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  • Jul 4 2019 11:51AM

बारिश के पानी को ऐसे जमा करें

बारिश के पानी को ऐसे जमा करें

पंचायतनामा टीम

पानी की समस्या से हर कोई जूझ रहा है. मॉनसून आते ही इस समस्या से राहत तो मिलती है, लेकिन बारिश का पानी यूं ही बर्बाद हो जाता है. इस पानी को रोकने की भरसक कोशिश हो रही है. नीति आयोग ने जून 2018 में देश में पानी की समस्या की बात स्वीकारी है. बारिश के पानी को रोकने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग कारगर तकनीक है. इसी को ध्यान में रखते हुए गिरिडीह जिला स्थित पचंबा गौशाला समिति ने बारिश के पानी को संजो कर रखने के बेहतर प्रयास शुरू किये हैं. एक प्लास्टिक ड्रम के सहारे पानी को संजो कर रखने की इस तकनीक में जहां खर्च तकरीबन तीन हजार रुपये तक आते हैं, वहीं कम जगह में भी वाटर हार्वेस्टिंग की इस तकनीक का बेहतर उपयोग होता है.

ऐसे जमा होता है बारिश का पानी
इस तकनीक को लगाने के लिए जमीन में पांच फीट गहरा और पांच फीट चौड़ा गड्डा खोदा जाता है. प्लास्टिक ड्रम में हर तरफ छेद किया जाता है. गड्ढे के तल में ईंट रखा जाता है. उसके ऊपर ड्रम को रखा जाता है. साथ ही बचे किनारों में बालू और ईंट के टुकड़े भरे जाते हैं. इसके ऊपर से प्लास्टिक से ढका जाता है, ताकि मिट्टी गड्ढे में नहीं जा सके. इसके बाद ड्रम के ऊपर पाइप फिट किया जाता है, जो सीधे छत से जुड़ा होता है. इसके जरिये पानी सीधे छत से ड्रम में आ जाता है.

इस साल 200 घरों में सिस्टम लगाने का लक्ष्य
गिरिडीह के सामाजिक कार्यकर्ता बंटी साव ने बताया कि नयी वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक में तीन हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन ग्राहकों से 1500 रुपये ही लिए जाते हैं. बाकी 1500 रुपये का खर्च गोशाला समिति द्वारा वहन किया जाता है. अभी तक 8-10 घरों में इस सिस्टम को लगा दिया गया है. अगर 90 दिन बारिश होती है और एक हजार स्क्वायर फीट के पानी को ड्रम में डाला जाता है, तो एक हजार लीटर पानी प्रतिदिन और 90 हजार लीटर पानी सालाना एक घर से संरक्षित किया जा सकता है, जो रिचार्ज करने के लिए काफी है. इस साल 200 घरों में इस सिस्टम को लगाने का लक्ष्य है.