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  • Nov 8 2019 6:10PM

सोलर जलमीनार से ग्रामीणों की बुझ रही प्यास

सोलर जलमीनार से ग्रामीणों की बुझ रही प्यास

गांव में सड़क किनारे सोलर जलमीनार के पास लोगों की भीड़ लगी है. लोग जलमीनार को घेर कर खड़े हैं. एक व्यक्ति फूल और अगरबत्ती लेकर पूजा करने में लगा है. ऐसा लगता है कि यहां पर कोई पर्व मनाया जा रहा है. तभी नारियल फोड़ा जाता है. सभी को प्रसाद बांटा जाता है. मीनार में लगा स्वीच ऑन करने के बाद पाइप से पानी की तेज धार निकलने लगती है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाघरा गांव में पहली बार पेयजल की व्यवस्था की गयी है.

सोलर जलमीनार ने दिया स्थायी समाधान
घाघरा गांव में अधिकतर किसान हैं. उनके लिए जितना जरूरी पानी खेती के लिए है, उतना ही पीने के लिए भी. ग्रामीण कहते हैं कि हमारे लिए जलमीनार की पूजा किसी पर्व से कम नहीं है. पानी की समस्या जो झेलता है, वही जानता है. पहले हमें पीने का पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था. महिलाओं को काफी समय लगता था. उनके साथ बच्चे जाते थे. इससे पढ़ाई का नुकसान तो होता ही था, साथ ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी होती थीं. कोई देखनेवाला नहीं था. गांव में सोलर पैनल लगाकर जलमीनार लगायी गयी. सोलर एनर्जी के जरिये पानी की स्थायी व्यवस्था कर दी गयी. अब ग्रामीण काफी खुश हैं, क्योंकि उन्हें पानी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता है.

योजनाबद्ध तरीके से होता कार्य
सरकार ने हर वर्ग के लोगों पर ध्यान दिया. जगह और जरूरत के अनुसार नीतियां बनायी गयीं. नगर से लेकर गांव के लिए विकास का खाका तैयार किया. उद्योग, रोजगार, बिजली से लेकर पेयजल पर योजनाएं बनायी गयीं. अधिकारी से लेकर पंचायत स्तर तक टीम बनायी गयी. उन्हें जिम्मेदारी दी गयी. सीमा निर्धारित की गयी. कहीं अधिकारी को भेजा गया, तो कहीं ग्रामीणों को इसमें शामिल किया गया. उन्हें अपने अधिकार के लिए जागरूक किया गया. वे सक्रिय हुए और योजनाएं धरातल पर उतरती गयीं. कल तक जो पेयजल को लेकर सवाल कर रहे थे, वे अब नगर से लेकर सुदूर गांव तक टोलों में उपलब्ध सोलर चालित जलमीनार की सराहना कर रहे हैं. गांव में सड़क और बिजली के साथ पेयजल पर ध्यान देते हुए सोलर एनर्जी चालित जलमीनार की योजना बनायी. पंचायत से गांव की रिपोर्ट मांगी गयी. आबादी के हिसाब से जलमीनार का निर्माण किया गया. जलमीनार के लिए सिर्फ टोलों को ही नहीं, बल्कि स्कूल, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्र को सूची बनायी गयी और काम किया गया.

पेयजल की जरूरत हर जगह
अधिकारियों के मुताबिक, पेयजल की जरूरत हर जगह होती है. जितनी जरूरत घर में होती है, उतनी ही सार्वजनिक स्थलों पर भी होती है. संताल परगना से लेकर छोटानागपुर क्षेत्र में सोलर जलमीनार लोगों की प्यास बुझाने में लगी है. लातेहार जिले में अप्रैल, 2018 में जलमीनार योजना के तहत कार्य शुरू हुआ. इसमें लगभग 1200 जलमीनार का निर्माण किया गया. यह ग्रामीण इलाके से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक बनाया गया. कई गांवों में जलमीनार का निर्माण किया जा चुका है.

