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  • Dec 31 2018 4:26PM

रामतीर्थ धाम में भगवान राम के पदचिह्नों की होती है पूजा

रामतीर्थ धाम में भगवान राम के पदचिह्नों की होती है पूजा

रवींद्र यादव
पश्चिमी सिंहभूम

रामतीर्थ धाम के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है. यहां भगवान राम के पदचिह्नों की पूजा-अर्चना होती है. रामेश्वर बाबा के यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है. पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत नोवामुंडी प्रखंड के देवगांव में स्थित है रामतीर्थ धाम. यह धाम वैतरणी नदी पर अवस्थित है. चार सीमावर्ती राज्यों के श्रद्धालु मकर संक्रांति के दिन यहां पूजा-अर्चना करते हैं. राज्य सरकार ने इसे साल 2016 में पर्यटन स्थल घोषित किया

रामतीर्थ धाम की महता
पौराणिक मान्यता है कि मां वैतरणी आदि गंगा के रूप में अवस्थित है. त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामचंद्र वनवास के दौरान माता सीता व अनुज लक्ष्मण के साथ रामतीर्थ में पधारे थे. यहां शिवलिंग की स्थापना कर खुद पूजा की थी. यात्रा के दौरान ठहरने के कारण इसका नाम रामतीर्थ पड़ा है, जो देवगांव से एक किलोमीटर की दूरी पर है. देवगांव स्थित वैतरणी के रामतीर्थ के समीप मां वैतरणी दक्षिणायन होकर बहती है, जहां से कांवरिये जल उठाकर कर मुरूगा महादेव स्थित ज्योर्तिलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि जलाभिषेक से श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी भी होती हैं.

हर साल 14 जनवरी को लगता है मेला
रामतीर्थ धाम में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन बड़ा मेला लगता है. झारखंड के अलावा सीमावर्ती राज्य जैसे ओड़िशा के क्योंझर, मयूरभंज व सुंदरगढ़ जिले से लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना व घूमने आते हैं. इसके अलावा शिव रात्रि में महिला श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी जाती है. यहां रात भर भजन-कीर्तन के साथ आरती होती रहती है. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु वैतरणी नदी में डुबकी लगा कर पूजा-अर्चना करते हुए मन्नतें मांगते हैं.

हमेशा होती रहती है पूजा-अर्चना
रामेश्वर बाबा के मंदिर में जलाभिषेक, महारुद्राभिषेक, सप्तसती चंडी पाठ, नवग्रह पूजा, काल सर्प योग पूजा, सत्यनारायण पूजा, शनिचराय पूजा, प्रायश्चित कर्म, वार्षिक श्राद्ध, चूड़ा कर्म यानी मुंडन, व्रतोपनयन, मानसिक नाग समर्पण, वृषभ उत्सर्ग, शिव रात्रि, राम नवमी, रथ-यात्रा, सावन मेला, कार्तिक पूर्णिमा, अस्थि-विसर्जन, पितृ-श्राद्ध व तर्पण, महाल्या, सावित्री व्रत, तारिणी व्रतसुदशा व्रत आदि के लिए तीन पंडित नियुक्त हैं. इसमें पंडित अंतर्यामी सतपती, निरंजन पति, ब्रह्मानंद दास मुख्य हैं.

आज भी हैं कई समस्या
रामतीर्थ धाम को राज्य सरकार ने पर्यटन स्थल घोषित किया है. वैतरणी नदी में आज भी अस्थि कलश प्रवाहित होती है. मंदिर कमेटी बिजली संचालित शवदाह गृह निर्माण की मांग लगातार कर रही है, पर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया. तत्कालीन पर्यटन मंत्री जोबा मांझी ने इसे विकसित करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखायी.

नये साल का आनंद उठाइये, मगर सावधानी से : सनत प्रधान
रामतीर्थ धाम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सनत प्रधान कहते हैं कि इस पर्यटन स्थल पर पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था रहती है. वहीं पिकनिक क्षेत्र में शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंध है. पर्यटकों को सुरक्षित रखने संबंधी कई सूचनापट्ट भी लगाये गये हैं.

विकास के लिए फंड उपलब्ध नहीं हुआ : मधु कोड़ा
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार भले ही इसे पर्यटक स्थल घोषित कर दी हो, लेकिन विकास के लिए अब तक फंड उपलब्ध नहीं करायी. विधायक फंड से कई कार्य हुए हैं, जो अपर्याप्त हैं. पर्यटन स्थल को जोड़ने के लिए रामतीर्थ स्थल से सीमावर्ती राज्य ओड़िशा को जोड़ने के लिए चार करोड़ का फंड दिया गया था. इससे पुल का निर्माण हुआ. ओड़िशा से रामतीर्थ आवागमन में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बहाल की गयीं.

सौंदर्यीकरण को लेकर विधानसभा में बुलंद की आवाज : गीता कोड़ा
विधायक गीता कोड़ा ने कहा कि उन्होंने पर्यटन स्थल रामतीर्थ धाम के सौंदर्यीकरण के लिए विधानसभा में आवाज उठायी, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला. डांगुवापोसी रेलवे स्टेशन से रामतीर्थ धाम तक जानेवाली 11 किमी पक्की सड़क निर्माण का टेंडर डाला गया है. वैतरणी नदी किनारे हो रही कटाव को रोकने के लिए विधायक फंड से टूड़सायी में काम कराया जा रहा है.

कैसे पहुंचें रामतीर्थ धाम
देवगांव स्थित रामतीर्थ धाम पहुंचने के लिए सड़क व रेल मार्ग की सुविधा है. अगर आप जमशेदपुर से रामतीर्थ धाम आना चाहते हैं, तो चाईबासा होते हुए जैंतगढ़ पहुंचें. यहां से तीन किलोमीटर की दूरी पर रामतीर्थ धाम है. रेलमार्ग से जमशेदपुर से टाटा-गुवा पैसेंजर, हाबड़ा-बड़बिल पैसेंजर से डांगुवापोसी उतरते, यहां से 11 किलोमीटर की दूरी तय कर भाड़े के वाहनों से जाना पड़ता है. चारों तरफ से रामतीर्थ जाने के लिए सड़कों की सुविधा है. सीमावर्ती राज्य ओड़िशा के चंपुआ से चार किलोमीटर की दूरी पर रामतीर्थ धाम है.