gram savraj

  • Nov 20 2017 11:55AM

खेती सीखने इस्राइल जा रहे हैं चान्हो के विकास

खेती सीखने इस्राइल जा रहे हैं चान्हो के विकास
रांची जिला मुख्यालय से 43 किलोमीटर दूर चान्हो प्रखंड का एक गांव है लुंडरी. इस गांव के किसान विकास प्रसाद के जीवन की बगिया फूलों की खेती से महक रही है. इनके पॉली हाउस में चार-पांच रंग के जरबेरा के फूल खिल रहे हैं. तीन साल की मेहनत के बाद आज विकास की पहचान इलाके के समृद्ध किसान के रूप में है. इनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड सरकार ने इस्राइल जानेवाली किसानों की टीम मेें इनका भी चयन किया है.
 
पंचायतनामा डेस्क
विकास प्रसाद एक जागरूक किसान हैं. अपने आस-पास के किसानों को आधुनिक तरीके से खेती करने के लिये जागरूक भी करते हैं. करीब 70 डिसमिल जमीन पर जरबेरा के अलावा गेंदा फूल की खेती करते हैं और इससे इन्हें अच्छा-खासा मुनाफा हुआ है. फूलों के अलावा वह अपने खेत में धान, बीन, हरी मिर्च और मटर लगाते हैं. वे पहली बार श्रीविधि तकनीक से गेहूं लगाने की सोच रहे हैं. विकास किसान जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं. इस तरह खेती-किसानी और खास कर फूलों की खेती में विकास की आज अपनी एक अलग पहचान है.
 
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास ने चान्हो में एक दुकान खोली. हालांकि, इनके पास काफी पुश्तैनी जमीन है, लेकिन खेती-किसानी की तरफ झुकाव नहीं होने के कारण इन्होंने दुकान खोल ली. दुकान अच्छी चलने लगी. इसी बीच मकान मालिक ने दुकान खाली करने का आदेश दे दिया. विकास को कुछ समझ नहीं आ रहा था. एक दिन वो घर से सीधे बिरसा कृषि विश्वविद्यालय पहुंच गये और यहां पर हॉर्टिकल्चर विभाग में केके झा से मुलाकात की. उन्होंने उन्हें फूल की खेती के बारे में बताया और एनएचएम के बारे में जानकारी दी. विकास ने जिला उद्यान पदाधिकारी अंजनी कुमार मिश्रा से मुलाकात की. जानकारी लेने के बाद फूल की खेती की ओर इनका रूझान बढ़ा और अब इन्हें कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा.
 
कृषि विशेषज्ञों की राय जरूरी : विकास प्रसाद
विकास प्रसाद कहते हैं कि फूल की खेती में सफल होने के लिए कृषि विशेषज्ञों की राय बेहद जरूरी है. जो किसान फूल की खेती करना चाहते हैं, वो विशेषज्ञों की राय अवश्य लें. जो किसान पहले से फूल की खेती कर रहे हैं, वो भी कृषि विशेषज्ञों से मुलाकात कर उनके अनुभवों को साझा करें. इससे किसानों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. बाजार पर भी किसानों को ध्यान देना होगा, तभी आपको इस खेती में मुनाफा होगा.
 
इस्राइल जाने को काफी उत्सुक हैं विकास
विकास बताते हैं कि अब वे पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक तरीके से खेती करेंगे, ताकि अधिक से अधिक मुनाफा हो सके. अब वे बागवानी की ओर कदम बढ़ायेंगे. जल्द ही लगभग दो एकड़ जमीन में पपीते की खेती करने की योजना बना रहे हैं. विकास ने बताया कि लुंडरी गांव के कई किसान फूलों की खेती करने के लिए तैयार हैं. इस्राइल दौरे को लेकर विकास काफी उत्सुक हैं और बताते हैं कि वहां से काफी कुछ सीखने को मिलेगा. उसका प्रयोग अपने खेतों में करेंगे. किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने के लिए वह प्रेरित भी करेंगे. सिंचाई के बारे में कहते हैं कि गांव में सिंचाई की दिक्कत नहीं है. गांव के तीनों ओर से नदी बहती है. एक नहर भी है, जिसे पूर्वजों ने बनाया है, उसकी बनावट ऐसी है कि गांव के हर खेत तक उसका पानी बिना किसी मशीन का उपयोग किये पहुंच जाता है, हालांकि अब नहर के जीर्णोद्धार की जरूरत है. बाजार के बारे में विकास कहते हैं कि पहले वो बीजुपाड़ा, रातू और रांची में अपने फूलों को बेचते थे, लेकिन अब स्थितियां बदली हैं. लोहरदगा और खलारी से व्यापारी स्वयं आते हैं और फूल खरीद कर ले जाते हैं.
 
किसानों के लिए फूल की खेती कैश क्रॉप
तीन साल पहले इन्होंने फूल की खेती की शुरुआत की. अभी इनके शेड हाउस से प्रति सप्ताह 600 जरबेरा के फूल निकलते हैं. हर दो दिन पर फूलों को तोड़ लेते हैं. जरबेरा पौधा तीन साल तक फूल देता है. विकास बताते हैं कि इससे ज्यादा फायदा किसी भी सब्जी की खेती में नहीं है. फूल की खेती में मेहनत भी कम है. कुछ समय के अंतराल पर निकाई-गुड़ाई कर खाद देनी पड़ती है. सिंचाई के लिए ज्यादा परेशानी नहीं होती है. सच कहा जाये तो फूल किसानों के लिए कैश क्रॉप या एटीएम की तरह है. किसानों को इससे हर सप्ताह पैसे मिल जाते हैं, जबकि सब्जी की खेती दो- तीन उत्पादन के बाद खत्म हो जाती है. सही समय पर बाजार नहीं मिलने पर किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है.
 
हर जिले से पांच-पांच किसान जायेंगे इस्राइल
राज्य के प्रत्येक जिले से पांच-पांच किसान प्रतिनिधियों को उन्नत कृषि की जानकारी के लिए इस्राइल भेजा जायेगा. यहां किसान बंजर भूमि में कृषि के तरीकों की जानकारी प्राप्त करेंगे. हर जिले के पांच-पांच किसान इस्रायल जायेंगे. रांची जिले के मांडर प्रखंड स्थित कैम्बो पंचायत के गुड़गुड़जाड़ी गांव के गंदुरा उरांव, कांके प्रखंड के चुटू पंचायत के रेंडो करमटोली गांव के सुखदेव उरांव, ओरमांझी प्रखंड के सदमा पंचायत के सदमा गांव के किसान गनसु महतो, चान्हो प्रखंड के लुंडरी पंचायत के लुंडरी गांव के किसान विकास प्रसाद और ओरमांझी प्रखंड के कुच्चू पंचायत के कुच्चू गांव के किसान भानू प्रताप का चयन इस्राइल जाने के लिए हुआ है.