gram savraj

  • Mar 17 2020 5:04PM

आजीविका कैफे में स्वादिष्ट भोजन करा रही हैं रेखा व शीला

आजीविका कैफे में स्वादिष्ट भोजन करा रही हैं रेखा व शीला

पंचायतनामा टीम

किसी भी होटल में जब कोई खाना खाने जाता है तो सबसे पहले साफ सफाई और स्वाद देखता है और जहां पर ये दोनों मिल जायें, उस होटल में ग्राहकों की संख्या दिन--दिन बढ़ती जाती है. सिल्ली प्रखंड मुख्यालय के अंदर लक्ष्मी महिला कैटरिंग ग्रुप की आजीविका कैफे में दिनभर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है. आजीविका कैफे में साफ-सफाई देखते ही बनती है. इसके साथ ही भोजन भी काफी स्वादिष्ट और उचित दाम पर मिलता है. आठ नवंबर 2017 को इसकी शुरुआत हुई थी. इसके बाद से कैफे की संचालक रेखा देवी और शीला देवी की मेहनत ने इसे आज स्थिरता दी है. रोजाना कैफे में एक से दो हजार रुपये की बिक्री हो रही है. इस कैफे के जरिये दो महिला और एक पुरूष को रोजगार मिल गया है.

खाना बनाने और परोसने का मिला प्रशिक्षण
रेखा और शीला वैसे तो अपने घरों में खाना बनाती ही थीं, पर उन्हें और बेहतर खाना बनाने का प्रशिक्षण रांची स्थित गढ़खटंगा में दिया गया. जेएसएलपीएस महिला समूह से जुड़ने के बाद आजीविका कैफे खोलने के लिये यह प्रशिक्षण दिया गया, जहां उन्हें खाना बनाने और परोसने का प्रशिक्षण दिया गया. रेखा बताती हैं कि उन्हें आजीविका कैफे खोलने की प्रेरणा केरल से मिली. जब वो केरल गयी थीं, तब वहां उन्हें जो खाना मिलता था, वो आजीविका कैफे की दीदियां ही बनाती थीं. इससे रेखा के अंदर हिम्मत आयी कि जब वो महिलाएं यह काम कर सकती हैं तो यहां पर रेखा भी यह काम कर सकती है. इसके बाद रेखा और शीला इस कार्य से जुड़ गयीं.

ऐसे हुई शुरुआत
रेखा और शीला बताती हैं कि आजीविका कैफे खोलने के लिए उन्होंने समूह से लोन लिया. पहले तो शुरुआत में सिल्ली स्थित जेएसएलपीएस से नाश्ता और खाना का ऑर्डर मिलता था. ऑर्डर मिलने पर खाना बनाती थीं. 2016 में जब बीपीएम ने इन दोनों के हाथ का बना हुआ खाना खाया तो बहुत तारीफ की और आजीविका कैफे खोलने के लिए कहा. इसके बाद उनकी मदद से प्रखंड में कैफे खोलने के लिए एक जगह भी मिल गयी. अभी भी यहां पर समस्याएं हैं. कैफे में पानी की दिक्कत है क्योंकि यहां बेसिन नहीं है. नल नहीं है. बाहर से पानी लाना पड़ता है और ग्राहकों को हाथ धोने के लिए बाहर जाना पड़ता है.

मिले हैं चार पुरस्कार
धनबाद में आयोजित सरस मेले में प्रथम एवं रांची में आयोजित खादी मेले में 2 बार पुरस्कार मिला है.

प्रति प्लेट भोजन
चावल : 25 रुपये
चिकन : 50 रुपये
मछली : 25 रुपये पीस
लंबी मछली : 30 रुपये पीस
मटन : 100 रूपये

आर्थिक स्थिति में आया सुधार: रेखा देवी
मिस्सी महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य रेखा देवी बताती हैं कि पहले वो घर में काम करती थीं और अपने खेत में काम करती थीं. पति होमगार्ड में कार्यरत हैं. उस पैसे से घर चलाने में बहुत परेशानी होती थीं. इसके बाद उन्होंने आजीविका कैफे की शुरुआत की. इसके जरिये उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है. पैसे कमा कर रेखा देवी ने अब पक्का मकान बना लिया है. अब उनके पास पैसा रहता है. इससे उनके अंदर आत्मविश्वास आया है.

अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चे : शीला देवी
शीला देवी भी रेखा के साथ आजीविका कैफे संचालित करती हैं. शीला बताती हैं कि पहले वो अपने घर और खेत में काम करती थीं, पर अब वो इस लायक हो गयी हैं कि तीन लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. आजीविका कैफे के जरिये लोगों का पेट भरने का मौका मिला है. साथ ही अच्छी कमाई हो रही है. बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं. एक बेटी की शादी भी इन्होंने की है. शीला कहती हैं कि आजीविका कैफे के जरिये नेक काम करने का मौका मिला है.