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  • Nov 28 2019 5:42PM

फोर जी के जमाने में थ्री जी की चमक फीकी

फोर जी के जमाने में थ्री जी की चमक फीकी

पवन कुमार

प्रखंड: नामकुम
जिला: रांची 

इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन सस्ते फोर जी डाटा प्लान और स्मार्ट फोन के रहते हम थ्री जी (स्पीड वाला इंटरनेट) का इस्तेमाल क्यों करें ? यह बताते हुए संतोष महतो की नजरें अपने फोन पर टिक जाती हैं. रांची से लगभग 25 किलोमीटर दूर नामकुम प्रखंड की लाली पंचायत के कोयनारटोली की कहानी है. जंगलों और पहाड़ों से घिरे इस गांव का फैलाव लगभग दो किलोमीटर है. कुछ घर पहाड़ पर भी बने हुए हैं. गांव तक पक्की सड़क है. यहां पहुंचने पर छोटा-सा बोर्ड दिखता है, जिस पर लिखा है, यह फ्री वाई-फाई गांव है. बीएसएनएल के टावर के पास प्राथमिक विद्यालय है. इसकी दीवार पर वाई-फाई इस्तेमाल करने का तरीका लिखा हुआ है

कैसे ले सकते हैं वाई-फाई सेवा का लाभ
वाई-फाई गांव योजना के तहत पूरे गांव को वाई-फाई करने की बात की जाती है, लेकिन कोयनारटोली में वाई-फाई का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल टावर के सौ मीटर के दायरे में जाना पड़ता है. इसके बाद अपने मोबाइल का वाई-फाई ऑन करना है. सर्च करने पर बीएसएनएल ब्लू टाउन का विकल्प आयेगा. उसे खोलकर अपना फोन नंबर को रजिस्टर करें. फिर फोन में वन टाइम पासवर्ड आयेगा. पासवर्ड डालकर आप फ्री वाई -वाई सेवा का लाभ उठा सकते हैं.

क्या है फ्री वाई-फाई विलेज योजना
डिजिटल विलेज प्रोग्राम योजना के तहत जल्‍द से जल्‍द देश के सभी गांवों को इंटरनेट से जोड़ने का काम किया जा रहा है. एक साल में एक लाख ग्राम पंचायतों तथा शेष में 2019 में वाई-फाई सेवाएं शुरू करने की योजना है. बता दें कि सरकार की योजना 2022 तक नियमित इंटरनेट उपलब्धता 30 करोड़ से बढ़ा कर 70 करोड़ लोगों तक पहुंचाने की है. गांव-पंचायतों में इंटरनेट की सुविधा हो जाने से ग्रामीणों को प्रज्ञा केंद्र में काम कराने में आसानी होगी. वो भी इंटरनेट के जरिये दुनिया से जुड़ सकेंगे.

लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिस्ट स्कीम के तहत बनाये गये वाई-फाई टावर : पंकज दास
बीएसएनएल रांची जोन के सब डिविजनल इंजीनियर (को-ऑर्डिनेशन) पंकज दास ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से नक्सल प्रभावित इलाकों में लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिस्ट स्कीम के तहत वाई-फाई युक्त मोबाइल टावर लगाये गये थे. इस दौरान 2014 से लेकर 2016 तक 782 टावर पहले चरण में लगाये गये थे. दूसरे चरण में 34 और नये टावर का काम पूरा हुआ है. इसके तहत दो एमबीपीएस की स्पीड से डाटा यूजर्स को मिलेगा. इससे फायदा यह हुआ है कि जिन जगहों पर लोग पुराने बटन फोन का इस्तेमाल कर रहे थे, वो स्मार्टफोन पर आ गये हैं. प्रज्ञा केंद्र में वाई-फाई का इस्तेमाल हो रहा है. सुदूर गांवों तक भी इंटरनेट की सुविधा पंहुच गयी है. सारंडा के जंगलों में भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट पहुंच गया है, लेकिन ग्रामीणों तक अभी भी पूरी जानकारी नहीं पहुंच पायी है.

केस स्टडी-1
मुफ्त वाई-फाई सेवा का नहीं उठाया लाभ : संतोष महतो
कोयनार टोली के संतोष महतो स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आज तक उन्होंने गांव में लगे वाई-फाई का उपयोग नहीं किया है. इंटर के छात्र संतोष ने बताया कि उनके घर तक वाई-फाई का रेंज नहीं है, वाई-फाई का उपयोग करने के लिए उन्हें टावर के पास जाना होगा. ऐसे में ये संभव नहीं हो पाता है.

केस स्टडी-2
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एमबी मोबाइल डाटा पर्याप्त नहीं है : प्रद्युम्न नायक
प्रद्युम्न नायक ने बताया कि वो पहले इस सेवा का इस्तेमाल करते थे, पर अब दूसरी कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, वाई-फाई से स्पीड अच्छी नहीं मिला पाती है. ग्रामीणों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए लॉगिन करने की भी जानकारी नहीं है. ग्रामीणों को ऑनलाइन फॉर्म भरने में इस डाटा से आसानी होती.

केस स्टडी-3
फायदा है, पर नेटवर्क व डाटा की समस्या है : कुंदन नायक
मोबाइल टावर के जरिये फ्री वाई -फाई का लाभ हर ग्रामीण लेना चाहता है, खास कर मेरे जैसे लड़के, जो स्कूल में पढ़ाई करते हैं. उनके लिए यह काफी फायेदमंद होता, लेकिन सभी को इसकी जानकारी नहीं है. दूसरी कंपनी के डाटा प्लान काफी सस्ते हैं.