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  • Mar 4 2019 3:23PM

डीडीसी नैंसी सहाय ने किया मां का सपना साकार

डीडीसी नैंसी सहाय ने किया मां का सपना साकार

दावर इमरान
साहिबगंज

2014 बैच की आइएएस अफसर नैंसी सहाय साहिबगंज जिले में बतौर डीडीसी (उपविकास आयुक्त) पदस्थापित हैं. उनके पिता प्रकाश सहाय योगदा कॉलेज, रांची में प्रोफेसर हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है. उनकी मां राजलक्ष्मी सहाय पढ़ाई में काफी तेज थीं. ग्रेजुएशन के बाद वह यूपीएससी मेंस की परीक्षा पास की थीं, लेकिन इंटरव्यू नहीं दे पायी थीं. इस तरह उनकी मां का आइएएस अधिकारी बनने का सपना अधूरा रह गया था. मां के इस सपने को बेटी नैंसी सहाय ने पूरा कर परिवार का मान बढ़ाया.

रांची की रहनेवाली हैं नैंसी
नैंसी मूलत: रांची की रहनेवाली हैं और इसी कारण नैंसी की पढ़ाई बचपन में लिटिल इंग्लिश स्कूल से शुरू हुई. उनकी दसवीं की पढ़ाई लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल से हुई. उन्होंने 96 प्रतिशत अंक लाकर मैट्रिक में सीटी टॉप किया था. वहीं 12वीं की पढ़ाई जेवीएम श्यामली से की. उसके बाद उन्होंने बीआइटी मेसरा से बी-टेक किया.

15 लाख का पैकेज छोड़ चुकी हैं नैंसी
बी-टेक की पढ़ाई के बाद नैंसी दिल्ली चली गयीं. दिल्ली के गुड़गांव में टेलीकॉम कंपनी में 15 लाख के पैकेज पर काम करने लगीं, लेकिन मां का सपना हमेशा उनकी जेहन में रहता था. इस कारण छह माह में ही कंपनी से रिजाइन कर वह रांची लौट आयीं. घर पर ही रह कर यूपीएससी की तैयारी में लग गयीं. इस तैयारी में उनके पापा के साथ-साथ पापा के दोस्तों ने भी पूरी मदद की. वहीं उनके बड़े भाई श्वेताभ सहाय, जो आज गुड़गांव में एक कंपनी में कार्यरत हैं. उन्होंने भी बहन के सपने को पूरा करने में सहयोग किया.

यूपीएससी परीक्षा में 36वां रैंक
सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी के बाद वर्ष 2013 में यूपीएससी की परीक्षा में बैठी. वर्ष 2014 में रिजल्ट आया. जिसमें 36वां रैंक उन्होंने हासिल किया. वे ट्रेनी के रूप में चाईबासा में पदस्थापित हुईं. चाईबासा के उपायुक्तअबु बकर सिद्दीकी के सानिध्य में उन्हें सीखने का मौका मिला. उसके बाद उन्हें मेदिनीनगर भेज दिया गया. वहां उन्होंने उपायुक्त अमीत कुमार से काफी कुछ सीखा. ट्रेनिंग की अवधि खत्म होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग साहिबगंज डीडीसी के रूप में हुई.

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साहिबगंज से है पुराना लगाव
डीडीसी नैंसी सहाय के नाना एसडी झा बिहार के समय वन विभाग में पदाधिकारी के रूप में साहिबगंज में कार्यरत थे. वहीं दादा केके सहाय भी वन विभाग में ही डीएफओ थे. इस कारण साहिबगंज से उनका पुराना लगाव रहा है. उनके पति वरुण रंजन भी आइएएस अधिकारी हैं, जो फिलहाल दुमका में पदस्थापित हैं.

24 महिला किसानों के साथ गयीं इजरायल
नैंसी विदेश यात्रा भी कर चुकी हैं. कृषि में उन्नत तकनीक सीखने के लिए राज्य सरकार ने जनवरी, 2019 में 24 महिला किसानों को इजरायल भेजा था. इन महिलाओं के साथ नैंसी सहाय भी इजरायल गयी थीं.

पंछी साड़ी ने बढ़ाया मान
आदिवासियों व उनकी संस्कृति से नैंसी सहाय को बेहद लगाव रहा है. यही कारण है कि वह संताल परगना की संस्कृति में रच-बस सी गयी हैं. अभी हाल ही में राजमहल में संपन्न हुए माघी मेले में वह संताली पोशाक पंछी साड़ी पहन कर गयीं, जो आदिवासी समुदाय में काफी चर्चा का विषय रहा.

महिलाएं सक्षम और मजबूत बनें : नैंसी सहाय
डीडीसी नैंसी सहाय कहती हैं कि महिला नौकरी करे. अगर नौकरी नहीं भी मिलती है, तो घरों के हर निर्णय लेने के लिए सक्षम और मजबूत बने, ताकि महिलाओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो. आज वो जो कुछ भी हैं, अपनी मेहनत, लगन और अपने दादा केके सहाय, दादी कृष्णा कुमारी, मां राजलक्ष्मी सहाय, पिता प्रकाश सहाय और बड़े भाई श्वेताभ सहाय के आशीर्वाद की बदौलत हैं. मां की इच्छा और उनके सपने को पूरा करके आज वे गौरवान्वित महसूस कर रही हैं.