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  • Aug 16 2019 1:37PM

कभी करते थे मजदूरी, आज मछली पालन से ग्रामीणों को रोजगार दे रहे चरवा उरांव

कभी करते थे मजदूरी, आज मछली पालन से ग्रामीणों को रोजगार दे रहे चरवा उरांव

पंचायतनामा टीम
प्रखंड : बेड़ो
जिला : रांची 

वर्ष 2003 की बात है. पेट पालने के लिए हमें मजदूरी करनी पड़ती थी. बेड़ो और रांची में जो भी काम मिलता, करते थे. यहां तक कि ईंट भट्ठा में काम करने के लिए राज्य से बाहर कई साल रहना पड़ा, लेकिन मछली पालन से मेरी जिंदगी बदल गयी. अब मेरे पास खुद का पक्का मकान है. गाड़ी है. घर में तमाम तरह की सुख-सुविधाएं हैं. इतना बताते हुए चरवा उरांव भावुक हो जाते हैं. चरवा उरांव बेड़ो प्रखंड समेत रांची जिले में मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं. 30 डिसमिल तालाब से इन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया और आज इनके पास मत्स्य पालन के लिए 50 एकड़ जलक्षेत्र है. कभी मजदूरी करने पर मजबूर चरवा उरांव आज मछली पालन से 50 ग्रामीणों को रोजगार भी दे रहे हैं

मत्स्य प्रसार पदाधिकारी से मिल कर बदली तकदीर
चरवा उरांव बताते हैं कि उनके गांव में मत्स्य विभाग के प्रसार पदाधिकारी आये थे, जिनसे बातचीत के बाद उन्होंने मछली पालन करने का मन बनाया. जानकारी हासिल करने के बाद रांची के धुर्वा स्थित शालीमार में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण लिया. बीज उत्पादन का भी प्रशिक्षण लिया. चरवा के लिए यह वो दौर था जब पहली बार रांची में रातू रोड से आगे बढ़े थे. पत्नी द्वारा दिये पैसे लेकर वो प्रशिक्षण के लिए आये थे. फिर लौटकर 30 डिसमिल तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया. पहली बार में ही अच्छी कमाई हुई. आज प्रत्येक वर्ष 3-4 लाख का जीरा बेचते हैं और 5-6 लाख की बड़ी मछली बेचते हैं. रांची, बेड़ो और गुमला में इनकी मछली बिकती है.

मत्स्य विभाग से मिला अनुदान
डैम में मत्स्य पालन करने के लिए चरवा उरांव ने वर्ष 2007 में जामटोली आदिवासी मत्स्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड का गठन किया. समिति में 50 सदस्य हैं. मत्स्य पालन करने के लिए चरवा उरांव को विभाग की ओर से एक पीक अप वैन, एक टेम्पो, एक मोटरसाइकिल दी गयी है. इसके साथ ही समिति के लिए चार मोटसाइकिल, नौ साइकिल, आइस बॉक्स, तीन लूना, एक ठेला, 30 मछुवारा आवास, दो पोर्टेबल हेचरी, तीन केज और जाल समेत अन्य सुविधाएं विभाग की ओर से सौ फीसदी अनुदान पर मिली. मछुवारा परिवार की महिलाओं को सिलाई मशीन दी गयी.

अब जिंदगी पटरी पर आ गयी है : चरवा उरांव
चरवा उरांव बताते हैं कि मछली पालन से उन्हें सब कुछ मिला. घर, गांव, समाज और राज्य में प्रतिष्ठा मिली. मुख्यमंत्री और राज्यपाल से सम्मान मिला. खुद की 12 एकड़ गिरवी जमीन को छुड़ाया. मुखिया का चुनाव भी लड़े, हालांकि उसमें सफलता नहीं मिली. झास्कोफिश का मनोनीत सदस्य बनाया गया. वनोत्पाद पर आधारित झामकोफेड का निदेशक नियुक्त किया गया. चरवा बताते हैं कि अब वो ग्रामीणों को मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देते हैं और मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

मत्स्य पालन से अब रोजगार मिल गया है : डेविड तिर्की
बेड़ो प्रखंड के करांजी गांव के डेविड तिर्की करांजी डैम में पांच साल से मत्स्य पालन करते आ रहे हैं. यह डैम काफी गहरा है और यहां पर सालोंभर पानी रहता है. मत्स्य पालकों को इसका लाभ मिलता है. वर्ष 2014 में गठित करांजी विस्थापित जलाशय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के तहत डैम में मछली पालन का कार्य किया जाता है. 34 एकड़ में फैले डैम में आरएफएफ और केज कल्चर के माध्यम से रोहू, कतला और पंगास मछली का पालन किया जाता है. डैम में 25 केज लगे हुए हैं, जो विभाग की ओर से अनुदान पर दिया गया है. इसके अलावा पोर्टेबल हेचरी भी हाल में डैम के पास इंस्टॉल किया गया है. डेविड बताते हैं कि मत्स्य पालन के जरिये अब समिति के लोगों को लाभ मिल रहा है.