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  • Jun 18 2019 4:49PM

कीटनाशकों के प्रयोग में किसान बरतें सावधानी

कीटनाशकों के प्रयोग में किसान बरतें सावधानी

पंचायतनामा टीम

कीट पौधे को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे फसलों की उत्पादन क्षमता घट जाती है और फसलों की गुणवत्ता भी घटती है. इसलिए कीट पर नियंत्रण व कीट प्रबंधन जरूरी है. खासकर मॉनसून की खेती में कीट नियंत्रण बेहद अहम है.कीट नियंत्रण और कीटनाशक के बारे में जानकारी दी भारतीय कृषि अनुसंधान परिसर पूर्वी प्रक्षेत्र पलांडू के कीट वैज्ञानिक जयपाल सिंह चौधरी ने.

कीट प्रबंधन कारगर तरीका
हानिकारक कीटों को मारने या नष्ट करने के लिए रासायनिक एवं अन्य रसायन उत्पादित उत्पाद को कीटनाशक कहते हैं. कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय यह जानना जरूरी है कि उन कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, जो मित्र कीट को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए हानिकारक कीट की रोकथाम करने के लिए उपाय तथा मित्र कीट की संख्या बढ़ाने का उपाय करना चाहिए.

खरीफ फसल के प्रमुख कीट
खरीफ फसलों में मुख्य रूप से फुदगा, माहु, सफेद मक्खी, थ्रीप्स, तना छेदक और गंधी आदि कीटों का अधिक प्रभाव होता है. यह कीट धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और सब्जियों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं.

कीट की पहचान, रोकथाम और नियंत्रण
1.
फुदगा : इसे लीफ हॉपर भी कहा जाता है. यह धान व अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाता है. इसका प्रकोप होने पर पत्तियों के किनारे सूखा, जला या झुलसा हुआ हिस्सा दिखायी देता है, क्योंकि कीट द्वारा पत्तियों का रस चूस लिया जाता है. यही फुदगा रोग की पहचान है. धान के खेत में यह अक्सर पाया जाता है.

रोकथाम : इस कीट की रोकथाम के लिए जुताई के समय खेत में नीम या करंज की खल्ली 250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालना चाहिए. बीज को इमीडाक्लोप्रीड 70 डब्ल्यूएस का आठ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से बीजोपचार करना चाहिए.

नियंत्रण : जैविक तरीके से फुदगा कीट के नियंत्रण के लिए नीम के बीज का अर्क बनाकर चार प्रतिशत 100 लीटर पानी में मिला कर खेत में छिड़काव करना चाहिए. रासायनिक तरीके से फुदगा रोग का नियंत्रण करने के लिए कीट दिखायी देने पर एसीफेट एक ग्राम प्रति लीटर पानी में मिला कर या इमीडाक्लोप्रीड 0.3 मिलीलीटर पानी मिला कर छिड़काव करना चाहिए.

2. सफेद मक्खी : यह रस चूसनेवाली कीट होती है. सफेद रंग की यह मक्खी रस चूसने के साथ वायरस जनित बीमारियों की वाहक होती है, जो पौधों को संक्रमित करने का कार्य करती है.

रोकथाम : इसकी रोकथाम के लिए बिचड़ा को प्रोट्रे में पॉली हाउस के अंदर तैयार करना चाहिए या पॉलीथिन से ढंक कर रखना चाहिए. बिचड़ा का बीजोपचार करना चाहिए. बिचड़े की जड़ों को रासायनिक कीटनाशक डाइमिथोनेट दो मिलीग्राम प्रति लीटर पानी या इमीडाक्लोप्रीड एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर बिचड़े की जड़ों को उसमें डूबा कर एक से डेढ़ घंटे तक रखना चाहिए.

नियंत्रण : सबसे पहले खेत में सफेद मक्खी का पता लगाने के लिए खेत में यलो स्टिकी ट्रैप्स का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके तहत किसी डंडे को पीला रंग से रगंकर उसमें ग्रीस अथवा कोई चिपचिपा पदार्थ लगा देना चाहिए, जिससे मक्खियां वहां आकर चिपक जायें. टमाटर, मिर्च, भिंडी जैसी सब्जियों के खेत में सब्जी के पौधे के हर चार लाइन के बाद पीले रंग का गेंदा फूल लगाना चाहिए. कीट पीले रंग के प्रति आकर्षित होते हैं, जिससे सब्जियों को नुकसान नहीं होता है. यदि आवश्यक हो तो खेत में इमीडाक्लोप्रीड 200 मिलीलीटर पानी के साथ घोल कर या स्पाइरोमेसाफिन 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के साथ घोल कर छिड़काव करना चाहिए. ध्यान रहे यह छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करना चाहिए.

3. तना छेदक : इसकी कई प्रजातियां हैं, जो अलग-अलग फसलों पर आक्रमण करती है. तना छेदक के प्रकोप से धान का मुख्य सिरा मर जाता है और आसानी से बाहर निकल जाता है, जबकि बैंगन या अन्य सब्जियों में फूल और फल देनेवाली नयी शाखाएं मर जाती हैं.

रोकथाम : तना छेदक के रोकथाम के लिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए. जब पहली बारिश होती है और धूप होती है, तो इस दौरान खेत की गहरी जुताई से तना छेदक कीट मर जाते हैं. इसके अलावा कीट से ग्रसित भागों को तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए. साथ ही खेत में चिह्नित स्थान पर चिड़ियां आकर बैठे इसका इंतजाम करना चाहिए. छोटी प्रजाति के तना छेदक के लिए फेरोमेटिक ट्रैप्स का इस्तेमाल करना चाहिए. फसल लगने के बाद अंडे के परजीवी कीट ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करना चाहिए.

