ground zero

  • Sep 18 2019 4:18PM

साफ-सफाई को समर्पित नौ स्वतंत्रता सेनानियों का गांव

साफ-सफाई को समर्पित नौ स्वतंत्रता सेनानियों का गांव

सुमित कुमार
प्रखंड : चंदवा
जिला : लातेहार 

लातेहार जिला अंतर्गत चंदवा प्रखंड की डुमारो पंचायत आज भी देश की आजादी से जुड़ी कई स्मृतियों को संजोयी हुई है. इस पंचायत के निंद्रा, कारिटांड़, बेलगड़ा व ढोंटी गांव के नौ टानाभगतों ने आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था. उनके वंशज आज भी टानाभगत समाज के रीति-रिवाज व नियम-कानून का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं. डुमारो से सटे रांची जिले के लपरा व चट्टी के टानाभगत मिलजुल कर कार्यक्रम करते हैं. समाज के सबसे बुजुर्ग रंका राम गोइंदा उरागन ठाकुर टानाभगत कहते हैं कि हमारे पूर्वज व हमने सभी जीवों के लिए आजादी मांगी थी. यह कैसी आजादी ? लोग अब भी बेबस हैं. शहीदों के परिजनों को अब तक न्याय नहीं मिला है. उनसे ज्यादा जरूरतमंदों को इसका लाभ मिले

टाना लिपि व साफ-सफाई
सफेद कपड़े. सिर पर सफेद टोपी. सादा भोजन. मांस मदिरा व अन्य बुरी आदतें आज भी टानाभगत समुदाय को सबसे अलग करती है. मूल रूप से यह सफेद रंग के कपड़े में चरखा अंकित ध्वज की पूजा करते हैं. हर प्रसंग में ध्वज साथ लेकर चलते हैं. आज भी अतिथि सत्कार देखना है, तो टानाभगत समाज में आइये. दूब, चावल, पानी व अन्य चीजों के साथ पूजन कर अतिथियों का स्वागत करते हैं. हर घर को लिपते हैं. स्नान करने के बाद ही भोजन का रिवाज है. साफ-सफाई का जबाब नहीं है. इससे भी अद्भुत इनकी टाना लिपि है. सबसे बुजुर्ग रंका टानाभगत समेत दो-चार लोग इस लिपि का इस्तेमाल करते हैं. हर गुरुवार को हल बंदी की जाती है. इस दिन गौमाता को रोटी खिलाकर विशेष पूजा अर्चना की जाती है. आज भी निंद्रा गांव की यात्रीशाला में इनकी विशेष लिपि देखी जा सकती है.

स्मृति पट्ट में स्वतंत्रता सेनानियों की वीरगाथा
चंदवा प्रखंड में स्वतंत्रता आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भोला टानाभगत थे. ये स्वतंत्र भारत में निंद्रा के पहले मुखिया थे. 1942 के आंदोलन में ये देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के साथ हजारीबाग जेल में थे. इनके बाद बिरसा टानाभगत ने मोर्चा संभाला था. पटना फुलवारीशरीफ जेल में छह माह ये बंद रहे थे. इनके बाद शनि टानाभगत भी स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े. फुलवारीशरीफ से इन्हें बक्सर जेल भेज दिया गया था. वहीं इनकी मृत्यु हो गयी थी. शव गांव नहीं पहुंच सका था. मकू टानाभगत के अलावा साधू टानाभगत, एतवा टानाभगत, ढिबरा टानाभगत, थोलवा टानाभगत, छोटेया टानाभगत भी 1942 के आंदोलन में फुलवारीशरीफ जेल गये. प्रखंड कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप स्मृति पट्ट में आज भी इनकी वीर गाथा स्वर्ण अक्षरों में अंकित है.

पारिवारिक जनगणना कराने की मांग
आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाला टानाभगत समुदाय आज कई समस्याओं से घिरा है. स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज आज सम्मान के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. 27-28 मार्च, 2018 को निंद्रा गांव में टानाभगत समुदाय की बैठक हुई थी. इसमें एक स्वर से टानाभगत प्राधिकार के तहत समाज के लोगों को लाभ देने, पारिवारिक जनगणना कराने, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में नामांकन कराने, सरकार योजनाओं का लाभ दिलाने, हर जिले में टानाभगत सामुदायिक भवन का निर्माण कराने, गांव तक सड़क व पेयजल के लिए चापानल की व्यवस्था करने व समाज के पढ़े-लिखे युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की मांग की गयी थी. सबसे पहले पारिवारिक जनगणना कराने की मांग की गयी है, ताकि उनके समाज के लोगों को उनका सही हक मिल पाये. समाज के सबसे बुजुर्ग रंका टानाभगत कहते हैं कि जब केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तो तांबे का स्मृति चिह्न प्रदान किया गया था. पूर्व में कई लोगों को पेंशन देने की बात भी हुई थी.