gram savraj

  • Aug 21 2017 1:39PM

बंजर जमीन को लगन से सींचा अब लहलहा रहे पेड़ और पौधे

बंजर जमीन को लगन से सींचा अब लहलहा रहे पेड़ और पौधे
अगर सच्ची लगन हो, तो बंजर जमीन पर भी फूल उगाये जा सकते हैं. इसी को चरितार्थ किया है खूंटी जिले के चैतन्य कुमार ने. चैतन्य कुमार बिना किसी सरकारी सहयोग के 36 एकड़ बंजर जमीन पर फल और इमारती लकड़ियों के पेड़ उगा रहे हैं. चैतन्य कुमार के फार्म में सभी जिले के डीडीसी, मनरेगा आयुक्त, खूंटी उपायुक्त, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव जैसे आलाधिकारी और कई मंत्रियों का दौरा हो चुका है. चैतन्य का फार्म खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के बिचना पंचायत के जलटंगा गांव में है.
 
फार्म एक पठार के ऊपर बना है. यहां कभी घास तक नहीं उगते थे, वहां आज हरे-भरे पेड़ लहलहा रहे हैं. चारो ओर हरियाली आने के कारण अब पहाड़ में फिर से जिंदगी लौट आयी है. इस फार्म के जरिये चैतन्य कुमार पांच लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. इस फार्म में आने के बाद खूंटी की प्राकृतिक खूबसूरती का भी एहसास होता है.
 
 इसके अलावा चैतन्य के फार्म में मिक्स फ्रूट फार्मिंग के तहत चेरी, लीची, नासपति और चीकू को मिला कर करीब 225 पौधे लगे हुए हैं. साथ ही यहां पर बेर के पौधे के बीच में गजेंद्र प्रजाति के ओर भी पौधे लगे हुए हैं. पिछले साल इसी फार्म से चैतन्य ने अदरक और मूंगफली का उत्पादन भी किया था. 
 
पिछले साल यहां सभी पौधे लगाये गये थे और वर्तमान में भी पौधे लगाने का काम जारी है. फार्म के अंदर मनरेगा के तहत एक तालाब की खुदाई हो चुकी है. एक और तालाब खोदने की तैयारी चल रही है. इसके साथ ही मनरेगा के तहत एक कुआं भी खोदा गया है. फार्म के अंदर एक नर्सरी भी बनायी गयी है. जहां पर पौधे तैयार किये जायेंगे, उसके साथ-साथ बर्मी कंपोस्ट खाद और केंचुआ खाद बनाने की भी तैयारी चल रही है.
 
फार्मिंग एक बेहतर विकल्प
 
चैतन्य कुमार को साल 2010 में झारखंड के तत्कालीन कृषि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने लाह उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए पुरस्कृत भी किया था. इससे उनके उत्साह में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई. 
 
चैतन्य के अनुसार, आज के जमाने में जहां प्राइवेट नौकरी में हमेशा काम जाने की तलवार लटकती रहती है, वहीं ऐसे समय में युवाओं के लिए यह एक बेहतर रोजगार का विकल्प भी हो सकता है. युवा इस रोजगार से जुड़ कर अच्छी आमदनी कर सकते हैं. साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपना विशेष योगदान भी दे सकते हैं. आगामी योजनाओं के बारे में चैतन्य ने बताया कि आनेवाले समय में फार्म में गाय, बकरी और मुर्गी पालन की भी शुरुआत होगी. 
 
इसके तहत जहां गोबर खाद पौधों को मिल सकेगा, वहीं दूसरी ओर तालाब में मछली पालन करने से उनके के लिए आहार भी मिल सकेगा. फार्म में देसी मुर्गी का पालन किया जायेगा, जो एक मॉडल फार्म के तौर पर राज्य में विकसित होगा. खूंटी में चैतन्य कुमार ने एक बेहतर प्रयोग किया है. बंजर और खाली पड़ी जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया है. साथ ही वो यह उम्मीद जता रहे हैं कि आनेवाले दिनों में इसका और बेहतर परिणाम देखने को मिलेगा. 
 
कैसे हुई शुरुआत
 
स्नातक तक पढ़े चैतन्य कुमार वर्तमान में गैर सरकारी संस्था उद्योगिनी में ऑपरेशन मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. उद्योगिनी में कार्य करते हुए चैतन्य कुमार ने लाह उत्पादन की बारिकियों को समझा. इस दौरान चैतन्य को संस्था की ओर से काफी सहयोग भी मिला. चैतन्य बताते हैं कि साल 2003 में नामकुम स्थित भारतीय प्राकृतिक रोल एंव गोंद संस्थान के दफ्तर गये थे. वहां उन्होंने कार्यालय परिसर में घूम कर देखा और उस समय ही मन में खुद का फार्म खोलने का संकल्प लिया था. 
 
इसके बाद वो लगातार कार्य करते रहें और अधिक-से-अधिक जानकारी जुटाते रहें. खुद का फार्म खोलने संबंधी हर पहलु को गंभीरता से जाना और बारिकी से उसका अध्ययन किया. उद्योगिनी के काम के सिलसिले में अक्सर चैतन्य किसानों से मिलते रहें और उनकी सफलता की कहानी से प्रभावित होकर इस कार्य की ओर झुकाव तेज हो गया.