kheti bari

  • Nov 25 2019 1:03PM

वैज्ञानिक तरीके से होगी रबी की अच्छी उपज

वैज्ञानिक तरीके से होगी रबी की अच्छी उपज

गुरुस्वरूप मिश्रा 

रबी के मौसम में झारखंड में गेहूं एवं मक्का के साथ-साथ दलहन और तिलहन फसलों की ‍खेती की जाती है. दलहन फसलों में चना, मसूर, मटर समेत अन्य दलहनी फसलों का उत्पादन किया जाता है, जबकि तिलहन फसलों में किसान राई, सरसों, तीसी, कुसुम एवं सूर्यमुखी की खेती करते हैं. राज्य के कई प्रगतिशील किसान अच्छा उत्पादन कर रहे हैं. वक्त बदला, लेकिन कई किसान अभी भी तकनीकी रूप से खुद को नहीं बदल सके. जागरूकता के अभाव में अभी भी वे परंपरागत तरीके से ही खेती कर रहे हैं. इस कारण उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है. परंपरागत तरीके से खेती करने की जगह वे वैज्ञानिक तरीके से रबी की खेती करें, तो अच्छी आमदनी से उनका जीवन खुशहाल हो सकता है

उन्नत कृषि तकनीक से किसानों की अच्छी आमदनी कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की हर कवायद की जा रही है. मिट्टी जांच से लेकर किसानों को हर स्तर पर सहयोग की व्यवस्था है. किसानों को तकनीकी रूप से जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि उन्नत कृषि तकनीक के जरिये उनके खेत सोना उगल सकें. इसके रिजल्ट भी दिखने लगे हैं. प्रगतिशील किसान खेती-बारी में नयी इबारत लिख रहे हैं. इससे अन्य किसान प्रेरित हो रहे हैं.

तभी मिलेगी अच्छी उपज

अच्छी आमदनी के लिए अच्छी उपज तभी मिलेगी, जब किसान थोड़ी सी सावधानी बरतेंगे. खेती रबी की हो या खरीफ की, मिट्टी की जांच जरूर करायें. दलहनी फसलों की खेती सामान्यत: अक्तूबर से मध्य दिसंबर तक की जाती है. मिट्टी या जमीन की प्रकृति के अनुसार उचित फसल लगायें. अच्छे किस्म के बीज को बीजोपचार के बाद ही लगायें. बीजे की बुआई में दो पौधों की दूरी और निकाई-गुड़ाई का ध्यान रखें. पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व जरूर मिले, तभी अच्छी वृद्धि होगी. सिंचाई की व्यवस्था हो. कहने का आशय ये है कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करनी होगी.

फायदेमंद है चूना

झारखंड की मिट्टी क्षारीय है. इस कारण दलहनी फसलों की खेती के दौरान किसान पीएच का मान बढ़ाने के लिए चूना जरूर डालें. दलहनी फसलों में जुताई के बाद लाइन में चूना डालना ज्यादा फायदेमंद है.

मिलेगी जानकारी

किसान विस्तृत जानकारी के लिए रांची के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके (रांची) और भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र पूर्वी प्रक्षेत्र (आईसीएआर), प्लांडू (रांची) के वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं.

दलहनी फसलों का उत्पादन 616.89 हजार टन हुआ

झारखंड में रबी फसलों के पिछले कुछ वर्षों में आच्छादन, उत्पादन और उत्पादकता पर एक नजर डालते हैं. वित्तीय वर्ष 2014-15 में चना, मसूर, मटर समेत अन्य दलहनी फसलें 248.97 हजार हेक्टेयर, जबकि गेहूं व मक्का समेत दलहनी फसलें 426.32 हजार हेक्टेयर में लगी थीं. सूर्यमुखी समेत अन्य तिलहनी फसलें 231.31 हजार हेक्टेयर में लगी थीं. गेहूं व मक्का समेत कुल दलहनी फसलों का उत्पादन 616.89 हजार टन हुआ, जबकि तिहलनी फसलों का उत्पादन 149.94 हजार टन हुआ.

11.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल लगाने का लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2018-19 में राज्य में 11.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि 7.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल लगायी गयी. इस तरह से देखें, तो लक्ष्य के अनुरूप 64 फीसदी क्षेत्र में ही रबी फसल लग सकी. रबी फसलों में गेहूं व मक्का के अलावा दलहनी एवं तिलहनी फसलों का लक्ष्य व आच्छादन के साथ-साथ दलहन में चना, मसूर, मटर एवं अन्य दलहनी फसलें एवं तिलहनी फसलों में राई/सरसों, तीसी, कुसुम एवं सूर्यमुखी के आंकड़े दिये जा रहे हैं. कुल योग यानी गेहूं, मक्का के साथ-साथ तिलहन एवं दलहनी फसलों के लगाने का लक्ष्य एवं आच्छादन शामिल है.