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  • Aug 19 2019 5:05PM

जल प्रबंधन : श्रमदान से बना दिये 700 चेकडैम

जल प्रबंधन : श्रमदान से बना दिये 700 चेकडैम

पंचायतनामा टीम 

बोरिंग कर सिर्फ पानी निकाला जाये और जल का संरक्षण नहीं किया जाये, तो जल का संकट होना तय है. जल प्रबंधन को लेकर घोर लापरवाही के कारण पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं. ऐसे में रांची स्थित ओरमांझी के आरा-केरम के ग्रामीणों ने बेहतर जल प्रबंधन के जरिये देशभर में झारखंड का नाम रोशन किया है. इस गांव में डीप बोरिंग करना सख्त मना है. जंगलों की रक्षा, डोभा निर्माण और श्रमदान से झरने के पानी को लूज बोल्डर से थामकर न सिर्फ मिट्टी का कटाव रोका गया, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठाया गया है. इतना ही नहीं बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए बड़ी संख्या में ट्रेंच कम बंड (टीसीबी) का निर्माण किया गया है. अब गांव का जलस्तर पहले से बेहतर है.

भौगोलिक स्थिति है अनुकूल
आरा-केरम गांव की भौगोलिक स्थिति जल संरक्षण के अनुकूल है. जंगल-पहाड़ की तलहट्टी में बसे होने के कारण जमीन ढालू है. बारिश के मौसम में जंगल से पानी बहकर सीधा गांव के खेतों तक पहुंचता है. पहले यह पानी सीधा खेतों से होते हुए गांव से बाहर चला जाता था. जब गांव में मनरेगा के तहत कार्य शुरू हुआ, तब खाली पड़े ढलान वाली जगहों पर ट्रेंच कम बंड बनाये गये. इससे फायदा यह हुआ कि पानी सीधे नहीं बहकर गड्ढों में भरने लगा. इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने श्रमदान करके भी ट्रेंच कम बंड का निर्माण किया गया है. दो वर्षों में गांव का जलस्तर बढ़ गया है. सालोंभर किसान कुआं और डोभा के माध्यम से खेती करते हैं. डोभा को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं, पर आरा-केरम के किसानों ने सही जगह पर डोभा निर्माण कर इस मिथक को तोड़ दिया. डोभा के पानी से किसान अपने खेत को हरा-भरा रखते हैं.

लूज बोल्डर से थाम रहे झरना का पानी
आरा-केरम के ग्रामीणों का जल संरक्षण के लिए श्रमदान देश के लिए मिसाल है. झरने के पानी को थामने के लिए लूज बोल्डर के माध्यम से 700 चेकडैम बनाये गये हैं. इसके लिए पहाड़ के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया. तीन किलोमीटर तक जगह-जगह चेकडैम बनाये गये हैं. श्रमदान कर 170 लोगों ने 70 दिनों में यह काम पूरा किया. मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी के मुताबिक, जब इंजीनियर द्वारा इस चेकडैम निर्माण की लागत निकाली गयी, तो इसकी लागत करीब डेढ़ करोड़ थी. ग्रामीणों ने डेढ़ करोड़ का काम श्रमदान के जरिये कर दिया. यह पहली बार नहीं है कि ग्रामीणों ने ऐसा प्रयोग किया. इससे पहले भी ग्रामीण पहाड़ के दूसरे नाले में यह प्रयास कर चुके हैं.

टीसीबी से संरक्षित हो रहा करोड़ों लीटर पानी
जल संरक्षण के लिए आरा केरम के ग्रामीणों ने एक और अच्छी पहल की है. गांव की 60 एकड़ जमीन में ट्रेंच कम बंड (टीसीबी) का निर्माण किया. इसके लिए तीन फीट चौड़ा, तीन फीट गहरा और 12 फीट लंबा गड्ढा खोदा गया है. 50 एकड़ में मनरेगा के माध्यम से और 10 एकड़ में श्रमदान से 3000 टीसीबी बनाये गये हैं. एक दिन में अच्छी बारिश होने से प्रति गड्ढे में तीन हजार लीटर पानी का संचयन होता है. इस हिसाब से एक दिन की अच्छी बारिश में 90 लाख लीटर से अधिक पानी का संचयन होता है. पानी बचाने की मुहिम सबके लिए प्रेरणा है.