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  • Feb 5 2020 4:37PM

पंचायती राज संस्थान और समुदाय आधारित संगठनों के आपसी सहयोग से बदलेगी तस्वीर

पंचायती राज संस्थान और समुदाय आधारित संगठनों के आपसी सहयोग से बदलेगी तस्वीर
केरल के पंचायत पदाधिकारी व प्रतिनिधियों के साथ बोकारो समेत उत्तरी छोटानागपुर के पंचायत प्रतिनिधियों का दल

दीपक सवाल 

जिला : बोकारो 

केरल शिक्षा के मामले में ही अग्रणी राज्य नहीं है, बल्कि वहां की पंचायती राज व्यवस्था भी एक मॉडल है. 16 से 20 जनवरी, 2020 तक बोकारो समेत राज्य के अन्य जिलों के पंचायत प्रतिनिधियों की टीम ने केरल की पंचायती राज व्यवस्था देखी. पंचायती राज व्यवस्था के मामले में झारखंड केरल से काफी पीछे है. झारखंड को केरल से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. टीम में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि केरल की पंचायतें हर मामले में काफी आगे हैं. वहां के मॉडल को झारखंड में उतारा जाये, तो यह राज्य भी विकास के मामले में देश का अग्रणी राज्य बन जायेगा. बोकारो समेत उत्तरी छोटानागपुर के पंचायत प्रतिनिधियों का दल प्रदान संस्था की देखरेख में केरल भ्रमण पर गया था.

ग्राम पंचायतें क्यों हैं शक्तिहीन

ग्रामीण विकास में पंचायतों की भूमिका को मजबूत करने के लिए भारतीय संविधान के 73वें संशोधन (अनुच्छेद 243 जी) के द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है. ग्राम पंचायतें लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई स्थानीय सरकारें हैं. पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत सामाजिक व आर्थिक विकास को गति देने तथा ग्रामीण समुदाय की विविध सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार हैं. झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को कार्य करने की शक्तियां दी गयी हैं, लेकिन वो अब भी धरातल पर नहीं उतर पायी हैं. इससे ग्राम पंचायत अब तक शक्तिहीन हैं. पंचायतें कैसे खुद के प्रयासों से शक्तियों को पा सकें, स्थानीय स्वशासन के रूप में विकसित होकर स्थापित हो सकें, पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार बन सकें. इसके लिए उनको प्रशिक्षित कर क्षमतावर्धन करने की आवश्यकता है.

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शक्तिशाली है ग्रामसभा

जनसमुदाय ग्रामसभा के रूप में ज्यादा शक्तिशाली है और पंचायती राज व्यवस्था में सर्वोपरि है, लेकिन वर्तमान में ग्रामसभा अपनी जरूरतों, शक्तियों एवं भागीदारी के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक नहीं है, जबकि स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों के रूप में संचालित समुदाय आधारित संगठन (सीबीओ) आज के समय में आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व स्थानीय मुद्दों एवं जरूरतों को समझते हुए स्थानीय स्वशासन की सहायक व पूरक के रूप में उभर रहे हैं. आनेवाले समय में ये सीबीओ पंचायती राज संस्थानों को और अधिक मदद कर पायें, इसके लिए उन्हें भी प्रशिक्षित होने की जरुरत है.

नागरिक साक्षरता व पंचायत सशक्तीकरण पर कई कार्यक्रम

पंचायती राज संस्थान (पीआरआई) एवं समुदाय आधारित संगठन (सीबीओ) के बीच पारस्परिक समझ व साझेदारी विकसित व सुदृढ़ होनी चाहिए, ताकि समुदाय के वंचित परिवारों तक सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों एवं योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सके. इससे लक्षित पंचायतों का सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिल सकेगा एवं ग्रामीण समुदाय की विविध सामाजिक आवश्यकताएं पूरी हो सकेंगी. ग्रामीण गरीब महिलाओं के जीवन और उनकी आजीविका में सुधार हो सके, इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए 'इंडिगो रीच' 'मिशन समृद्धि' के वित्तीय सहयोग से 'प्रदान' संस्था ने बोकारो जिले के जरीडीह, कसमार एवं पेटरवार प्रखंड की कुल नौ पंचायतों के साथ एक साल का करार किया है. इस दौरान नागरिकों के कर्तव्य व अधिकारों जैसे विषयों के लिए नागरिक साक्षरता तथा पंचायत सशक्तीकरण के लिए विभिन्न तरह के कार्यक्रम व गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं.

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मजबूत होंगी नौ पंचायतें

बोकारो जिले के तीन प्रखंडों की जिन नौ पंचायतों को मजबूत करने की योजना है, उनमें जरीडीह प्रखंड की तीन पंचायत अरालडीह, अराजू व भस्की है. इसके अलावा कसमार प्रखंड की दो पंचायत मुरहुलसुदी व दुर्गापुर तथा पेटरवार प्रखंड की चार पंचायतें सदमाकलां, पतकी, दारिद व उत्तसारा शामिल हैं. इसके अलावा पेटरवार प्रखंड की मायापुर पंचायत भी करार के लिए राजी है.

