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  • Nov 28 2019 5:51PM

अपनों ने किया दूर, तो बुजुर्गों का आशियाना बना सरस कुंज

अपनों ने किया दूर, तो बुजुर्गों का आशियाना बना सरस कुंज

राजीव रंजन
जिला: देवघर 

बुढ़ापे में जब अपनों के साथ की जरूरत होती है, तब वृद्धाश्रम में जीवन गुजारना काफी तकलीफदेह होता है. कुछ ऐसा ही जसीडीह-बाघमारा स्थित रेडक्रॉस की ओर से संचालित सरस कुंज परिसर में रह रहे उन बुजुर्गों के साथ हुआ, जिन्हें बुढ़ापे में सहारा नहीं देकर परिजनों ने उन्हें यहां छोड़ दिया गया है. पहले तो इनकी पीड़ा आंखों से बहनेवाले आंसू ही बयां कर देते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसे जिंदगी की कड़वी सच्चाई मान कर अब ये आगे का सफर हंस-खेल कर बीता रहे हैं. लगभग पांच साल से सरस कुंज में रह रहे वृद्ध महिला-पुरुषों की दिनचर्या युवाओं की तरह है. रोजाना सुबह उठकर मॉर्निंग वाक पर जाते हैं. सरस कुंज की वृद्ध महिलाएं तथा पुरुष अपनी पिछली जिंदगी को भूल कर नया जीवन जी रहे हैं. सभी अपने-अपने कामों में रोजाना लगे रहते हैं. कभी- कभी सभी एक जगह बैठ कर अपनी यादों को भी साझा करने में लगे रहते हैं. इसके अलावा अपने सुख-दु:ख को आपस में बांटने में लगे रहते हैं. असहाय महिलाओं तथा पुरुषों ने बताया कि अपनों से दूर रहकर भी सरस कुंज में काफी खुश हैं. यहां के बच्चों के बीच अपनों का प्यार मिल रहा है. बुजुर्गों ने कहा कि सरस कुंज के प्रबंधक मधु कुमारी, लेखापाल सुबोध कुमार समेत अन्य लोगों का काफी सहयोग रहता है. वहीं समय- समय पर यहां पूजा-अर्चना भी होती है, जिसके लिए सभी मिलजुल कर कार्य करते हैं.

बुजुर्गों की राय

1. करीब चार साल से सरस कुंज में रह रहे हैं. यहां काफी आनंद मिलता है. सुबह से कब शाम हो जाता है, कुछ पता ही नहीं चलता है. एक भतीजा है, जो कभी-कभार देखने के लिए आता है.
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हरि महरा, वृद्ध

2. सुबह उठ कर सभी एक साथ घूमते हैं. वापस लौटकर नहाने के बाद पूजा-अर्चना में लग जाते हैं. पूजा के बाद समय पर खाना मिल जाता है. खाना खाने के बाद आपस में बातचीत करते हैं. इस तरह समय कट रहा है.
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देतली देवी, वृद्धा

3. सरस कुंज में नया परिवार मिला है. यहां रहना, खाना व आपस में बैठ कर गप्पें
मारना अच्छा लगता है. इसी में पूरा दिन बीत जाता है.
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शांति देवी 1, वृद्धा

4. सुबह से लेकर शाम कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता है. सुबह जब उठते हैं, तब तक हमें चाय मिल जाती है. उसके बाद नाश्ता व खाना-पीना होता है. इस तरह आराम से समय बीत जाता है.
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मोलिना बराल, वृद्धा

5. चार साल बीत गये, पता ही नहीं चला. यहां अपनों का प्यार मिला है. जिसके लिए अपनों ने छोड़ा. वह प्यार हमें यहां मिला है. बड़े ही अाराम से हमारा दिन बीत रहा है.
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शांति देवी 2, वृद्धा