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  • Mar 18 2019 6:03PM

गुणकारी चिरौता के कई फायदे

गुणकारी चिरौता के कई फायदे

नवीन कुमार
जिला: साहिबगंज

साहिबगंज जिले की राजमहल पहाड़ी में बरसात के वक्त बड़ी संख्या में औषधीय पौधे उग जाते हैं, जिसे लाकर लोग अपने घरों में लगा लेते हैं. हर घर में औषधीय पौधे लगे मिल जायेंगे. प्राय: लोग अपने घरों में चिरौता लगाते हैं. इसे पीने से खून साफ होता है. यह कई बीमारियों में फायदेमंद है. इसके अलावा कई ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनका लोग उपयोग किया करते हैं.

ये हैं औषधीय पौधे
राजमहल के इस क्षेत्र में पथलचूर, लेमन ग्रास, हड़वाक्स, तुलसी, नीम, काला बबूल, सफेद तुलसी, हड़जोड़, काली तुलसी, सौंफ, अश्वगन्धा, अपराजिता, लौंग, जामुन, पीपल, लाल चंदन, चित्रक, अंगुलिया सुहर, सुहर, निगुंडी, जेट्रोफा, अंगूर, काजू, अनार, पुदीना, ब्राह्मी, गेंदा, धतूरा, आंवला एवं सिंदूर समेत अन्य औषधीय पौधे हैं.

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उपयोग व उपचार
चिरौता को पानी में फूलाकर उस पानी को पीते हैं, जिससे खून साफ होता है. पथलचूर के फूल को औषधि के रूप में खाते हैं. लेमनग्रास के पत्ते को पानी में उबाल कर पीने से फायदा होता है, तो तुलसी के पत्ते को खाया व उबालकर पीने से खांसी सहित अन्य बीमारियां दूर होती हैं. तुलसी की प्रजाति सफेद तुलसी खांसी व बुखार सहित अन्य रोग में उपयोगी होती है. काली तुलसी दर्द व ताकत में कारगर साबित होती है. जेट्रोफा दांत दर्द व चर्म रोग में फायदेमंद है. जामुन के बीज व जामुन से डायबिटीज, गैस एवं पाचन क्रिया में मदद मिलती है. पुदीना पेट दर्द समेत अन्य रोगों के इलाज में बेहतर है.

औषधि से ग्रामीणों को मिलता लाभ
सभी गांवों व घरों में तुलसी, एलोयवेरा सहित अन्य औषधीय पौधे लगे हैं. आज भी पहाड़ पर कई ऐसे परिवार हैं, जो जंगलों में उगनेवाली जड़ी-बूटी के जरिये अपने व अपने परिवार का इलाज खुद करते हैं. पहाड़ से नीचे उतरकर बहुत कम ही लोग सीरियस होने पर अस्पताल या डॉक्टर के पास जाते हैं.

ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक : प्रिंस गोप
वन विभाग के प्रिंस गोप बताते हैं कि जब औषधीय पौधों को लगाया जाता है, तो वहां बोर्ड लगाकर उस पौधे का नाम और बीमारी में फायदेमंद की जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया जाता है.