gram savraj

  • Dec 5 2018 2:14PM

सात दशक बाद भी बीसा डेलीपाखन के ग्रामीणों को बिजली का है बेसब्री से इंतजार

सात दशक बाद भी बीसा डेलीपाखन के ग्रामीणों को बिजली का है बेसब्री से इंतजार

पवन कुमार

प्रखंड: अनगड़ा
जिला: रांची

 

हमर साइठ साल होय गेलक बाबू बिजली नईं देइख ही यानी मेरी उम्र साठ साल हो गयी है, पर आज तक टोले में मैंने बिजली नहीं देखी. ढिबरी-लालटेन से ही रोशनी मिलती है. यह कहना है बीसा डेलीपखन टोला के विश्वनाथ उरांव का. सात दशक बाद इस टोले में बिजली के लिए खंभे लग गये हैं, उनमें तार भी खींचे गये हैं, जिसे देख कर विश्वनाथ के मन में बिजली की आस जगी है कि जल्द ही वो अपने घर को बिजली से जगमगाते हुए देख पायेंगे. रांची जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर बीसा पंचायत के सिमराटोली वार्ड नंबर पांच का टोली है डेलीपखन, लेकिन यहां के लोग इसे बीसा डेलीपखन के नाम से ही अधिक जानते हैं. बीसा और राजाडेरा पंचायत का यह सीमावर्ती टोला है. इसमें सिर्फ चार घर हैं. वन उत्पाद और खेती यहां के ग्रामीणों की आजीविका का जरिया है.

गांव से कटे होने का झेलना पड़ता है दंश
सिमराटोली से बिल्कुल कटे होने और आबादी कम होने के कारण बीसा डेलीपखन टोले के विकास की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है. स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसकी उपेक्षा करते हैं. जो भी सरकारी योजनाएं आती हैं, वो सिर्फ सिमराटोली तक ही आकर सिमट जाती हैं. उससे आगे बीसा डेलीपखन तक नहीं पहुंच पाती हैं. यही कारण है कि आज तक यहां के ग्रामीणों को सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ शौचालय ही मिला है. डेलीपखन के सामने से एक पक्की सड़क गुजरती है. हां, डेलीपखन टोला में प्रवेश करने के लिए एक पीसीसी सड़क जरूर बनी है, लेकिन वो भी सिर्फ नाममात्र का ही है. सड़क भी ऐसी बनी है कि अगर कोई भारी वाहन उसके ऊपर से पार हो जाये, तो वह टूट जायेगी.

अब दिख रही है उम्मीद की किरण
छह नवंबर, 2018 को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अनगड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में रांची जिले को पूर्ण विद्युतीकृत जिला घोषित किया. इससे अनगड़ा प्रखंड के उन ग्रामीणों के बीच उम्मीद की किरण बंधी, जिनके यहां आजादी के बाद से अब तक बिजली पहुंची ही नहीं थी. इनमें डेलीपखन भी एक है, जहां बल्ब की रोशनी से घर तो रोशन नहीं हुए हैं, लेकिन गांव में बिजली के खंभे जरूर लगा दिये गये हैं. खंभों में तार लग गये हैं. सभी घरों में बिजली के मीटर लगा दिये गये हैं. इससे ग्रामीण काफी उत्साहित हैं कि उन्हें अब ढिबरी युग से आजादी मिलेगी.

बिजली आने से जीवन में होगा बदलाव
बीसा डेलीपखन में ग्रामीण खेती के लिए वर्षा के पानी पर निर्भर हैं. हालांकि, ग्रामीण बताते हैं कि कुआं खोदने पर बहुत जल्दी पानी निकल जाता है, पर इलाके की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उस पानी को सिंचाई के लिए खेतों तक पहुंचाना काफी मुश्किल भरा काम है. कुआं खोदना भी आसान नहीं है, क्योंकि जमीन पथरीली है. पर, बिजली आने से मोटर का इस्तेमाल ग्रामीण कर पायेंगे, जिससे पानी की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जायेगा. खेतों में सिंचाई करना भी काफी आसान हो जायेगा

यह भी पढ़ें: 70 साल के इंतजार के बाद महतो टोली में आयी  बिजली

एक घर के लिए भी उपलब्ध है बिजली

रांची जिला के ब्राम्बे पंचायत स्थित चुंद गांव से दूर झाड़ियों के बीच बने एक घर के बाहर बिजली का बल्ब जगमगा रहा है. गांव से दूर बसे इस एक घर में भी बिजली है. बिजली मिल जाने से घर वाले काफी खुश हैं. अब सुनसान जगह में कम से कम अंधेरा नहीं रहता है. घर के आस-पास सांप और बिच्छू का अब डर नहीं है. बच्चे आराम से अंधेरा होने पर भी घर के बाहर आंगन में बैठ सकते हैं. आंगन में रखे चूल्हे में भी अब खाना बन जाता है. घर के अंदर धुंआ नहीं होता है. इस तरह से प्रभु उरांव के घर में उजाला हो गया है.

सात खंभे के जरिये पहुंचायी गयी बिजली
गांव से यह घर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है. यहां पर बिजली पहुंचाना आसान नहीं था, क्योंकि बीच में सिर्फ खेत है. घर के पास से दूसरे बसाहट गांवों की दूरी दो किलोमीटर से अधिक है. यहां तक बिजली पहुंचाने के लिए सात खंभे लगाये गये. इसके बाद प्रभु उरांव के घर तक बिजली पहुंची.

सिंचाई में हो रही सुविधा
गांव के दूसरे छोर स्थित प्रभु उरांव के घर में बिजली पहुंच जाने से घर के सदस्यों को काफी सुविधा हो रही है. अब उन्हें मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे के घरों में नहीं जाना पड़ता है. घर के पास स्थित खेत में सिंचाई करने में सुविधा हो रही है. वहां पर आस-पास में जिन किसानों के खेत हैं, उन्हें भी सिंचाई करने में सुविधा हो रही है.

देर से ही सही पर अब बिजली मिल जायेगी : विश्वनाथ उरांव
बिजली के खंभे में तार और अपने घर में लगे बिजली के मीटर को दिखाते हुए विश्वनाथ उरांव बताते हैं कि अब रात में भी घर और आंगन दोनों जल्द ही रोशन होगा. वे घर में टीवी देख पायेंगे. देश-दुनिया की जानकारी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के लाभ से भी अवगत हो सकेंगे. देर से ही सही, लेकिन अब जल्द बिजली मिल जायेगी.