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  • May 20 2019 2:26PM

आदिम जनजाति बिरहोर अब खुले में नहीं, जा रहे शौचालय

आदिम जनजाति बिरहोर अब खुले में नहीं, जा रहे शौचालय

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: अनगड़ा
जिला: रांची 

कभी जंगलों-पहाड़ों में अपना जीवन गुजर-बसर करने को मजबूर विलुप्तप्राय आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के लोग अब कॉलोनियों में सपरिवार रहे हैं. खुले में शौच जाने की बजाय वह घर के शौचालय का उपयोग कर रहे हैं. शुद्ध पेयजल के लिए सौर ऊर्जा से संचालित पानी टंकी की व्यवस्था की गयी है. इनकी जिंदगी में आये बदलाव की ये कहानी रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड की गेतलसूद पंचायत के बुकी आदिम जनजाति बिरहोर कॉलोनी की है.

अब कॉलोनियों में रहते हैं बिरहोर समुदाय
सिमडेगा के जिलपी पहाड़ पर रहकर जिंदगी गुजारने वाले आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय के लोग अब आराम में सपरिवार कॉलोनियों में रह रहे हैं. एक वक्त था, जब वे घुमंतू थे और जंगलों-पहाड़ों में ही रहा करते थे. सामान्य जिंदगी भी उन्हें मयस्सर नहीं थी. सरकारी सुविधाओं से कोसों दूर वह दुर्दिन जिंदगी जीने पर विवश थे. आज इनकी तकदीर बदल गयी है. उनके चेहरे की मुस्कान काफी कुछ कह देती है.

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हर घर शौचालय
गेतलसूद के नजदीक बुकी गांव में आदिम जनजाति बिरहोर कॉलोनी है. पक्की सड़क के ठीक किनारे. यहां 18 आदिम जनजाति बिरहोर परिवार हैं. इनकी आबादी 130 है. हर घर में शौचालय की सुविधा है. सबसे खास तो ये कि सभी लोग घर के शौचालय का उपयोग भी कर रहे हैं. अब कोई खुले में शौच नहीं जाता है. वे बताते हैं कि पहले कोई सुविधा नहीं थी, तो मजबूरन खेत में जाना पड़ता था. तालाब के किनारे जाना पड़ता था. जब से शौचालय की सुविधा मिली है, तब से वे इसका उपयोग कर रहे हैं.

2016 में बना था शौचालय
झारखंड को खुले में शौच से मुक्त(ओडीएफ) करने के क्रम में वर्ष 2016 में बिरहोर कॉलोनी में भी शौचालय का निर्माण कराया गया था. इससे पहले इन्हें शौच के लिए घर से बाहर जाने की मजबूरी थी. घर में शौचालय बनने के बाद इन्हें काफी राहत मिली. अब ये खुले में शौच नहीं जाते हैं. ये इतना आसान काम भी नहीं था. इसके लिए इन्हें काफी जागरूक किया गया. शौचालय के फायदे बताये गये. खुले में शौच के नुकसान बताये गये. आखिरकार इन्हें लगा कि शौचालय का उपयोग फायदेमंद है. लिहाजा ये इसका उपयोग करने लगे.

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मेहनत मजदूरी कर पाल रहे परिवार
अनगड़ा की गेतलसूद पंचायत में चार राजस्व ग्राम हैं. बुकी, रेशम, बनादाग और गेतलसूद. बुकी में सड़क किनारे आदिम जनजाति बिरहोर समुदाय को कॉलोनी बनाकर बसाया गया है. इनकी खेती-बारी तो नहीं है, लेकिन ये मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. कहते हैं कि रोजी-रोजगार की व्यवस्था होती, तो परिवार चलाना आसान होता.

बाउंड्री होती, तो सुरक्षित रहते
बिरहोर परिवार के लोग कहते हैं कि पहले से उनकी जिंदगी काफी बदली है. छह महिलाओं और सभी पुरुषों को भी पेंशन मिलती तो आर्थिक रूप से काफी मजबूती मिलती. वे कहते हैं कि सड़क के किनारे होने के कारण बच्चों को लेकर वे काफी असुरक्षित महसूस करते हैं. सड़क किनारे बाउंड्री कर दी जाती, तो बच्चे सुरक्षित हो जाते. तेज रफ्तार गाड़ियों से कभी भी हादसे हो सकते हैं. मौके पर ही प्रभारी मुखिया ने इन्हें इस बाबत आश्वस्त किया.

