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  • Sep 18 2019 4:04PM

स्वच्छता के पुजारी टानाभगतों से सीखिये स्वच्छ रहना

स्वच्छता के पुजारी टानाभगतों से सीखिये स्वच्छ रहना

जगरनाथ
जिला: गुमला 

टानाभगत स्वच्छता के पुजारी हैं. अगर स्वच्छ रहना है, तो टानाभगतों से सीखिये. आज भी टानाभगतों के घर व आसपास का क्षेत्र काफी साफ-सुथरा रहता है. इसका मुख्य कारण टानाभगतों का महात्मा गांधी के प्रति प्रेम व जतरा टानाभगत के संदेश को आत्मसात करना है. सिर पर गांधी टोपी. बदन पर खादी वस्त्र. हाथों में शंख व घंट. यही टानाभगतों की पहचान है. इसके अलावा ये टानाभगत स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न अंग मानते हैं. आज भी जंगलों व पहाड़ों के बीच रहनेवाले टानाभगत शहरी क्षेत्र के लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं. टानाभगत परिवार के हर घर के आंगन में चरखा तिरंगा झंडा व तुलसी के पौधे का चबूतरा दिख जायेगा. टानाभगत समाज के लोग सुबह उठने के बाद सबसे पहले अपने घर-आंगन व घर के आसपास साफ-सफाई करते हैं. इसके बाद स्नान करने के बाद पहले तिरंगा झंडा व तुलसी पौधा की पूजा-पाठ करते हैं. इसके अलावा धरती माता, चांद, सूर्य, हवा, पानी, गौमाता व ठनका (वज्रपात) की पूजा की जाती है. उसके बाद ही घर में कोई काम शुरू होता है. बिशुनपुर प्रखंड के चेंगरी नवाटोली गांव में आज भी लोग स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं. इस गांव में जायेंगे, तो आपको हर तरफ स्वच्छता ही नजर आयेगी.

साफ-सफाई को लेकर टानाभगतों की राय

1. स्वच्छ रहना हम अपने पूर्वजों से सीखे हैं. हमारी दिनचर्या सुबह स्नान से ही शुरू होती है. घर के आस-पास हर दिन साफ-सफाई करते हैं, क्योंकि साफ-सुथरा घर में ही भगवान का वास होता है.
धनिया टानाभगत, घाघरा गांव

2. हमारा गांव कसपोड़या जरूर दुर्गम क्षेत्र में है, लेकिन इस गांव में रहनेवाले सभी टानाभगत अपने घरों के आसपास साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं. इसलिए टानाभगतों का घर व आंगन हर समय साफ नजर आता है.
बैजनाथ टानाभगत, कसपोड़या गांव

3. हम महात्मा गांधी के अनुयायी व जतरा टानाभगत के वंशज हैं. हमारी परंपरा साफ-सुथरा रहने की रही है. हमारी सादगी व स्वच्छता को देख कर ही हमारे पूर्वजों से महात्मा गांधी ने मुलाकात की थी. हमें जो सिखाया गया है, हम उसी परंपरा को निभा रहे हैं.
 
जीती टानाभगत, घाघरा गांव

3. स्वतंत्रता संग्राम में हमारे पूर्वजों का बहुत बड़ा योगदान रहा था. जतरा टानाभगत ने देश के लिए अपनी जान दे दी, लेकिन उनका आंदोलन सबसे पहले स्वच्छता पर ही था. वे लोगों को हर समय स्वच्छ रहने का संदेश देते थे. आज भी हम उस संदेश को जी रहे हैं.
बलकू टानाभगत, चेंगरी नवाटोली गांव