gram savraj

  • Aug 21 2017 1:51PM

वृक्षों की रक्षा का संकल्प, आरसीसीएफ का अनोखा रक्षाबंधन

वृक्षों की रक्षा का संकल्प, आरसीसीएफ का अनोखा रक्षाबंधन
वीरेंद्र कुमार सिंह
हजारीबाग के क्षेत्रीय मुख्य संरक्षक वन संजीव कुमार का रक्षाबंधन पर्व मनाने का अंदाज कुछ अलग किस्म का होता है. बहनों के साथ तो राखी बंधवाते ही हैं, लेकिन उससे ज्यादा महत्व वृक्षों के साथ राखी बंधवाने में देते हैं. संजीव कुमार के लिए यह कोई नया नहीं है. 
 
वर्षों से ऐसा करते आ रहे हैं. इस बार भी रक्षाबंधन के दिन जहां लोग अपने बहनों के साथ राखी बंधवाने में व्यस्त थे, वहीं श्री कुमार कोडरमा के घने जंगलों में वृक्षों को राखी बांधने में व्यस्त थे. अपने अधीनस्थ पदाधिकारी, कर्मचारी व वन रक्षा समिति के साथ श्री कुमार कोडरमा के जंगल क्षेत्र में एक कार्यक्रम आयोजित कर रक्षाबंधन का पर्व मनाया. सबसे पहले साल वृक्ष का धूप, अगरबत्ती व नारियल के साथ विधि-विधान के तहत पूजा-अर्चना किया गया. 
 
साल के वृक्षों में तिलक लगा कर उनकी आरती उतारी गयी.  इसके बाद आरसीसीएफ संजीव कुमार ने साल वृक्ष में राखी बांध कर उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया. उपस्थित पदाधिकारियों व ग्रामीणों ने अलग-अलग वृक्षों में रक्षासूत्र बांधा. मौके पर वन प्रमंडल पदाधिकारी हजारीबाग के मिथलेश सिंह, वन क्षेत्र पदाधिकारी, वनपाल एवं वन रक्षा समिति की रूपम देवी, इदरीश मियां, प्रभात मायनी देवी आदि उपस्थित थे.
 
पौधों को बचाना जरूरी : संजीव कुमार
 
आरसीसीएफ संजीव कुमार कहते हैं कि प्रकृति अब तक हमलोगों के जनजीवन की रक्षा करते आयी है, उसकी भी रक्षा करना हमारा कर्तव्य बनता है.
 
प्रकृति की रक्षा यदि हम नहीं कर सके, तो हमारा अस्तित्व ही मिट जायेगा. पर्यावरण पर ही हमारा जनजीवन निर्भर है.  भारत कृषि आधारित देश है. जंगल बचेगा, तभी वर्षा होगी तथा खेती होगी. जंगल से हमें पारंपरिक ज्ञान भी मिलता है. ऋषि-मुनियों ने भी जंगल में ही ज्ञान की प्राप्ति की है. वन उत्पादन भी हमें जंगल से ही प्राप्त होते हैं. इसलिए हमें रक्षाबंधन के दिन पेड़-पौधे व जंगल को बचाने का संकल्प जरूर लेना चाहिए.
 
अब तक 800 गांवों के वृक्षों में बांधा राखी
 
वर्ष 2004 से संजीव कुमार जंगलों में पेड़ में रक्षासूत्र बांध कर रक्षाबंधन का पर्व मनाते आ रहे हैं. हजारीबाग के पूर्व वे गुमला, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, चाईबासा में पदस्थापित थे. फिलहाल वे हजारीबाग में पदस्थापित है. वन रक्षा समितियों को वनों के प्रति अपने बच्चों से बढ़-चढ़ कर अपनत्व की भावना जगाने में अहम भूमिका निभायी.