gram savraj

  • Mar 18 2019 6:20PM

लुकैया के रूपलाल महतो की बगिया में औषधीय पौधे

लुकैया के रूपलाल महतो की बगिया में औषधीय पौधे

कुमार गौरव
प्रखंड: बगोदर
जिला: गिरिडीह

गिरिडीह जिला अंतर्गत बगोदर प्रखंड मुख्यालय से छह किमी दूर अड़वारा पंचायत स्थित लुकैया गांव के किसान रूपलाल महतो अन्य फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधों की भी खेती करते हैं. वह 10वीं पास हैं. पिछले पांच साल से वह अपने बगीचे में औषधीय पौधे लगा रहे हैं. पथरी, कान दर्द और खांसी समेत अन्य बीमारियों के इलाज में ये औषधीय पौधे कारगर साबित हो रहे हैं

औषधीय पौधों से ग्रामीणों का करते हैं नि:शुल्क इलाज
रूपलाल महतो बताते हैं कि उनके दादा और पिताजी आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए जंगल से जड़ी-बूटी लाकर कई असाध्य रोगों का इलाज किया करते थे. इसी से प्रेरित होकर वह औषधीय पौधे लगाकर लोगों का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं. अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर सही समय पर लोगों को दवा नहीं मिल पाती है. ऐसे में ये औषधीय पौधे रामबाण साबित होते हैं. कई ग्रामीणों को इसका लाभ मिल चुका है.

पथरी में पत्थर चट्टा का उपयोग बेहतर
शुगर, पेट फूलना एवं दर्द निवारण को लेकर औषधीय दवा का उत्पादन किया जा रहा है. एलोयविरा जैसे औषधीय पौधे भी लगाये गये हैं. इसके पत्ते के छिलके को चेहरे में लगाया जाये, तो दाग-धब्बा हट जाता है. इसके पत्तों को पीस कर जूस बनाया जाता है, जो पेट संबंधित रोगों में कारगर साबित होता है. कान से जुड़े रोगों के उपचार और खांसी में आराम दिलाने के लिए तुलसी पौधा लगाया गया है. पथरी में पत्थर चट्टा का उपयोग बेहतर है.

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सर्पगहवा लगाने से नहीं आयेगा आपके घर सांप
रूपलाल ने अपनी बगिया में औषधीय पौधा सर्पगहवा लगाया है. इस पौधे के गंध से सांप घर में प्रवेश नहीं करता है. सांप काटने पर इसके पौधे का उपयोग किया जा सकता है.

सरकारी स्तर पर नहीं मिलती मदद
रूपलाल महतो कहते हैं कि औषधीय पौधों के अलावा अन्य फसलों की भी खेती करते हैं. स्थानीय लोगों का औषीधीय पौधों से फ्री में इलाज भी करते हैं. औषधीय पौधों की खेती को लेकर अबतक सरकारी स्तर पर कोई सहयोग नहीं मिला है. सहायता मिलने से किसानों को प्रोत्साहन मिलता.

औषधीय पौधों की खेती को मिले बढ़ावा : सुरेश कुमार शक्ति
वनवासी विकास आश्रम के सचिव सुरेश कुमार शक्ति कहते हैं कि जिले के अधिकारियों की अनदेखी के कारण औषधीय पौधों का उत्पादन करनेवाले किसानों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसे बढ़ावा मिलना चाहिए.