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  • Feb 5 2020 5:16PM

मक्का पंचायत में है शत प्रतिशत साक्षरता

मक्का पंचायत में है शत प्रतिशत साक्षरता

गुरुस्वरूप मिश्रा

 

जिला: रांची 

मक्का और टमाटर की खेती के प्रसिद्ध मक्का पंचायत शत प्रतिशत साक्षरता वाली पंचायत है. ये रांची जिले के बुड़मू प्रखंड में है. साक्षरता अभियान में प्रेरक अनीता देवी की अथक मेहनत का असर दिखा. आखिरकार पंचायत शत प्रतिशत साक्षर हो गयी.

इस पंचायत की मुखिया सीतामनी देवी हैं. इनके द्वारा विकास के कई कार्य कराये जा रहे हैं. इससे क्षेत्र की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन खेती-बारी है. सात राजस्व गांव, 14 वार्ड और करीब 10 हजार की आबादी वाली पंचायत है मक्का. इस पंचायत में मक्का, ईचापिरी, केदली, उलातू, सिरम, हुटपय और कनाडी गांव हैं. यहां के अधिकतर लोग खेती-बारी से ही अपनी आजीविका चलाते हैं. इस पंचायत के नाम एक उपलब्धि है कि ये शत प्रतिशत साक्षरता वाली पंचायत है, हालांकि सुदूरवर्ती इलाके में ये सफलता हासिल करना भी आसान नहीं था.

कड़ी मशक्कत से बनाया साक्षर

शुरुआत के दिनों में उन्हें साक्षरता अभियान के दौरान निरक्षर ग्रामीणों को साक्षर बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. कई ग्रामीण इसके लिए तैयार ही नहीं होते थे. उन्हें इसके लिए प्रेरित किया जाता था. 2014-15 में ये अभियान शुरू हुआ था. 2018 से साक्षरता अभियान ठप है. प्रेरकों को मानदेय का भुगतान तक नहीं किया गया है. इससे वे काफी मायूस हैं. बकाया राशि का इन्हें इंतजार है.

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इंटरनेट की सुविधा नहीं

डिजिटल पंचायत बनाने के लिए पंचायत सचिवालय में दो वर्ष पूर्व उपकरण लगा दिये गये हैं, लेकिन आज भी पंचायत सचिवालय में इंटरनेट की सुविधा नहीं है. यहां प्रज्ञा केंद्र भी है, लेकिन संचालक द्वारा अपने घर पर इसका संचालन किया जाता है. बिजली का कनेक्शन है, लेकिन बिजली की सुविधा नहीं है. सोलर लाइट है.

विकास कार्यों से बदल रही तस्वीर : सीतामनी देवी

मक्का पंचायत की मुखिया सीतामनी देवी कहती हैं कि शत प्रतिशत साक्षरता वाली पंचायत की उपलब्धि हासिल करने के बाद वह विकास कार्यों को लेकर लगातार प्रयासरत हैं. उनके द्वारा 29 पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है. नौ जलमीनार, 50 सिंचाई कूप, 35 डोभा, 25 मेड़बंदी और 17 टीसीबी बनवाया गया है.

उपलब्धि की खुशी, बकाया मानदेय का इंतजार : अनीता देवी

प्रेरक अनीता देवी कहती हैं कि मक्का को शत प्रतिशत साक्षरता वाली पंचायत बनाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों को उन्होंने साक्षर बनाया था. कड़ी मेहनत से उपलब्धि तो मिली, लेकिन उन्हें करीब 40 माह के मानदेय का अब तक भुगतान नहीं किया गया है. उन्हें आज भी बकाया मानदेय का बेसब्री से इंतजार है.