maati k rang

  • Mar 16 2020 4:47PM

जयश्री इंदवार की सोहराई पेंटिंग से अब बोल रहीं दीवारें

जयश्री इंदवार की सोहराई पेंटिंग से अब बोल रहीं दीवारें

पंचायतनामा टीम

कहते हैं कि दीवारें खामोश रहती हैंसीमा तय करती हैंबांटती हैंलेकिन जयश्री इंदवार की सोहराई पेंटिंग से अब दीवारें बोल रही हैंझारखंड की कला-संस्कृति का पाठ पढ़ा रही हैंभूली-बिसरी आदिवासी संस्कृति से रू--रू कराकर लोगों को जोड़ रही हैंइतना ही नहीं करीब 15महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ रही हैं

लोहरदगा जिले की जयश्री इंदवार सोहराई पेंटिंग के क्षेत्र में सुपरिचित नाम है. इनके कारण झारखंड के सरकारी कार्यालयों की दीवारें और रेलवे के प्लेटफॉर्म समेत अन्य जगहों की दीवारें चमक उठी हैं. आप पास से गुजरेंगे, तो इनकी तस्वीर आपको एक बार ठहर कर देखने के लिए मजबूर कर देंगी. करीब 15 महिलाओं को हुनरमंद बनाकर वह रोजगार भी दे रही हैं.

स्तंभ से शुरुआत, अब दीवारों पर सोहराई
जयश्री फिलहाल रांची में ही रहती हैं. वह स्नातक तक पढ़ाई की हैं. उन्हें बचपन से ही सिलाई-कढ़ाई और पेंटिंग का शौक था. गरीब महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने स्तंभ नामक संस्था की शुरूआत वर्ष 2007 में की थी. इसके जरिये महिलाओं को प्रशिक्षण देने लगीं. इसी दौरान झारक्राफ्ट से जुड़ीं और वर्ष 2009 में सोहराई कला का प्रशिक्षण लीं. पेपर से कपड़े पर पेंटिंग करने लगीं. झारक्राफ्ट में साड़ी, कुरती, सूट पर बनाये गये सोहराई आर्ट की काफी सराहना हुई.

सीएमओ की दीवारों पर जयश्री की पेंटिंग
वर्ष 2011 में उनकी संस्था स्तंभ को झारक्राफ्ट से काम मिलना शुरू हुआ. स्टॉल पर सोहराई पेंटिंग का काम मिलने लगा. इस दौरान उनके साथ 20-25 महिलाएं थीं, लेकिन 2014-15 में काम बिल्कुल ठप रहा. तभी प्रदर्शनी लगाना शुरू किया. इसी दौरान उन्होंने तत्कालीन सीएम रघुवर दास के प्रधान सचिव संजय कुमार से मुलाकात की. उन्होंने रांची में मुख्यमंत्री कार्यालय की दीवारों पर सोहराई पेंटिंग कर दिखाने को कहा, जिसे देखकर वह काफी प्रसन्न हुए. इसके बाद सूचना भवन, रांची नगर निगम, कई चौक चौराहे समेत अन्य कई कार्यालयों की दीवारों पर पेंटिंग कीं.

दिल्ली के झारखंड भवन में सोहराई
दिल्ली के झारखंड भवन में मार्च, 2016 में इन्हें सोहराई कला के प्रदर्शन का मौका मिला. आज यहां सोहराई कला झारखंड की पहचान बन गयी है.

रेलवे स्टेशनों की बढ़ी खूबसूरती
गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, चाईबासा और बोकारो में काम करने के बाद वर्ष 2017 में वह रेलवे से जुड़ीं. साउथ इस्टर्न रेलवे के कई रेलवे स्टेशनों की तस्वीर बदल दीं हैं.

अब वेदर प्रूफ पेंट
इस कला में पहले मिट्टी (दूधिया मिट्टी, हरी पत्तियां व चारकोल) का उपयोग होता था. टिकाऊ बनाने के लिए अब वेदर प्रूफ पेंट का उपयोग किया जाता है.

सम्मान
प्रभात खबर अपराजिता सम्मान, रेल मंत्रालय, सीसीएल, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं झारखंड कल्चरल आर्टिस्ट एसोसिएशन ने इन्हें सम्मानित किया है.

सरकार सहयोग करे, तो मिलेगी नयी ऊंचाई : जयश्री इंदवार
जयश्री इंदवार कहती हैं कि कभी घर के आंगन और दीवारों तक सीमित रहने वाली सोहराई कला आज झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और दिल्ली तक पहुंच गयी है. ये कपड़ा, हैंडमेड शीट और दीवारों पर प्रदर्शित की जाती है. झारक्राफ्ट और सरकार का अपेक्षित सहयोग मिले, तो वह सोहराई को नयी ऊंचाई पर ले जायेंगी.