शौच करने में अब हिचक नहीं : शांति बिरहोर
लाभुक शांति बिरहोर कहती हैं कि घर-शौचालय तो उनके लिए सपना था. काफी मशक्कत के बाद सरकार की ओर से घर बनाया गया. इसके बाद शौचालय का लाभ मिला. इससे उन्हें काफी आराम हुआ है. अब खुले में शौच जाने की मजबूरी नहीं है. जाड़ा, गर्मी हो या बरसात. हर मौसम में घर के शौचालय का उपयोग करने में हिचक नहीं होती. पहले जैसी अब परेशानी नहीं है. खासकर महिलाओं और लड़कियों को काफी सुविधा हुई है. स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ये फायदेमंद है.

घर में शौचालय से मिली राहत : रजकरमा बिरहोर
रजकरमा बिरहोर कहते हैं कि पहले उन लोगों की जिंदगी तो जंगलों-पहाड़ों में ही कटती थी. न घर था, न शौचालय था. खुले में शौच करना ही उनकी नियति थी. वर्षों बाद ये सपना पूरा हुआ. डेढ़ दशक से उनकी जिंदगी में खुशहाली आनी शुरू हुई है. सरकार द्वारा कॉलोनी का लाभ मिला. इसके बाद शौचालय की सुविधा मिली. इससे उन्हें काफी राहत मिली है. घर परिवार के लोग अब आराम से बेहिचक किसी समय शौचालय का उपयोग कर लेते हैं.

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शौचालय जाने में परेशानी नहीं : प्रदीप बिरहोर
प्रदीप बिरहोर कहते हैं कि पहले काफी तकलीफ थी. अब सरकारी सुविधाओं से जिंदगी बदली है, लेकिन थोड़ी सुविधाएं और मिलतीं तो जिंदगी आसान हो जाती. कॉलोनी के बाद शौचालय मिल जाने से काफी राहत मिली है. अब कभी भी शौच जाने में परेशानी नहीं होती. खासकर महिलाओं और बच्चों को काफी आराम हुआ है. पहले खुले में शौच जाने में बड़ी दिक्कत थी. बरसात में तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था. अब इससे मुक्ति मिल गयी है.

शौचालय के उपयोग के लिए किया गया जागरूक : गीता देवी
जल सहिया गीता देवी कहती हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के क्रम में इनके लिए शौचालय का निर्माण कराया गया. इसके बाद इन्हें शौचालय का उपयोग करने के लिए जागरूक किया गया. पहले ये शौचालय का उपयोग करने को तैयार नहीं थे. खुले में शौच जाने की आदत के कारण वे शौचालय का उपयोग करने से कतराते थे. जागरूकता अभियान का असर हुआ. शौचालय के फायदे बताने के बाद ये इसका उपयोग आराम से करने लगे.

जागरूकता का हुआ असर : ददन कुमार सिंह
पूर्व उपमुखिया ददन कुमार सिंह कहते हैं कि उनके कार्यकाल में भी बिरहोर कॉलोनी में विकास के कई कार्य कराये गये थे. स्वच्छ भारत अभियान के क्रम में इस कॉलोनी में भी हर घर में शौचालय का निर्माण कराया गया. इतना ही नहीं इन्हें शौचालय का उपयोग करने समेत अन्य कार्यों को लेकर लगातार जागरूक भी किया जाता रहा है. इसका सकारात्मक असर हुआ है. ये शौचालय का उपयोग कर रहे हैं. इनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है. ये जागरूक हो रहे हैं.

हर परिवार कर रहा शौचालय का उपयोग : हेमंत महतो
प्रभारी मुखिया हेमंत महतो कहते हैं कि स्वच्छ भारत मिशन के दौरान बुकी स्थित बिरहोर कॉलोनी में भी शौचालय बनाये गये. शौचालय बनाकर सिर्फ छोड़ नहीं दिया गया. व्यवहार परिवर्तन के लिए इन्हें जागरूक भी किया गया. आखिरकार ये शौचालय का उपयोग करने लगे. समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाये जाने का सकारात्मक असर हुआ. शौचालय का फायदा बताने पर ये जागरूक हुए. आज हर परिवार शौचालय का उपयोग कर रहा है.