जल मीनारों ने दीं खुशियां
ग्रामीणों का कहना है कि पानी के लिए हमने अपने परिवार को काफी संघर्ष करते देखा है. दूर पहाड़ी के चुआं से पीने का पानी लाना पड़ता था. सुबह से ही लोग वहां जमा हो जाते थे. खेत पर जाने से पहले सबके लिए पहला काम पानी लाना ही होता था. साफ पानी की कमी से कई तरह की बीमारियां भी होती थीं. कुपोषण से बच्चे पीड़ित रहते थे. जलमीनार बनने के बाद हालात बदल रहे हैं. हमें पेयजल मिल रहा है. पानी की कीमत हम जानते हैं. जलमीनार की महत्ता जानते हैं. इसलिए सभी मिलकर इसकी हिफाजत करते हैं.

मुखिया पर है रख-रखाव की जिम्मेदारी
जलमीनार के शुरू होने के बाद इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी मुखिया पर होती है. इसकी सहायता के लिए जलसहिया होती है. वे इस बात का ध्यान रखती हैं कि जिस मकसद से जलमीनार बनाया गया है, उसका सही इस्तेमाल हो. इस पानी का उपयोग सिर्फ पीने और किचन के कार्य में होता है. सिंचाई के लिए पानी लेने की मनाही होती है. पानी की बर्बादी नहीं हो, इसका खासा ख्याल रखा जाता है. पेयजल की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सरकार द्वारा सोलर एनर्जी चालित पाइप जलापूर्ति योजना पर जोर दी गयी. गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, खूंटी और चतरा जैसे जिलों के 1800 से अधिक गांवों का चयन हुआ. इस योजना में पाइप के जरिये गांवों में जलापूर्ति की जा रही है. इसी तरह से राज्य के कई गांवों में सोलर डिवाइस के जरिये पेयजल के साथ-साथ एनर्जी की आपूर्ति भी की जा रही है.

सोलर एनर्जी पर विशेष जोर
जिस तरह से केंद्र सरकार ने सोलर एनर्जी के उपयोग पर जोर दिया,  इसे अभियान बनाते हुए आमलोगों को भी जोड़ा. इसे अपने घर और अन्य जगहों पर इस्तेमाल करने पर जोर दिया. इसके अच्छे नतीजे सामने आये. कुछ ही समय में राज्य में न्यायालय से लेकर अस्पताल, स्कूल और ऐसे ही अन्य सरकारी संस्थानों में सोलर रूफ पैनल लगाकर एनर्जी की कमी पूरी की गयी.

नवीकरणीय ऊर्जा के कई फायदे
विशेषज्ञों के मुताबिक, नवीकरणीय ऊर्जा के कई फायदे हैं. इसमें कम लागत लगती है. एक बार पैसे लगने के बाद लंबे समय तक चलता रहता है. इसमें कार्बन उत्सर्जन कम होता है. इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है. यह किसी भी ऐसी जगह पर उपयोग में लाया जा सकता है, जहां भरपूर मात्रा में सूर्य की रोशनी मिलती है. जाहिर है ग्रामीण इलाके इसके लिए बेहतर माने जाते हैं. वहां दूर-दूर तक खुली जगह होती है. सोलर पैनल लगाने के बाद दिनभर रिचार्ज होता रहता है और बिजली मिलती रहती है.

झारखंड में बिजली की समस्या न रहे, इसलिए सोलर एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है. सुदूर गांवों को लक्ष्य कर इस पर काम किया जा रहा है. सुदूर इलाकों में सोलर डिवाइस लगाकर ऊर्जा की आपूर्ति की जा रही है. इसके तहत सोलर स्टडी लैंप, सोलर होम लाइटिंग सिस्टम, सोलर पंप, सोलर स्ट्रीट लाइट और सोलर चार्जर लगा कर अंधेरा दूर किया जा रहा है. कल तक जो गांव अंधेरे में जीने को विवश थे, वे अब सोलर एनर्जी के जरिये रोशन हो रहे हैं. चतरा जिले का मदनडीह गांव जब सालों बाद सोलर एनर्जी से जगमगाया, तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने माना कि यह सब सरकार की सोच और दूरदर्शिता का ही परिणाम है.