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  • Apr 27 2019 5:18PM

झारखंड की नयी चित्रकला शैली है बैद्यनाथ पेंटिंग

झारखंड की नयी चित्रकला शैली है बैद्यनाथ पेंटिंग

डॉ. आरके नीरद
दुमका

बैद्यनाथ पेंटिंग झारखंड में एक नयी चित्रकला शैली है, जिसे पिछले वर्ष मैंने प्रकाश में लाया और इसे

अन्य प्रचलित भारतीय चित्रकलाओं से अलग स्थापना दी, इसका नामकरण किया. इसका विश्लेषण

करते हुए मुझे इसमें एक समृद्ध चित्रकला शैली के तत्व मिले. यद्यपि अभी यह विकसित होने के

प्रक्रिया से गुजर रही है, तथापि मुझे विश्वास है कि यह झारखंड की एक नयी रैखिक थाती के

रूप में वैश्विक पहचान बनायेगी. 1990-94 में जब मैंने जादोपटिया चित्रकला शैली पर पहला

व्यवस्थित सर्वेक्षण-अध्ययन कर उसे प्रकाश में लाने-बचाने का अभियान शुरू किया था, तब

जादोपटिया पेंटिंग को लेकर भी मुझे ऐसा ही विश्वास था. बैद्यनाथ पेंटिंग का केंद्र झारखंड की

सांस्कृतिक राजधानी देवघर है, जहां बाबा बैद्यनाथ का विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर है.

इस चित्रकला शैली का नामकरण बैद्यनाथ पेंटिंग करने के मेरा आधार इसका सृजन स्थल, संदर्भ, विषय और इसके प्रतीकों का सांस्कृतिक-शास्त्रीय मूल्य है. बैद्यनाथ पेंटिंग को ठीक वैसा ही विकसित किया जा रहा है, जैसा 19वीं सदी में कालीघाट चित्रकला का विकास हुआ. इसका विषय द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ, वहां का मंदिर, पूजा पद्धति, शास्त्रीय एवं लोकथाओं व मान्यताओं एवं गतिविधियों पर केंद्रित हैं. इन विषयों को अलग-अलग कैनवास पर विशिष्ट शैली में उकेरा जा रहा है. इस पेंटिंग की पूरी श्रृंखला 108 चित्रों की होगी.

मैंने इस शैली को विषय के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा है. एक, देवघर-मंदिर और वहां के प्रतीकात्मक अवयव पर केंद्रित पेंटिंग तथा दूसरा इनसे जुड़ी अन्य प्रक्रियात्मक गतिविधियों की विशिष्ट रैखिक अभिव्यक्ति. इस पेंटिंग में प्रयुक्त प्रतीकों का तथ्यात्मक और वर्णनात्मक, दोनों महत्व है. इन प्रतीकों का मंदिर से जुड़ी सुदीर्घ परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं से गहरा संबंध है. आरंभिक विश्लेषण में मुझे ऐसा प्रतीत हुआ था कि चक्षु-चित्रण में इस पर यामिनी राय की चित्रांकन शैली का आंशिक प्रभाव है, किंतु बाद के अध्ययन में मैं इस निष्कर्ष में पहुंचा कि ऐसा नहीं है. इसमें एक-चश्म और द्वि-चश्म, दोनों प्रकार के चित्र हैं. रंगों और रेखाओं के बीच संतुलन को बनाये रखने के प्रयत्न में दोनों ने ही प्रभावी रूप से उभार लिया है.

इस चित्रकला शैली के कलाकार हैं नरेंद्र पंजियारा. नरेंद्र पंजियारा पटना आर्ट कॉलेज के पूर्व छात्र हैं. वह करीब दो दशक से देवघर में रह कर कला-साधना कर रहे हैं. भारतीय चित्रकला शैलियों का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद उन्होंने इस शैली को सृजित किया है.