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  • Oct 2 2018 11:05AM

स्वच्छता के प्रति समर्पित हैं पोटका के संताल समुदाय

स्वच्छता के प्रति समर्पित हैं पोटका के संताल समुदाय

वीरेंद्र कुमार सिंह

प्रखंड : पोटका
जिला : पूर्वी सिंहभूम

साफ-सफाई के मामले में संताल समुदाय के लोगों की अलग पहचान है. यह समाज परिचय का मोहताज नहीं है. किसी भी संताल गांव में प्रवेश करते ही मन में यह सवाल उठने लगता है कि काश, हम भी अपने गांव, टोला एवं मुहल्ले को इसी तरह साफ रखते. स्वच्छता इनकी परंपरा का हिस्सा है. साफ रहना इनकी संस्कृति में है. यही कारण है कि गांवों की स्वच्छता मन मोह लेती है.

साफ-सफाई के प्रति समर्पित भूतका गांव के ग्रामीण
पोटका की शंकरदा पंचायत अंतर्गत भूतका गांव को काफी साफ-सुथरा माना जाता है. ग्रामीण सुराई मार्डी का कहना है कि भूतका गांव में 75 घर संताली समाज के लोग रहते हैं. साफ-सफाई के मामले में यह गांव काफी गंभीर है. यहां के चापाकल के आसपास भी किसी तरह की गंदगी नहीं मिलेगी. जल निकासी के लिए पास में ही सोखता बना हुआ है. हर घर में या घर के बाहर सप्ताह में चार दिन गोबर से लिपायी-पोताई होती है, ताकि पूर्व की गंदगी खत्म हो जाये. सुराई कहते हैं कि अभी तो डीप बोरिंग हो गया है, लेकिन पहले लोगों के लिए पीने का तालाब अलग तथा नहाने एवं जानवरों के लिए अलग तालाब होता था. पीनेवाले तालाब में लोग दातुन कर कुल्ला भी नहीं कर सकते थे. यह है संताल समाज की स्वच्छता के प्रति सोच.

संतालों का स्वच्छता से है विशेष स्नेह : अनीता मुर्मू
पोटका प्रखंड के राजदोहा निवासी व पूर्व मुखिया अनीता मुर्मू कहती हैं कि संताल समाज में साफ-सफाई दिनचर्या में शामिल है. इसका असर वातावरण पर भी पड़ता है. अगर हम अपने घर से लेकर टोला, मुहल्ला को साफ रखते हैं, तो डायरिया या अन्य बीमारी भी संताल गांवों में न के बराबर मिलती है. कहा भी गया है कि स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ मन का विकास होता है. सप्ताह में तीन से चार दिन घर को गोबर से लीपा जाता है. यहां तक कि संताल गांवों में पीसीसी सड़कों पर भी गोबर दिखायी पड़ेगा.

सफाई के प्रति बढ़ी है जागरूकता : सिद्धेश्वर सरदार
पर्यावरण चेतना केंद्र के संचालक सिद्धेश्वर सरदार का कहना है कि संताल के अतिरिक्त अन्य आदिवासी समाज में भी सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ी है. नहाने, बर्तन धोने एवं खाना बनाने के दौरान निकले पानी को भी सोखता गड्ढे में जमा किया जाता है. पर्व-त्योहार आने से पहले हर गली-मुहल्ले को व्यक्तिगत व सामूहिक रूप से साफ करने की परंपरा आदिवासियों में हैं.

स्वच्छता को लेकर गंभीर हैं संताली समाज के लोग : सालगे मार्डी
मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत मेरिया गांव की सामाजिक कार्यकर्ता सालगे मार्डी संताल समाज से आती हैं. साफ-सफाई के मामले में संताल समाज काफी गंभीर रहता है. खुद को साफ रखना तथा गांव को स्वच्छ रखना इनकी आदत में शुमार है. गांव के लोग जब तालाब जाते हैं, तब वह दातुन से मुंह धोते हैं. मुंह धोने के बाद वे दातुन को इधर-उधर नहीं फेंकते, बल्कि एक निर्धारित जगह पर ही फेंकते हैं. सप्ताह में एक दिन इकट्ठे सभी दातुन को जला दिया जाता है. सफाई के प्रति संताल समाज का यह तो एक उदाहरण है. पहले जब जंगल में संताल समाज की महिलाएं या पुरुष शौच के लिये जाते थे, तब शौच का भी महिला-पुरुष के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित होता था, ताकि इधर-उधर लोग शौच न करें और गांव में गंदगी न फैले.