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  • Feb 1 2019 6:58PM

बाल विवाह को लेकर जागरूकता से बदल रही ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर

बाल विवाह को लेकर जागरूकता से बदल रही ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर

पंचायतनामा डेस्क

तीन साल पहले जब वह रांची जिले के सुदूर गांवों में जाती थीं, तो 18 साल से पहले बच्चियों की शादी सामान्य बात थी. यह कानूनी अपराध है. ग्रामीणों को इसकी जानकारी भी नहीं थी. बेटी कुछ पढ़-लिख गयी और थोड़ी बड़ी हो गयी, तो लोग उसकी शादी करा दिया करते थे. बिटिया की जल्द शादी उनकी प्राथमिकता होती थी. समय के साथ जागरूकता बढ़ी है. अब गांवों में भी लोग जागरूक होने लगे हैं. बेटियां भी अब जल्द विवाह को लेकर मुखर हो गयी हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है

माता-पिता की काउंसेलिंग का दिखा असर
शुरुआत के दिनों में लड़कियों के माता-पिता की काउंसेलिंग की गयी. उन्हें उनके शादी के दिनों की याद ताजा करायी. बाल विवाह से हुए नुकसान की जानकारी दी गयी और उन्होंने स्वीकारा कि कम उम्र में शादी से उन्हें क्या-क्या परेशानी झेलनी पड़ी. आखिरकार उनकी आंखें खुलीं और उन्होंने कहना शुरू किया कि अब वो अपनी बिटिया या आस-पास में किसी मासूम का बाल विवाह नहीं होने देंगे. इसका इलाके में असर भी दिखने लगा.

जागरूकता से बाल विवाह में आ रही है कमी
प्रेम विवाह, पंचायत व सामाजिक दबाव के कारण भी कई बार कम उम्र में शादियां होती थीं. पहला रिश्ता, भगवान बराबर होने की सोच के कारण भी लोग बच्चों के विवाह से इनकार नहीं कर पाते थे. लोगों में जागरूकता के बाद इसमें काफी कमी आयी है. अब प्रेमी जोड़े भी कानूनी उम्र तक इंतजार कर शादी करने लगे हैं. बेटियां भी जल्द शादी की बजाए पहले पढ़ना चाह रही हैं. किशोरी मंडल (15-18 वर्ष की लड़कियां) और 19 प्लस यूथ (लड़का एवं लड़की) की टीम बाल विवाह रोकने में अहम भूमिका निभा रही है.