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  • Jun 13 2019 3:18PM

झूमर लोकगायिका मधुश्री हटियाल हुईं सम्मानित

झूमर लोकगायिका मधुश्री हटियाल हुईं सम्मानित

पंचायतनामा टीम

झूमर लोकगायिका. आकाशवाणी कोलकाता की उद्घोषिका. मिदनापुर के सरकारी शिवालय विद्यालय में शिक्षिका. अपनी स्वयंसेवी संस्था मरमिया के जरिये कला-संस्कृति के संरक्षण को प्रतिबद्ध. संगीत ही जिनकी जिंदगी है. ताउम्र कला-संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए विश्वविद्यालय खोलने की तमन्ना रखनेवाली. पश्चिम बंगाल के झारग्राम के रघुनाथपुर गांव की दिलकश आवाज की मालकिन उस बिटिया का नाम है मधुश्री हटियाल. झारखंड राज्य बाल भवन द्वारा रांची में कार्यक्रम हुआ. पद्मश्री मुकुंद नायक, मेघनाथ टोप्पो, हरेन ठाकुर व सुबीर लाहिड़ी ने उन्हें सम्मानित किया. मौके पर बाल भवन की निदेशक अभिलाषा एवं सिटीजन फाउंडेशन के निदेशक गणेश रेड्डी समेत अन्य मौजूद थे

बचपन से ही संगीत के प्रति रहा झुकाव
मधुश्री हटियाल कहती हैं कि बचपन से ही गीत-संगीत के प्रति झुकाव रहा है. पिता सुनिति कुमार हटियाल का संगीत से लगाव था. लिहाजा वह भी पिता के साथ अखड़ा पहुंच जाती थीं और झूमर समेत अन्य कार्यक्रमों का लुत्फ उठाती थीं. इसका असर हुआ कि झूमर उनमें रच-बस गया. अब तो यही गीत-संगीत जिंदगी है.

पीढ़ी दर पीढ़ी खत्म हो रही कला
वह कहती हैं कि नृत्य, गीत और वाद्य का संगम है संगीत. इसका बेहतर उदाहरण है लोकगीत. पीढ़ी दर पीढ़ी खत्म हो रही कला चिंता का विषय है. आगे बढ़ने की बजाय यह धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है. इसका संरक्षण जरूरी है. इसके लिए झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के सीमावर्ती इलाके में कला-संस्कृति के संरक्षण को लेकर विश्वविद्यालय खोलने की तमन्ना है.

लोक संस्कृति पर कर रहीं रिसर्च
मधुश्री लोक संस्कृति में झूमर पर रिसर्च कर रही हैं. वह विद्यासागर यूनिवर्सिटी से एमए कर चुकी हैं. कहती हैं कि झारखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर आना-जाना लगा रहता है. यहां अपने घर जैसा लगता है.