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  • May 4 2019 12:30PM

अब बारिश में नहीं होती है परेशानी

अब बारिश में नहीं होती है परेशानी

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: बेड़ो
जिला: रांची

राजधानी रांची के बेड़ो प्रखंड अंतर्गत नेहालु-कपारिया पंचायत, प्रखंड मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बेड़ो प्रखंड की यह सीमावर्ती पंचायत है. इसके बाद से लापुंग प्रखंड की सीमा शुरू होती है. यह पंचायत भी जंगलों से घिरा हुआ है. आदिवासी बहुल इस पंचायत में पहले स्कूल भवन को छोड़कर और पक्के मकान बहुत कम दिखाई पड़ते थे. अब पंचायत के गांवों में पक्के मकान भी नजर आने लगे हैं. आवास योजना के तहत के लाभुकों को पक्का मकान मिला है. इनमें से कई ऐसे लाभुक हैं, जिनके पास कृषि योग्य जमीन भी नहीं है. मजदूरी करके किसी तरह वो अपना परिवार चलाते हैं. पक्का मकान बनाना, तो उनके लिए सपने जैसा था. पक्का मकान बनाने के बारे में वो सोच भी नहीं सकते थे, पर अब वो भी पक्का मकान में आराम से जिंदगी बीता रहे हैं. घर जैसी बुनियादी जरूरत की चिंता अब समाप्त हो गयी है. कई पीढ़ियों के बाद ही सही, पर अब लाभुक परिवार पक्के मकान में रह रहे हैं. नेहालु-कपारिया पंचायत के छह गांवों में कुल 201आवास दिये गये हैं, जिनमें से 158 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.

नेहालु-कपारिया पंचायत क्षेत्र में आवास योजना की स्थिति
वर्ष                  आवंटित मकान                           पूरे हुए मकान
2016-17              126                                     104
2017-18                65                                       52
2018-19               10                                        05

पूरी जिंदगी कमा कर भी पक्का मकान नहीं बना पाती : सुग्गी उरांइन
नेहालु-कपारिया पंचायत के गडरी गांव की सुग्गी उरांईन अपने पति के साथ दुकान चलाती हैं. खुद के बच्चे नहीं हैं, तो अपने भतीजे को अपने पास रखी हैं. सुग्गी उरांइन बताती हैं कि मिट्टी के घर में बहुत परेशानी होती थी. रख-रखाव के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. हर रोज साफ-सफाई, लिपाई-पुताई करनी पड़ती थी. हर साल खपड़ा और बांस को बदलना पड़ता था. इसमें पैसे लगते थे. काम करने के लिए मजदूर ढूंढ़ना पड़ता था. अब इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिल गया है. पक्का मकान मिलने से बुढ़ापे का सहारा मिल गया है. पूरी जिंदगी भी कमाने से पक्का मकान बनाना संभव नहीं था.

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सहारा मिला, तो पक्का मकान बन गया : रिजवान अंसारी
केनाभिट्ठा गांव के निवासी रिजवान अंसारी पक्के मकान मिलने से काफी खुश हैं. खेती-बारी करके जीवन-यापन करनेवाले रिजवान को एक मकान की आवश्यकता थी. मिट्टी का घर पुराना हो चुका था. कुछ पैसे थे, लेकिन उससे पक्का मकान बनाना मुश्किल था. जब आवास योजना के तहत लाभुक के तौर पर चयन हुआ, राशि मिली, तो खुद से भी जो पैसे थे, उसे मिलाकर मकान बना लिया. अब कोई भी मौसम हो. परेशानी नहीं होती.

बरसात की रात में अच्छी नींद आयेगी : मंजू उरांइन
लाभुक मंजू उरांइन कहती हैं कि आवास योजना के तहत आवास मिलने का एक फायदा हो, तभी न बताया जाये. इससे तो एक साथ कई लाभ मिले हैं. जहां घर बनाने के दौरान मजदूरी मिली, वहीं अब घर में चैन की नींद सो रही हूं. पहले बारिश के समय स्थिति विकट हो जाती थी. बरसात के मौसम में जब खेतों से काम करके भींग कर आती थीं, तो लगता था कि सूखी जगह में बैठ कर काम करें, पर ऐसा नहीं हो पाता था. बारिश के कारण फर्श और दीवारों में सीलन रहती थी, पर अब ऐसा नहीं है.