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  • Nov 8 2019 6:33PM

किसानों के लिए बन गये हैं प्रेरणास्रोत आधुनिक तकनीक से खेती, लाखों की कमाई

किसानों के लिए बन गये हैं प्रेरणास्रोत  आधुनिक तकनीक से खेती, लाखों की कमाई

विप्लव सिंह 

प्रखंड: जरीडीह

जिला: बाकारो

एक तरफ जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से खेती में घाटे के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या करने अथवा कर्ज में दबे होने की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे प्रगतिशील किसान भी हैं, जो सूझबूझ के साथ खेती कर लाखों रुपये सालाना कमा रहे हैं. एक तरफ कम आय के कारण कई किसान खेती छोड़ नौकरी की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं बोकारो जिला अंतर्गत जरीडीह प्रखंड की बाराडीह पंचायत स्थित बिदरीटांड़ गांव के किसान राजीव रंजन सोरेन किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं. पीजी तक की पढ़ाई कर राजीव रंजन ने जरीडीह प्रखंड में रोजगार सेवक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन कम मानदेय के कारण उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी. उन्हें अपने पिता सोबरण सोरेन से खेती करने की प्रेरणा मिली. पिता की मौत के बाद राजीव अपनी पारिवारिक जमीन पर तरह-तरह की खेती कर अपनी अलग पहचान बनाने में जुट गये. आज वह चार-पांच लोगों को रोजगार दे रहे हैं. इसमें उनका साथ दिया उनकी पत्नी गुड़िया देवी ने. गुड़िया देवी ने भी उच्च शिक्षा प्राप्त की है

आधुनिक खेती से बढ़ी आमदनी
राजीव के पास अपनी तीन एकड़ जमीन थी. उन्होंने गेहूं की खेती शुरू की, लेकिन अच्छा मुनाफा नहीं हो सका. वर्ष 2014 में सिंचाई विभाग के रमेश से उनकी मुलाकात हुई. रमेश ने राजीव को पपीते की खेती करने का सुझाव दिया. राजीव को इस बात का आभास हो गया कि परंपरागत खेती की बजाय आधुनिक खेती में ही भविष्य बेहतर है. उन्होंने 1 हजार पपीते के पौधे लगाये. शुरू के सात महीने में लगा की आमदनी घट रही है, लेकिन जब पपीते के फलों की बिक्री शुरू हुई, तो लगा कि अब मेहनत का फल मिलने लगा है. राजीव की पत्नी ने मुर्गी पालन करने का सुझाव दिया. 10 डिसमिल जमीन पर मुर्गीफाॅर्म बनाया. मुर्गीपालन से महीने में 30 से 40 हजार रुपये का फायदा होने लगा. अब धीरे-धीरे एक एकड़ जमीन में नींबू व अनार के पौधे भी लगाये हैं.

सरकारी लाभ मिले, तो मछली व बत्तख पालन पर भी होगा जोर : राजीव रंजन सोरेन
प्रगतिशील किसान राजीव रंजन सोरेन का कहना है कि अगर किसान सूझबूझ से काम करें, तो पपीते की खेती से कम से कम पानी की खपत करते हुए महीने में 30 से 35 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की आमदनी हो सकती है. वह पपीते को गांव से 20 किलोमीटर दूर बोकारो की मंडी में बेचते हैं. राजीव के मुताबिक बोकारो में फलों की मांग अधिक होने के कारण दूसरी जगह बेचने की जरूरत ही नहीं होती. इसके अलावा राजीव पांच एकड़ भूमि पर तालाब बना कर मछली व बत्तख पालन करने की तैयारी कर रहे हैं. राजीव ने कहा कि अगर सरकार सब्सिडी योजनाओं का लाभ दे, तो बागवानी समेत अन्य योजनाओं में बेहतर किया जा सकता है.

खेती-किसानी से जुड़ें आदिवासी महिला : गुड़िया देवी
प्रगतिशील किसान राजीव रंजन सोरेन की पत्नी गुड़िया देवी कहती हैं कि अगर ग्रामीण महिलाएं अपने घर में ही सिर्फ सब्जी की खेती करें, तो हर महीने पांच से सात हजार रुपये की आमदनी हो सकती है. बस जरूरत है ग्रामीण महिलाओं को प्रोत्साहित करने की. गुड़िया देवी एक महिला समूह भी चला रही हैं, जो आदिवासी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. खेती-किसानी की ओर आदिवासी महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए गुड़िया भरसक प्रयास कर रही हैं.