नागरिक साक्षरता व पंचायत सशक्तीकरण कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य

1. पंचायत के सदस्यों को प्रशिक्षित कर उनका क्षमतावर्धन करना, ताकि वो अपने पंचायत के लोगों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बन सकें

2. समुदाय आधारित संगठनों एवं पंचायती राज संस्थाओं के बीच एक पारस्परिक समझ के साथ साझेदारी विकसित करना, जिससे वंचित परिवारों तक सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की पहुंच सुनिश्चित हो एवं उनकी निगरानी हो सके

3. मुख्य रूप से दो संरचनात्मक सुविधाओं के कार्यक्रम जैसे- मनरेगा एवं पेयजल सुरक्षा एवं अन्य योजनाएं, जिसमें ग्राम पंचायत की सहमति होगी, उनसे संबंधित योजनाओं को ग्राम पंचायतें एवं समुदाय आधारित संगठनों (स्वयं सहायता समूह व ग्राम संगठन) के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से क्रियान्वित करना, ताकि जनता की मांग के अनुरूप सरकारी व्यवस्था द्वारा आपूर्ति संभव हो सके

4. जमीनी स्तर पर नागरिक व सार्वजनिक सेवा संस्थाओं के बीच सूचनाओं से संबंधित विषमताओं को खत्म करने के विभिन्न उपाय के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना

5. निर्वाचित सदस्यों एवं कर्मचारियों, नागरिकों एवं सीबीओ के बीच समन्वय स्थापित करना तथा उनके कर्तव्यों और अधिकारों की समग्र साक्षरता को बढ़ाना.

गतिविधियां

पंचायतों की स्थिति जानने, उनको स्थानीय स्वशासन के रूप में विकसित करने तथा पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमतावर्धन के लिए महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जायेंगी. ग्राम पंचायत ऑर्गनाइजेशन डेवलपमेंट (जीपीओडी) के तहत पंचायतों की प्रोफाइलिंग की जायेगी, जिससे संबंधित पंचायतों की जनसंख्या, संसाधन आदि का बेसलाइन तैयार किया जायेगा. ऑर्गनाइजेशनल मैपिंग- पंचायती राज व्यवस्था की अवधारणा के अनुरूप मौजूदा समय में पंचायतों की स्थिति जानने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा ये गतिविधि की जायेगी.

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पंचायतों की एक साल की कार्ययोजना तैयार करना :

1. संविधान साथियों का चयन एवं प्रशिक्षण : प्रत्येक पंचायत से दो दीदियों का चयन कर उन्हें भारतीय संविधान एवं इसमें वर्णित पंचायती राज संस्थान, सामान्य नियमों व कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वो अपने कर्तव्य और अधिकारों को जान सकें और उनकी मांग कर सकें.

2. शिविरों का आयोजन : संविधान साथियों के द्वारा गांवों में संविधान शिविरों का आयोजन कर समुदायों को जागरूक किया जायेगा.

3. हेल्प डेस्क की स्थापना : सभी पंचायतों में हेल्प डेस्क की स्थापना की जायेगी, जहां समुदाय के लोगों को उनके अधिकारों की मांग रखने में सहायता मिल सकेगी.

केरल भ्रमण कर लौटे पंचायत प्रतिनिधियों ने साझा किये अपने अनुभव

1. कसमार प्रखंड अंतर्गत मुरहुलसुदी पंचायत के मुखिया पटेलराम महतो कहते हैं कि केरल में हर सरकारी विभाग सराहनीय कार्य करता है. यहां तक कि आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बिल्कुल अलग तरह की व्यवस्था दिखी. आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे-छोटे बच्चों को काम करने के महत्व की जानकारी दी जाती है. साथ ही उनमें काम करने की आदत भी डाली जाती है. राजस्व वसूली का अधिकार प्राप्त होने के कारण भी वहां की पंचायतें काफी मजबूत हैं. हर एक पंचायत के पास 8-10 करोड़ तक के अपने फंड हैं. उससे स्वरोजगार विकसित कर लोगों को रोजगार मुहैया कराये जा रहे हैं.

2. भ्रमण दल में गये रामकिशुन महतो बताते हैं कि उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला. यह अनुभव हुआ कि हमलोग अभी काफी पीछे हैं. वहां की कार्यप्रणाली को यहां अमलीजामा पहनाया जाये, तभी राज्य में पंचायती राज व्यवस्था सार्थक साबित होगी. इसके लिए सरकार को भी पंचायतों को सारे अधिकार देकर मजबूत बनाने की जरूरत हैं. जब तक पंचायतों के पास सारी शक्तियां नहीं होंगी, पंचायतें मजबूत नहीं बन सकेंगी, हालांकि रामकिशुन महतो यह भी बताते हैं कि वहां ऐसा बहुत कुछ सीखने को मिला, जिससे हम वर्तमान व्यवस्था में भी अगर ईमानदारी से पहल करें तो पंचायतों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती है.

पंचायत प्रतिनिधि आपसी सहयोग से विकास करने को उत्सुक : जयश्री

प्रदान की को-ऑर्डिनेटर जयश्री कहती हैं कि पंचायत प्रतिनिधियों व ग्राम संगठनों की दीदियों की 26 सदस्यीय टीम को पांच दिवसीय केरल एवं दो दिवसीय पश्चिम बंगाल का भ्रमण कराया गया. इसके तहत केरल के त्रिस्सुर जिले में स्थापित सुदृढ़ पंचायती राज व्यवस्था को देखने, समझने और उनसे सीखने के उद्देश्य से बोकारो जिले के जरीडीह, कसमार व पेटरवार प्रखंडों से 26 सदस्यों की टीम ने पांच दिन (16-20 जनवरी) तक परिभ्रमण किया. यहां से वापस लौटकर सभी पंचायत प्रतिनिधि अपनी-अपनी पंचायतों में सीबीओ के आपसी सहयोग से विकास करने को काफी उत्सुक हैं. इससे पहले जरीडीह, कसमार एवं पेटरवार प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधि एवं ग्राम संगठनों की दीदियों की 15 सदस्यीय टीम पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकतुआ प्रखंड की प्रताप आदित्यनगर पंचायत की स्थापित व्यवस्था 26-27 दिसंबर, 2019 को देख कर लौट चुकी है. इस भ्रमण के बाद संबंधित पंचायतों में बदलाव लाने की योजना है.