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  • Sep 18 2018 3:14PM

अब बहुरेंगे झारखंड के कुम्हारों के दिन

अब बहुरेंगे झारखंड के कुम्हारों के दिन

पंचायतनामा डेस्क

झारखंड के कुम्हारों के दिन अब जल्द बहुरेंगे. तकनीकी प्रशिक्षण के बाद उन्हें इलेक्ट्रिक चाक समेत अन्य कीट अनुदान पर दिये जायेंगे, ताकि वो स्वरोजगार से जुड़ कर मिट्टी के आधुनिक सामान बना सकें. इससे मिट्टी के सामानों की अच्छी बिक्री होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. इसके साथ ही इस पेशे में नयी जान भी आयेगी. झारखंड माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्रीचंद प्रजापति से बातचीत

विलुप्त प्राय पेशे को किया जा रहा पुनर्जीवित
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में कुम्हारों के उत्थान के लिए बोर्ड लगातार प्रयासरत है. विलुप्त प्राय पेशे को पुनर्जीवित किया जा रहा है. बुनियादी सुविधाएं बहाल कर एक माह में तकनीकी प्रशिक्षण का कार्य शुरू कर दिया जायेगा. इसके लिए उत्तर प्रदेश के खुरजा व गुजरात से विशेषज्ञ बुलाये जायेंगे. इनके द्वारा मास्टर ट्रेनर तैयार किया जायेगा, जो विभिन्न जिलों में जाकर कुम्हारों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करेंगे. 30-50 लोगों के बैच को 15-30 दिनों का प्रशिक्षण मिलेगा. प्रमाणपत्र के साथ-साथ कुम्हारों को आधुनिक मशीनें व कीट 80 फीसदी अनुदान पर दिया जायेगा, ताकि वो स्वरोजगार से जुड़कर बेहतर उत्पादन कर सकें और अपनी आर्थिक स्थिति में बदलाव ला सकें. इससे काम की तलाश में बाहर पलायन करने पर मजबूर लोग घर में रहकर माटी का काम कर सकेंगे.

कम मेहनत में अच्छी कीमत
आधुनिकता के साथ-साथ पेशे को बाजार के अनुरूप ढालने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी है. इससे कुम्हारों को कम मेहनत करनी होगी और अच्छी कीमत भी मिल जायेगी. देश ही नहीं विदेश में भी मिट्टी के सामानों की अधिक मांग है. इसके उपयोग से लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा. प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगायी जा रही है. ऐसे में मिट्टी के सामानों की मांग बढ़ेगी. अब कुल्हड़ की चाह लोगों को भाने लगी है. बोर्ड आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए कुम्हारों को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर दे रहा है.

मुद्रा लोन भी मिलेगा
पैसे की जरूरत को देखते हुए शिल्पकारों को मुद्रा योजना से जोड़ा जायेगा, ताकि बड़े कार्यों में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े.

देश-विदेश में होगा निर्यात
कुम्हारों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जायेगा. मुख्यमंत्री ने झारक्राफ्ट व खादी बोर्ड के आउटलेट्स में मिट्टी के उत्पादों को बिक्री करने का निर्देश दिया गया. इतना ही नहीं, स्थानीय बाजार व जिला परिषद व नगर पालिका द्वारा निर्मित मार्केट कॉम्प्लेक्स में दुकान की सुविधा दी जायेगी.

लंबे संघर्ष के बाद बोर्ड का हुआ गठन
17 साल के लंबे संघर्ष के बाद झारखंड माटी कला बोर्ड का गठन हुआ. वर्ष 2000 में जमशेदपुर के प्रजापति भवन में झारखंड प्रजापति (कुम्हार) महासंघ का गठन हुआ था और प्रदेश कार्यकारिणी गठित हुई थी. इसके बाद वर्ष 2001 में मोरहाबादी, रांची में विशाल रैली आयोजित की गयी थी, जिसमें 12 सूत्री मांग सौंपी गयी थी. इनमें कुम्हारों को एसटी का दर्जा देने व माटी कला बोर्ड का गठन करने की मांग की गयी थी. राज्य निर्माण से अबतक के सभी मुख्यमंत्रियों को मांग पत्र सौंपा गया था. सभी ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने माटी कला बोर्ड का गठन कर कुम्हार समाज की सुध ली. दम तोड़ती देसी विधा को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने 31 मई 2017 को झारखंड माटी कला बोर्ड का गठन कर कुम्हार समाज को सौगात दी.