ssakshtkaar

  • Jan 9 2020 5:06PM

बच्चों के चरित्र निर्माण के साथ अभिभावकों की शिक्षा पर जोर

बच्चों के चरित्र निर्माण के साथ अभिभावकों की शिक्षा पर जोर
फोटो: प्रदीप भाई

पंचायतनामा टीम
रांची 

जब मनुष्य अपनी पहचान आत्मा से नहीं जोड़ कर अपने शरीर से जोड़ता है, तब इंसान का चारित्रिक पतन होता है. वर्तमान समय में यही हो रहा है, क्योंकि इंसान अपनी पहचान अपने शरीर से करा रहा है. इसके कारण भोगवादी संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है. इंसान भौतिक सुख के पीछे भाग रहा है, जबकि उसकी पहचान यह है कि वो एक पवित्र आत्मा है. वर्तमान में इंसान का नैतिक पतन क्यों हो रहा है इस सवाल के जवाब में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रदीप भाई ने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि अगर आज के समय में अपराध बढ़े हैं, तो इसका मुख्य कारण है बच्चे और अभिभावकों का अध्यात्म से दूर होना. अभिभावकों को भी बच्चों को नैतिक शिक्षा देने के लिए आगे आना होगा, क्योंकि बच्चा सबसे पहले उनसे ही सीखता है. इसलिए राजयोग केंद्र में सभी को नैतिक शिक्षा दी जाती है.

बालपन से ही देते हैं पवित्र आत्मा का ज्ञान

राजयोग केंद्र में बड़ों के अलावा बच्चे भी आते हैं. बच्चों को शुरू से ही यह बताया जाता है कि आप एक शरीर नहीं है, आप एक पवित्र आत्मा हैं. हर शरीर में एक पवित्र आत्मा निवास करती है. इस सत्य को अगर सभी जान लें, तो फिर किसी के प्रति मन में किसी प्रकार की भावना नहीं आयेगी. फिर वो हर इंसान को एक शरीर के तौर पर नहीं, आत्मा के तौर पर देखेगा. बच्चों को बताया जाता कि आत्मा कभी गलत नहीं हो सकती है. बच्चों के चरित्र निर्माण करते हुए अभिभावकों को भी यही शिक्षा देने पर जोर दें. बेहतर चरित्र निर्माण के लिए हमें इन चीजों को समझना होगा.

यह भी पढ़ें: बच्चों में जरूरी है संस्कार गढ़ना: निर्मला बहन 

खुद, खुदा और खेल

राजयोग केंद्र में सात दिवसीय ध्यानयोग का कोर्स कराया जाता है. इन सात दिनों में खुद, खुदा और खेल के बारे में बताया जाता है. यहां आनेवाले सभी को पहले खुद की पहचान करायी जाती है. खुद के बाद खुदा से इस पहचान को जोड़ा जाता है. पवित्र आत्मा और भगवान के बीच का संबंध बताया जाता है. फिर खेल के बारे में बताया जाता है कि किस प्रकार से इस पृथ्वी पर खेल होते हैं. भगवान इस खेल में शामिल होते हैं.

बालपन से ही देनी होगी शिक्षा : प्रदीप भाई

प्रदीप भाई कहते हैं कि अगर बच्चों का चरित्र निर्माण करना है, तो बालपन से ही उनके अंदर अच्छी भावनाएं जागृत करें. उन्हें शरीर व आत्मा के बीच के अंतर को समझाना होगा. बड़ों का सम्मान करने पर जोर देना होगा. नैतिक शिक्षा का पाठ बच्चों को स्कूलों में पढ़ाना होगा. उन्होंने बताया कि अन्नामलाई यूनिवर्सिटी में उनके सहयोग से वैल्यू एजुकेशन का कोर्स शुरू किया गया है.