gram savraj

  • Feb 1 2019 7:08PM

जम्मू-कश्मीर के नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को झारखंड के दो मुखिया ने दिया प्रशिक्षण

जम्मू-कश्मीर के नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को झारखंड के दो मुखिया ने दिया प्रशिक्षण

पंचायतनामा डेस्क

जम्मू-कश्मीर में नवंबर 2018 को पंचायत चुनाव हुए थे. चुनाव के बाद जो जनप्रतिनिधि चुन कर आये, उन्हें उनके कार्यों और अधिकारों की बेहतर जानकारी के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने के लिए झारखंड के दो मुखिया रांची जिला अंतर्गत लालखटंगा पंचायत के रितेश उरांव और बोकारो जिला अंतर्गत बुंडू पंचायत के अजय कुमार सिंह जम्मू कश्मीर गये थे. श्रीनगर में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चला. 21 से 24 जनवरी तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 4 जिला बारामुला, बड़गाम ,कुपवाड़ा, श्रीनगर के 200 सरपंचों ने हिस्सा लिया. सर्ड की ओर से दोनों मुखिया का चयन प्रशिक्षण के लिए किया गया था. लालखटंगा मुखिया रितेश उरांव मास्टर ट्रेनर भी हैं

झारखंड की पंचायतों में हो रहे विकास कार्यों को बताया
प्रशिक्षण के दौरान रितेश उरांव और अजय कुमार ने झारखंड की पंचायतों में हो रहे विकास और पंचायत की उपलब्धियों को उनके समक्ष रखा. रितेश उरांव ने बताया कि झारखंड में पचास फीसदी पंचायतें विकास की दौड़ में शामिल हो गयी हैं. पंचायतों के मुखिया और जनप्रतिनिधि जागरूक हो गये हैं, अपने कार्य और अपने अधिकारों को समझने लगे हैं, जिससे विकास कार्यों में तेजी आ रही है. ग्राम सभा को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता आयी है और जनभागीदारी भी बढ़ी है. स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पंचायतों में बेहतर कार्य हुए हैं. मनरेगा की स्थिति में भी सुधार हुआ है. पंचायत के विकास के लिए जो भी राशि दी जाती है उसका खर्च सही तरीके से हो रहा है.

मनरेगा भुगतान को लेकर आयी समस्या
प्रशिक्षण के दौरान वहां उपस्थित सभी 200 सरपंचों ने अपनी समस्याएं बतायीं और सवाल पूछे. सबसे ज्यादा सवाल मनरेगा से संबंधित थे. अधिकांश सरपंचों ने बताया की मनरेगा में भुगतान सही समय पर नहीं हो पाता है और राशि भी बहुत कम है. रितेश उरांव ने उन्हें बताया कि मनरेगा को हमेशा 60:40 के अनुपात में लेकर चलना चाहिए. 60 फीसदी खर्च मजदूरी के लिए और 40 फीसदी खर्च सामग्री में करना चाहिए. साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो भी मजदूर मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं उनका आधार कार्ड बैंक खाता से लिंक हो.

ग्रामसभा की ताकत और जिम्मेदारी समझाया
प्रशिक्षण के दौरान सभी सरपंच को ग्राम सभा की अहमियत के बारे में बताया गया. उन्हें बताया कि योजना लेने के लिए ग्राम सभा की सहमति जरूरी है. इसलिए हमेशा ग्राम सभा निर्धारित तिथि को करना चाहिए और सभी ग्रामीणों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए. उन्होंने बताया कि किस प्रकार शुरुआती दौर में समस्याएं उत्पन्न होती हैं और उन्हें कैसे दूर करते हुए आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके. जम्मू कश्मीर में ग्रामीण सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है. रितेश उरांव ने सुझाव दिया कि सभी सरपंच मनरेगा के तहत योजनाएं लेकर ग्रामीण सड़कों का निर्माण करा सकते हैं, उससे यह समस्या दूर हो सकेगी.

बेस लाइन सर्वे का महत्व समझाया
कई सरपंच जो दूसरी बार चुने गये थे, उन्होंने बताया कि पंचायत में विकास के लिए पैसा नहीं आता है. किस प्रकार से गांव के विकास के लिए राशि मंगायी जाती है. उन्हें बताया गया कि पंचायत के विकास के लिए राशि लेने के लिए जीपीडीपी बनाकर देना होता है. इसके तहत तो राशि होती है वह जनसंख्या और क्षेत्रफल पर निर्धारित की जाती है. इसके साथ बेसलाइन सर्वे के महत्व को समझाया और पंजियों का संधारण के बारे में बताया गया. सभी सरपंच को कम लागत या बिना लागत की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी गयी.