नियंत्रण : जैविक तरीके से नियंत्रण के लिए बिभेरिया, मिटारजिम या बैसिलियस ट्रोजेन्सिक बीटी कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए. रासायनिक तरीके से नियंत्रण करने के लिए फ्लूबेंडामाइड 0.3 मिलीलीटर और इमामेक्टिव बेंजोइड 0.25 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए या लेमडीसाइथिलीन एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए.

इन बातों का रखें ख्याल
कीटनाशकों के इस्तेमाल का विपरीत असर भी पड़ता है. इसलिए कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचना चाहिए. खासकर रासायनिक कीटनाशकों से पर्यावरण पर असर पड़ता है और मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंचता है. इसलिए कीटों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरत पड़ने पर जैविक उपायों को अपनाया जा सकता है. कीटनाशकों के निर्धारित मात्रा से अधिक मात्रा में इस्तेमाल नहीं करें. बारिश के मौसम में कीटनाशक का छिड़काव करते समय उसमें शैम्पू या सर्फ मिलाना चाहिए, ताकि कीटनाशक पौधों की पत्तियों में चिपक जायें.

बचाव के तरीके
जैविक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग बुवाई से पहले करना चाहिए. अगर बचाव के बावजूद कीड़ा लग गया, तब किसान को देखना चाहिए कि पूरे खेत में कीड़े लगे हैं या सिर्फ कुछ पौधों तक ही सीमित है. अगर कुछ पौधों तक ही कीड़े सीमित हैं, तो उस पौधे को जड़ से उखाड़ कर खेत से निकाल कर जला देना चाहिए. बैंगन, लहसुन, प्याज, बीन में राख का छिड़काव करना चाहिए. राख के इस्तेमाल से कीड़े नहीं लगते हैं. जैविक विधि से बीजों का उपचार भी करना चाहिए.

कैसे बिकता है प्रतिबंधित कीटनाशक
रासायनिक कीटनाशक का उपयोग किसान खेत बनाने से लेकर फसल उगाने और भंडारण तक करते हैं. अब तो फल-सब्जियों को पकाने और देर तक ताजा रखने के लिए भी कीटनाशकों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है. देश में आज भी कई कीटनाशक प्रतिबंधित हैं, इसके बावजूद उसे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है. इसलिए किसान भाई-बहन आप इन प्रतिबंधित कीटनाशकों को जान लें और उसे अपने खेतों में उपयोग में लाने से परहेज करें.

प्रतिबंधित कीटनाशकों के बेचने पर दो साल की सजा
केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित व निषिद्ध रसायनों की बिक्री रोकने के लिए सख्त कानून बनाये हैं. कीटनाशक एक्ट 1968 की धारा 29 के तहत ऐसे रसायन बेचनेवालों को 10 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दो साल की कैद हो सकती है.

कीटनाशकों की खरीदारी कहां और कैसे करें
किसान हमेशा प्रतिष्ठित कंपनियों के कीटनाशक खरीदें. फसलों के हर रोग के लिए उचित कीटनाशक होता है. किसान उसे अच्छे तरीके से देख कर ही खरीदें. अक्सर दुकानदार ज्यादा कमीशन के चक्कर में उन्हीं कंपनियों के कीटनाशक किसानों को देते हैं, जिनमें उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है. अगर संभव हो तो लाइसेंसी दुकान से ही कीटनाशक खरीदें. सभी कीटनाशक के डिब्बों में लाल, हरा, नीला और पीले रंग के निशान बने होते हैं. किसानों को चाहिए कि लाल निशान वाले डिब्बों को लेने से बचें. किसान हरा निशान वाले डिब्बों का ही प्रयोग करने की कोशिश करें.

कीटनाशकों की खरीद व सुरक्षित उपयोग
अगर आप कीटनाशक दवाइयों को खरीदकर उसके सुरक्षित उपयोग करने की सोच रहे हैं, तो हम आपको कुछ सावधानियां बता रहे हैं, ताकि आप इन सावधानियों को बरतकर कीटनाशकों का बेहतर प्रयोग कर सकते हैं. इससे जहां आपका खेत सुरक्षित रहेगा, वहीं आपकी फसल एवं आप भी सुरक्षित रह सकते हैं. आइये जानते हैं कि पेस्टीसाइड की खरीद और उसके सुरक्षित प्रयोग के लिए

क्‍या करें और क्‍या न करें
क्या करें
कीटनाशक और जैव कीटनाशक सिर्फ पंजीकृत कीटनाशक डीलर यानी वैध लाइसेंस वाले दुकान से ही खरीदें
एक विशिष्‍ट क्षेत्र में एक बार छिड़काव के लिए जितनी आवश्‍यकता हो, उतना ही कीटनाशक खरीदें
कीटनाशकों के कंटेनर या पैकेट पर मान्‍यता प्राप्‍त लेबल जरूर देखें
लेबल पर बैच संख्‍या, पंजीकरण संख्‍या, मैन्‍युफैक्‍चर और एक्‍सपाइरी तारीख देखें
कंटेनर में अच्‍छी तरह से पैक किये हुए कीटनाशक ही खरीदें

क्या न करें
फुटपाथ के डीलरों या ऐसे डीलर जिनके पास लाइसेंस नहीं हो, उनसे कीटनाशक नहीं खरीदें
एक साथ अधिक मात्रा में कीटनाशक नहीं खरीदें
कंटेनर पर पंजीकृत लेबल न होने पर कीटनाशक नहीं खरीदें
कभी भी कीटनाशक की एक्‍सपाइरी तिथि खत्‍म होने के बाद उसे न खरीदें
कीटनाशकों के ऐसे कंटेनर जो लीक कर रहे हों या खुले हों या फिर जिन पर सील न हो, उन्‍हें नहीं खरीदें