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  • Nov 8 2019 6:39PM

देसी तकनीक से स्टोरेज कर पा रहे टमाटर की अच्छी कीमत

देसी तकनीक से स्टोरेज कर पा रहे टमाटर की अच्छी कीमत

पंचायतनामा टीम

 

जिला: रांची

रांची जिला अंतर्गत मांडर प्रखंड के किसान देसी तकनीक से टमाटर का स्टोरेज कर रहे हैं. यह पुरानी पद्धति उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखी है. प्रखंड के कई गांवों के किसान इस तकनीक का उपयोग करते हैं और ऑफ सीजन में टमाटर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते हैं. प्रखंड अतंर्गत कंजिया गांव के किसान इस तकनीक का प्रयोग करते हैं. कंजिया, बूढ़ा खूखरा, गुड़गुड़जाड़ी जैसे कई गांवों में टमाटर की खेती बहुतायत में की जाती है. टमाटर के सीजन में अक्सर ऐसा होता है कि टमाटर के दाम कम हो जाते हैं, जिससे किसानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है. कई बार किसानों को कम दामों में टमाटर को बेचना पड़ता है. पर, अब यहां के किसानों को ऐसी समस्या से दो-चार नहीं होना पड़ता है. देसी स्टोरेज तकनीक से वे टमाटर को सड़ने से बचा लेते हैं.

90 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर
कंजिया के ग्रामीणों का प्रमुख पेशा कृषि है. गांव में फूलगोभी, मटर, टमाटर, शिमला मिर्च और खीरा की खेती बहुतायत में की जाती है. सभी किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं. ड्रिप इरिगेशन से यहां कोई भी खेती नहीं करता है. सिंचाई के लिए कुएं और तालाब पर किसान निर्भर हैं. सभी किसान रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं. इसके अलावा गोबर खाद का भी इस्तेमाल करते हैं.

देसी तकनीक से स्टोरेज की जरूरत
कंजिया और आसपास के गांवों के अधिकतर किसान दोइन ( दो नंबर जमीन) में खेती करते हैं. बारिश का मौसम आते ही खेत में पानी जमा होने लगता है. इसके कारण टमाटर खेत में सड़ना शुरू हो जाता है. पौधों को भी नुकसान होने लगता है. इस वजह से किसानों को टमाटर पहले तोड़ना पड़ता है, जबकि उस समय टमाटर पके नहीं होते हैं. इसे पका कर बाजार तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने टमाटर स्टोरेज की शुरुआत की. यह सस्ती तकनीक है. किसान देसी तरीके से टमाटर का स्टोरेज कर रहे हैं.

कैसे होता है स्टोरेज
टमाटर का स्टोरेज करने के लिए किसान अपने घर के किसी एक सूखे कमरे को चुनते हैं. कमरे में नमी नहीं होनी चाहिए. पक्का या कच्चा मकान दोनों ही चल सकता है. इसके बाद कमरे में पूरा पुआल बिछा दिया जाता है. पुआल बिछाने के बाद उसके ऊपर छह इंच की मोटाई तक टमाटर रखे जाते हैं. यह टमाटर धीरे-धीरे पकता रहता है. फिर उसे बाजार में ले जाकर बेच सकते हैं.

सावधानी बरतें
जब बारिश हो रही हो, तब टमाटर नहीं तोड़ना चाहिए. तोड़ने समय यह ध्यान रखें कि टमाटर पूरी तरह सूखा हुआ हो. जिस कमरे में टमाटर का स्टोरेज कर रहे हैं, उस कमरे की छत से पानी नहीं गिरना चाहिए. सीलन भी नहीं होनी चाहिए. चूहे का प्रकोप कमरे में न हो. समय-समय पर टमाटर की जांच करनी चाहिए. सड़े टमाटर को स्टोरेज वाले रूम से हटा देना चाहिए.

टमाटर स्टोर करके बेचने में फायदा है : विश्वनाथ उरांव
किसान विश्वनाथ उरांव बताते हैं कि टमाटर स्टोर करके बेचने में काफी फायदा है. इसमें स्टोर करने की लागत नहीं आती है. जब बाजार में टमाटर की आमद कम हो जाती है और टमाटर का दाम बढ़ता है, तब हम इस टमाटर को बाजार ले जाते हैं. इस दौरान टमाटर नहीं सड़ता है और हमें बाजार के बेहतर होने के लिए समय मिल जाता है. कई वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं, पर इस पद्धति को अपनाने के बाद अब टमाटर की खेती में बचत हो रही है, मुनाफा हो रहा है.

सही समय का ध्यान रखना पड़ता है : तारुन अंसारी
किसान तारुन अंसारी भी टमाटर की खेती करते हैं और देसी तकनीक से इसका स्टोरेज भी करते हैं. तारुन बताते हैं कि इसके लिए समय का बहुत ख्याल रखना पड़ता है. एक से 15 अप्रैल तक किसान खेत में टमाटर लगा देते हैं, ताकि समय से फल तैयार हो जाये. इसके बाद जब टमाटर पकने की शुरुआत होती है, तो पकने योग्य टमाटर को तोड़ कर घर में रख देते हैं. 10 जुलाई तक पुआल बिछा कर टमाटर को घर में रख देते हैं. इस तकनीक से 60 दिन तक टमाटर को पका कर बेचते हैं.