहन खेती करते हैं. 10 लाख हेक्टेयर भूमि पर कई कारणों से खेती नहीं हो पाती है. इस भूमि को खेती योग्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है. इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. 2017-18 में 95 हजार हेक्टेयर भूमि को खेती योग्य बना दिया गया. इसके लिए 4,400 किसानों को प्रोत्साहन दिया गया है.

द्विफसली खेती पर जोर
अक्सर किसान एक फसली खेती करते हैं. ऐसे किसानों को द्विफसली खेती के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. जीरो ट्रिल ड्रील मशीन दी जा रही है. ड्रिप इरिगेशन समेत अन्य कई योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें आमदनी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2016-17 में 29,727 छोटे एवं सीमांत किसान, स्वयं सहायता समूह एवं किसान क्लब को अनुदान पर पंपसेट दिया गया है.

झारखंड में देश का पहला सिंगल विंडो सेंटर
ये झारखंड की बड़ी उपलब्धि है कि रांची के अनगड़ा के गेतलसूद में देश का पहला सिंगल विंडो सेंटर खुला है. किसानों के लिए यह वरदान है. एक ही छत के नीचे किसानों को सभी लाभ मिल जाते हैं. फिलहाल 260 प्रखंडों में सिंगल विंडो सेंटर है.

ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट मील का पत्थर
किसानों को जागरूक और प्रोत्साहित करने के लिए जिला व प्रखंड स्तर पर कृषि समागम, कृषि मेला व कृषि चौपाल आयोजित की जाती है. इसी क्रम में रांची के खेलगांव में ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट का आयोजन कर निवेश को लेकर देश-दुनिया को झारखंड की खेती की ताकत से अवगत कराया गया. राज्य के किसानों का हौसला बढ़ा कर दुनिया की तकनीक से रूबरू कराया गया. ये आयोजन कृषि जगत में मील का पत्थर साबित होगा.

एफपीओ से बदलेगी तस्वीर
इजरायल-चीन की एफपीओ (फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन) तकनीक से खेती की स्थिति बदलेगी. बड़े क्षेत्र में सामूहिक खेती से न सिर्फ अच्छी उपज होगी, बल्कि बाजार में बिचौलियागीरी पर रोक लगेगी. किसान उचित मूल्य पर अपने उत्पाद बेच सकेंगे. राज्य में 205 एफपीओ का गठन हो चुका है.

किसान करें संपर्क
किसान जानकारी या शिकायत के लिए 0651-2490542 या रांची के नेपाल हाउस में किसान सहायता कोषांग के नंबर 7632996429 पर भी संपर्क कर सकते हैं.

खेती-किसानी की स्थिति
किसान-28 लाख
खेती योग्य जमीन-38 लाख हेक्टेयर
खेती हो रही है- 28 लाख हेक्टेयर
खेती योग्य बनाना है-10 लाख हेक्टेयर
खेती योग्य बनाया-95 हजार हेक्टेयर
सॉयल हेल्थ कार्ड- 14, 61, 440
मिनी सॉयल लैब- 3164 पंचायत
मिनी सॉयल लैब (पीपीपी मोड)-12 जिलों में
बीज ग्राम- 1055
थ्रेसिंग फ्लोर-7,19
जैविक खेती का लक्ष्य- 50 हजार हेक्टेयर
जैविक खेती हो रही है- 26, 300 हेक्टेयर
ई नाम-19 मंडी
ड्रिप इरिगेशन का लक्ष्य-18, 436 हेक्टेयर
ड्रिप इरिगेशन हो रहा है-9, 679 हेक्टेयर
ड्रिप इरिगेशन- 90 फीसदी अनुदान
डीप बोरिंग-1892
परक्यूलेशन टैंक-2,111
डोभा (2017-18 से पूर्व)-77, 444
सिंगल विंडो सेंटर- 260 प्रखंडों में
फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन-205
उर्वरक दुकानों में ई-पॉश मशीन-3, 561
इजरायल गये-47 किसान