rti rts

  • Mar 18 2019 6:34PM

बचपन बचाइए, झारखंड में 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित

बचपन बचाइए,  झारखंड में 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित

पंचायतनामा डेस्क

झारखंड में बच्चों की स्थिति भयावह है. यहां 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं. अधिकतर के माता-पिता भी कुपोषित हैं. मनरेगा में किसी को 100 दिनों का रोजगार नहीं मिला. काम के अभाव में लोग पलायन कर जाते हैं. शुद्ध पेयजल का अभाव कुपोषण की सबसे बड़ी वजह है. बच्चे शासन की प्राथमिकता में भी नहीं हैं. ऐसे में बाल अधिकारों के संरक्षण में मीडिया की भूमिका अहम है. वरिष्ठ पत्रकार मधुकर ने ये बातें कहीं. सेव द चिल्ड्रेन एवं वर्ल्ड विजन इंडिया की ओर से बाल अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए रांची के करमटोली स्थित प्रेस क्लब में मीडिया मीट का आयोजन किया गया.

हाशिए पर बच्चों के मुद्दे
वरिष्ठ पत्रकार सुधीर पाल ने कहा कि झारखंड में खोजी पत्रकारिता व विश्वसनीय डाटा का अभाव है. बच्चों के मुद्दों पर शासन और सियासी पार्टियां भी गंभीर नहीं हैं. ऐसे में बच्चों के अधिकारों से जुड़े मसले को प्राथमिकता देकर मीडिया बचपन सुरक्षित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

सकारात्मक खबरों को तरजीह मिले
सेव द चिल्ड्रन के महाप्रबंधक(मीडिया संचार) देवेंद्र सिंह टॉक ने कहा कि बच्चों से जुड़ी खबरें करते समय माता-पिता या अभिभावक की सहमति व उपस्थिति जरूरी है. संवेदनशील होकर खबरें लिखी जायें और नकारात्मक की बजाय सकारात्मक खबरों को तरजीह दी जाये, तो सुरक्षित बचपन का माहौल तैयार किया जा सकता है. पिछले 100 साल से काम करने के बावजूद अभी भी काफी कुछ करने की गुंजाइश है. ऐसे में संजीदगी से बच्चों के लिए काम करना होगा. श्री टॉक ने कहा कि स्ट्रीट चिल्ड्रेन के लिए लॉड्स में क्रिकेट वर्ल्ड कप आयोजित होगा. इसमें भारत से दो टीमें होंगी. सौरभ गांगुली ब्रांड एंबेसडर हैं. कोलकाता में इसकी प्रैक्टिस हो रही है.

आंकड़े व जमीनी हकीकत में काफी अंतर
सहायक कार्यक्रम प्रबंधक संजय कुमार कहते हैं कि झारखंड में सरकारी आंकड़े व जमीनी हकीकत में काफी अंतर है. आंकड़ों में सेहत में सुधार दिखता है, लेकिन गांवों में स्वास्थ्य की बदतर हालत हैरत में डाल देती है. जागरूकता का असर है कि लड़कियां अब बाल विवाह का विरोध कर रही हैं.

सुरक्षित बचपन के लिए सजगता जरूरी
वर्ल्ड विजन इंडिया के डॉ अनंगदेव सिंह कहते हैं कि हर दूसरा बच्चा बाल शोषण का शिकार है, लेकिन अधिकतर मामले में वो बोल नहीं पाते. 44 फीसदी परिवार अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित महसूस नहीं करता. सुरक्षित बचपन के लिए बच्चों के मुद्दे पर काफी सजग होने की जरूरत है.

सामाजिक जागरूकता में मीडिया का रोल अहम
सेव द चिल्ड्रेन की एसीसी को-ऑर्डिनेटर सौमी हलदर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ही बाल अधिकारों की रक्षा की जा सकती है. सामाजिक जागरूकता को लेकर मीडिया इसमें अहम रोल निभा सकता है.

बिटिया रूमी का जज्बा देखिए
अशोका फाउंडेशन फेलो बाल चैंपियन रूमी कुमारी ने कहा कि वह ट्रैफिकिंग की शिकार हुईं. अपना बाल विवाह रोकीं. आखिरकार आगे बढ़ने की जिद से आज बीए की पढ़ाई कर वह आत्मनिर्भर बन गयी हैं. वह रांची के बुढ़मू की हैं. गांव में गरीबी व अशिक्षा के कारण कई सामाजिक कुरीतियां पनप रही हैं. छह बहनों में अधिकतर का बाल विवाह हुआ. बड़ी बहन की शादी तो पांच साल में ही हो गयी, जब वह ठीक से मां भी नहीं बोल पाती होंगी. गांव से गरीबी और अशिक्षा दूर होगी, तभी बाल विवाह, ट्रैफिकिंग, कुपोषण समेत अन्य समस्याएं खत्म होंगी. वह लगातार ग्रामीणों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक कर रही हैं.

बचपन बचाइए
झारखंड में कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक है. 2011 की जनगणना के अनुसार, 5-18 वर्ष के करीब 9 लाख 95 हजार 771 बच्चे बाल मजदूरी करने पर मजबूर हैं. पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 47.7 फीसदी है.