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  • Oct 3 2019 5:13PM

मिट्टी व सीमेंट में जान फूंकते मूर्तिकार केशव चंद्र भकत

मिट्टी व सीमेंट में जान फूंकते मूर्तिकार केशव चंद्र भकत

वीरेंद्र कुमार  सिंह
प्रखंड: पोटका
जिला: पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत कालिकापुर निवासी केशव चंद्र भकत पेशे से मूर्तिकार हैं. इनके हाथों में गजब की कला है, तभी तो पूर्वी सिंहभूम ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य ओड़िशा और बंगाल के कलाकारों में इनकी अपनी पहचान है. बेहतर कार्य के लिए मूर्तिकार केशव चंद्र कई बार पुरस्कृत भी हो चुके हैं. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने ओड़िशा के रायरंगपुर में हनुमान की प्रतिमा बनाने पर उन्हें सम्मानित किया था.

कैसे की शुरुआत
केशव चंद्र बचपन से ही इस कला को देखते आ रहे हैं. जब वह दूसरी कक्षा में थे, तब वे कालिकापुर के चक्रधर भकत के पास जाते थे. वह भी मूर्तिकला में माहिर थे. हर दिन उनके पास जाने और उनकी बनायी मूर्ति को वह बड़ी गंभीरता से देखते थे. शिवरात्रि के अवसर पर बनायी जानेवाली मूर्तियों के लिए केशव को चूहा व मोर बनाने के लिए कहा गया. धीरे-धीरे वह अन्य मूर्तियां भी बनाने लगे. चक्रधर के पास उन्होंने पांच साल तक काम किया. इसके अलावा उन्होंने परसुडीह के गोपाल पाल से भी पांच साल तक मूर्तिकला की बारीकी सीखी. धीरे-धीरे मूर्ति कला में उनकी रुचि जगी और देखते ही देखते केशव चंद्र सफल मूर्तिकार बन गये.

मिट्टी व सीमेंट से बनाते हैं मूर्ति
वर्ष 1982 से केशव चंद्र ने मिट्टी एवं सीमेंट की मूर्तियां बनानी शुरू की. ओड़िशा के रायरंगपुर में 25 फुट ऊंची हनुमान की प्रतिमा बनायी. इस प्रतिमा की सभी ने प्रशंसा की. इस कार्य के लिए राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया. केशव चंद्र ने बिरसा मुंडा की दर्जनों मूर्तियां बनायी है. पोटका प्रखंड के खैरपाल स्थित उत्कल क्लब में पिछले 40 साल से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाते आ रहे हैं. पहली बार मूर्ति बनाने का उन्हें मजदूरी के तौर पर 250 रुपया मिला था. आज उनकी बनायी मूर्तियों की कीमत हजारों में है. केशव के हाथों के जादू का आज हर कोई कायल है.

10 लोगों को मिल रहा रोजगार
विभिन्न देवी-देवताओं के अलावा पोटका स्थित हरिणा मंदिर का प्रवेश द्वार, हरिणा काली मंदिर का प्रवेश द्वार और कौवाली दुर्गा मंदिर की गुंबद में बनी दुर्गा की प्रतिमा इनकी बनायी हुई है. अब तो केशव करीब 10 लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं.

पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे पुत्र
केशव के दो बेटे व एक बेटी हैं. बेटी की शादी ही चुकी है. दोनों बेटे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. बड़े बेटे गोपाल ने फाइन आर्ट में डिप्लोमा किया है और अपने पिता के कामों में हाथ बंटाता है, वहीं छोटा बेटा कान्हू भकत गुजरात में फाइबर मूर्ति व स्टैचू बनाता है.

मेहनत के अनुरूप नहीं होती आमदनी : केशव चंद्र भकत
मूर्तिकार केशव चंद्र भकत कहते हैं कि पहले की अपेक्षा अब मूर्ति बनाने में काफी परेशानी आने लगी है. समय पर पर्याप्त मात्रा में न पुआल मिलता है और न ही मिट्टी. मूर्ति में सजावट के सामानों का दाम बढ़ जाने से बचत अधिक नहीं हो पाती है. ग्रामीणों क्षेत्रों में मूर्तियों के अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं. मेहनत के अनुरूप इस पेशे में आमदनी नहीं हो पाती. इसके बावजूद रुचि होने के कारण इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं.