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  • Jun 18 2019 5:01PM

चूना और खाद का बेहतर विकल्प है टेफ्रोशिया का पौधा डॉ सुशांतो कुमार नायक मृदा वैज्ञानिक, आइसीएआर

चूना और खाद का बेहतर विकल्प है टेफ्रोशिया का पौधा डॉ सुशांतो कुमार नायक मृदा वैज्ञानिक, आइसीएआर

पवन कुमार 

झारखंड के किसान खरीफ फसल लगाने की तैयारी में लग गये हैं. अच्छी फसल पाने के लिए सबसे जरूरी चीज है मिट्टी. इसलिए खेत तैयार करते समय विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि पैदावार अच्छी हो और फसल में रोग और कीट का प्रभाव न हो. बारिश के मौसम में धान के अलावा दलहन, तिलहन और सब्जी की खेती होती है. धान की खेती के लिए निचली जमीन सबसे उपयुक्त होती है. दलहन, तिलहन और सब्जी की खेती के लिए ऊपरी जमीन या टांड़ उपयुक्त होता है. इसके अलावा मध्यम जमीन पर भी कम समय में तैयार होनेवाले धान की खेती की जा सकती है. खेत को तैयार करने के लिए पहली बारिश के बाद एक बार जुताई करके खेत में धइचा का बीज डाल दें. यह बीज प्रखंड कार्यालय से मिलता है. 15 से 20 दिन में धइचा एक फीट का हो जाता है. धइचा के एक फीट के होने के बाद दोबारा से अच्छे से खेत की जुताई करें, ताकि धइचा का पौधा जमीन में दब जाये. 12-15 दिनों में धइचा सड़ कर हरी खाद बन जाती है, जो खेत में नाइट्रोजन की कमी को दूर करता है. किसान दलहन की खेती करते समय हमेशा यह ध्यान रखें कि ऊपरी जमीन में दलहन की खेती करते समय खेत में चूना जरूर डालें, क्योंकि ऊपरी जमीन में पीएच की मात्रा कम होती है. 300 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर पर खेत में चूना डालना चाहिए. टेफ्रोशिया का पौधा खेतों में चूना और खाद का बेहतर विकल्प है, जो पूर्ण जैविक होता है.

चूना और एनपीके डालने की जरूरत नहीं
टेफ्रोशिया एक प्रकार का पौधा है, जिसे खेत की मेड़ पर लगाया जाता है. जब पौधा बड़ा होता है, तो तना वाला भाग को काट कर पत्ता सहित खेत में डाल दिया जाता है, जो मिट्टी के लिए पोषक तत्व का कार्य करता है. 16 टन प्रति हेक्टेयर की दर से टेफ्रोशिया को खेत में डाला जाता है. इससे खेत में चूना और एनपीके डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके पौधे मेड़ से मिट्टी के कटाव को रोकते हैं. इसे जानवर भी नहीं खाते हैं. इस पौधे का बीज किसान रांची स्थित आइसीएआर, प्लांडू से खरीद सकते हैं. इसके अलावा खूंटी के गुफ्फू और मुरहू के आस-पास के गांवों के किसान टेफ्रोशिया की खेती करते हैं, वहां से भी बीज मिल सकता है. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए मृदा वैज्ञानिक डॉ सुशांतो नायक से उनके मोबाइल नंबर 8092777137 पर भी संपर्क कर सकते हैं.

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इन बातों का रखें ध्यान
एक बार मिट्टी जांच कराने के बाद तीन साल तक मिट्टी की जांच कराना जरूरी नहीं है. अगर किसी कारण से मिट्टी की जांच नहीं करा पाये हैं, तो निर्देशित मापदंड के अनुसार खेत में यूरिया, डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए. जितना अधिक हो सके खेत में गोबर खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. खेत के मेड़ को कम से कम एक फीट ऊंचा बनाना चाहिए, ताकि पानी का जमाव अच्छे तरीके से हो सके.

इस मात्रा में दें खाद
अगर मिट्टी की जांच नहीं करा पाये हैं, तो किसान इस मात्रा में खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. मात्रा प्रति हेक्टेयर किलोग्राम में है.

फसल                             नाइट्रोजन            फास्फोरस             पोटैशियम
धान (निचली जमीन)                 120                      60                       40
धान (मध्यम जमीन)                    80                      40                        20
धान (ऊपरी जमीन)                    40                      20                        20
अरहर                                     25                      50                        25
उरद                                       25                       50                       25
चना                                       20                       50                        25
मकई                                    120                       60                        40